
प्रभाष नारनौलिया. लक्ष्मणगढ़ (सीकर).
समाज में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जो धर्म, जाति और संप्रदाय की दूरियां पाटकर लोगों को अमन, चैन और भाईचारे के साथ रहना सिखा रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है राजस्थान के सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ के मोहम्मद तौफिक का परिवार।
उम्र के छह दशक देख चुके तौफिक का परिवार पिछले कई दशक से लक्ष्मणगढ़ कस्बे में हिन्दुओं के मोक्षधाम (श्मशान) की सफाई, सुरक्षा तथा सौंदर्यकरण का कार्य कर रहा है। वो भी नाममात्र के मेहनताने पर।
तौफिक के पिता जीवण खां ने करीब 25 सालों तक भूतनाथ श्मशान घाट में सेवा देकर उसे सुंदर बनाए रखा। वहीं तौफिक पिछले 10 सालों से कस्बे के उत्तरी-पश्चिमी छोर स्थित जयपुरिया श्मशान घाट पर सौन्दर्यकरण का कार्य कर रहे हैं।
तौफिक की कड़ी मेहनत ने श्मशान भूमि को पर्यटन स्थल जैसा रमणीक बना दिया हैं। यही कारण है कि जिस श्मशान भूमि में अक्सर लोग जाने से डरते हैं, वहां आज सैकड़ों लोग प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। तौफिक के चारों बेटे जमील, हारून, सद्दाम व बबलू भी पिता के काम में हाथ बंटाते हैं।
एक मुस्लिम होकर तौफिक का इस तरह हिन्दू मोक्षधाम के सौन्दर्यकरण में हाथ बंटाना एक तरह से सांप्रदायिक सद्भाव की बड़ी मिसाल कहा जा सकता है।
मोक्षधाम में मिलता है सुकून
तौफिक ने बताया कि धर्म या जाति के आधार पर तो मानव ने मानव को बांटा है, वरना ऊपरवाले के यहां तो क्या हिन्दू और क्या मुसलमान, वहां तो सब एक ही हैं।
तौफिक ने बताया कि जब पिता जीवण खां उक्त कार्य करते थे तो मैं भी वहां कभी-कभार उनका हाथ बंटाने जाता था। उस समय क्षण भर के लिए ऐसा सूकुन मिलता था कि मानो जन्नत यहीं हैं। उसी से प्रेरणा लेकर बाद में मैं भी इसी कार्य में जुट गया।
इनका कहना है...
आजीविका कमाने तथा पेट भरने के तो कई साधन हैं, लेकिन तौफिक का कार्य एक पेशा न होकर एक सेवा है। विशेष तौर से आज के समय मे उसका कार्य धर्म-संप्रदाय के नाम पर लडऩे वालों के लिए एक सीख बन सकता है। लोगों को उससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
- एडवोकेट ललित पुरोहित, अध्यक्ष, संचालन समिति, जयपुरिया घाट मुक्तिधाम, लक्ष्मणगढ़, सीकर
Published on:
28 Apr 2018 07:56 pm
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