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यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंग्लैंड के शोधार्थी भी पहुंचे इस गांव, सरकारी स्कूल की दीवारों को बनायेंगे कुछ खास

पंचायत समिति के जखोड़ा गांव के राजकीय उमावि की दीवारें जल्द ही जल-पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगी।

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चिड़ावा. पंचायत समिति के जखोड़ा गांव के राजकीय उमावि की दीवारें जल्द ही जल-पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगी। दीवारों पर भित्ति चित्र बनाकर लोगों को जल-पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाएगा। लोगों का जागरूक करने का तरीका भी ठेठ ग्रामीण परिवेश पर आधारित रहेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंग्लैंड, आईआईटी मुंबई, पर्यावरण अध्ययन केंद्र जयपुर एवं डालमिया सेवा संस्थान की ओर से किए जा रहे इस कार्य में ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जा रहा है। जिसका शुभारंभ भी हो चुका है। जल-पर्यावरण संरक्षण के इस कार्य में भागीदारी निभा रहे यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंग्लैंड के प्रो. माइकल ब्रुसर, शोध विद्यार्थी ऐमा ग्रिफन, पर्यावरण अध्ययन केंद्र जयपुर के डॉ. एमएस राठौड़, आईआईटी मुंबई की मीना सबलानी, नरेंद्र प्रतापसिंह और रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान के परियोजना प्रबंधक भूपेंद्र पालीवाल शुक्रवार को जखोड़ा पहुंचे। गांव की सरकारी स्कूल में ग्रामीणों व स्टाफ सदस्यों से चर्चा कर आगामी रूपरेखा तैयार की। इस मौके पर संस्थान के कार्यकर्ता संजय शर्मा, अनिल कुल्हार, राकेश, सरोज देवी, मनोजकुमार, अमरसिंह सिंगल, सज्जन कुमार, मांगेलाल, बलबीर, मूंगाराम आदि उपस्थित थे।


ये दर्शाएंगे चित्रों में
जखोड़ा के सरकारी स्कूल में भित्ति चित्रों को भी अलग-अलग खंड में बांटा जाएगा। जिसके पहले खंड में सात-आठ दशक के ग्रामीण परिवेश, दूसरे में बिजली व वाहन सुविधाओं के बाद की स्थिति, तीसरे में जल दोहन व चौथे में वर्तमान में जल-पर्यावरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाया जाएगा।


दस सदस्य टीम की देखरेख में होंगे कार्य
गांव की राजकीय स्कूल की दीवारों पर भित्ति चित्र बनाने का कार्य करीब दस दिन में पूरा होने की उम्मीद है। इस कार्य को छह सदस्य दल की देखरेख में पूरा किया जाएगा। संस्था के परियोजना प्रबंधक पालीवाल ने बताया कि बीकानेर के फड पेंटिंग के चित्रकार कल्याण जोशी व मुंबई की मीना सबलानी के नेतृत्व में भित्ति चित्र बनाए जाएंगे। जिसमें ग्रामीण भी सहयोग देंगे।