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सीकर:सरकारी जनाना अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट के बिना, मरीजों को नहीं मिल रहा सुविधा का लाभ

सोनोग्राफी नहीं होने से अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं को 15 दिन तक सोनोग्राफी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

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सीकर. सरकारी जनाना अस्पताल में एक भी सोनोलॉजिस्ट नहीं है। चिकित्सा प्रबंधन का हाल यह है कि मेडिकल कॉलेज से अटैच होने के बाद भी इस अस्पताल में सप्ताह में महज तीन दिन ही सोनोग्राफी होती है। मजबूरी में सोनोग्राफी के लिए प्रसूताओं को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। सोनोग्राफी नहीं होने से अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं को 15 दिन तक सोनोग्राफी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 31 मई 2017 को नेहरू पार्क के पास 16 करोड की लागत से जनाना अस्पताल शुरू किया गया था।

चार जिलों के आते हैं मरीज
जनाना अस्पताल में सीकर, झुंझुनूं, नागौर जिले में नए चिकित्सक और स्टॉफ को लगाने को लेकर जनप्रतिनिधियों सहित विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। अस्पताल में रोजाना औसतन 250 मरीजों का आउटडोर और हर माह चार सौ से ज्यादा सोनोग्राफी होने के बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि कल्याण अस्पताल में 53 चिकित्सक होने के बावजूद दो चिकित्सक सोनोग्राफी कार्य कर रहे हैं।

कोरे आश्वासन मिले
जनाना अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट नही होने बहुत परेशानी हो रही है। अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट लगाने को लेकर जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन ही दे रहे हैं। सोनोलॉजिस्ट को जनाना अस्पताल में भेजने पर वेटिंग भी कम हो जाएगी। साथ ही इलाज में भी फायदा होगा।
डॉ. बीएल राड़, प्रभारी, जनाना अस्पताल सीकर

यूं समझे परेशानी
जनाना अस्तपाल में तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ सोनोग्राफी करते हैं। सुबह दस बजे से दोपहर तीन बजे तक सोनोग्राफी की जाती है। एक सोनोग्राफी में 20 से 30 मिनट का समय लग जाता है। इस लिहाज से औसतन 20 प्रसूताओं की सोनोग्राफी हो पाती है। ऐसे में इन तीन चिकित्सकों की ड्यूटी, ऑफ और नाइट ड्यूटी होने पर सोनोग्राफी नहीं हो पाती है।