
यूथ डे: मुस्लिम प्रोफेसर करेंगे स्वामी विवेकानंद से जुड़े कई रहस्य का खुलासा ,सबसे बड़ी किताब लिखने का किया दावा
सीकर. स्वामी विवेकानंद को जानने-समझने में वे दस साल से जुटे हैं। अब वे उन पर एक बड़ा ग्रंथ लिख रहे हैं, जिसमें उनके जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलू दुनिया के सामने आ सकेंगे। हम बात कर रहे हैं झुंझनूं जिले के भीमसर निवासी डॉ जुल्फिकार की। डॉ जुल्फिकार ने स्वामी विवेकानंद के जीवन व रामकृष्ण मिशन पर 2009 में पहला शोध ग्रंथ पूरा किया था। इसके बाद से उन्होंने इसे जीवन का मिशन बना लिया। अब तक वे स्वामी जी व रामकृष्ण मिशन पर चार पुस्तकें व 300 से ज्यादा आलेख लिख चुके हैं। डॉ जुल्फिकार वर्तमान में जेजेटी विश्वविद्यालय चुड़ैला झुंझनूं में कार्यरत हैं।
विवेकानंद पर शोध करने वाले पहले मुस्लिम
डॉ जुल्फिकार स्वामी विवेकानंद व रामकृष्ण मिशन पर लेखनी चलाने वाले संभवतया पहले मुस्लिम लेखक हैं। उन्होंने इसके लिए काफी समय रामकृष्ण मिशन में गुजारा। गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद पर उनकी पुस्तक का विमोचन राज्यसभा सदस्य व चिंतक डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने किया था।
यह हैं पुस्तक में
डॉ जुल्फिकार बताते हैं कि कुलियाते विवेकानंद में स्वामी जी व रामकृष्ण मिशन से जुड़े अल्पज्ञात तथ्यों को उजागर किया गया है। इसमें स्वामी जी के विदेश यात्रा, खेतड़ी प्रवास, सीकर व अलवर यात्रा के दौरान के कई अनछुए प्रसंग शामिल हैं। पुस्तक में मिशन के कार्यों व समाज के योगदान को सामने लाने का प्रयास भी किया गया है। इसके अलावा इस पुस्तक के लिए वे रामकृष्ण मठ श्रीलंका व बांग्लादेश की यात्रा कर चुके हैं।
सबसे बड़ी पुस्तक होने का दावा
डॉ जुल्फिकार का स्वामी विवेकानंद पर आगामी ग्रंथ 'कुलियाते विवेकानंदÓ में करीब छह सौ पृष्ठ होंगे। स्वामी विवेकानंद पर सबसे बड़ी पुस्तक होने का दावा किया गया है। डॉ जुल्फिकार का दावा है कि स्वामी जी पर अब तक सबसे बड़ी पुस्तक उनके द्वारा लिखित -विवेकानंद संचन है, जो तीन खंडों में हैं। हालांकि विवेकानंद साहित्य सबसे बड़ी पुस्तक हैं, लेकिन वे 10 खंडों मेें हैं। इसलिए एक खंड में कुलियाते विवेकानंद सबसे बड़ी पुस्तक है। डॉ जुल्फिकार बताते हैं कि उनकी पुस्तक के 560 पृष्ठ तैयार हो चुके हैं।
Published on:
12 Jan 2020 10:48 am
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