9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान के 60 हजार शिक्षकों पर मंडराया नौकरी का संकट! जानें क्या है पूरा मामला

शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने प्रदेश के करीब 60 हजार ग्रेड थर्ड शिक्षकों की धुकधुकी बढ़ा दी है।

2 min read
Google source verification

सीकर

image

kamlesh sharma

Jan 08, 2026

Teacher

representative picture (patrika)

सीकर। शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने प्रदेश के करीब 60 हजार ग्रेड थर्ड शिक्षकों की धुकधुकी बढ़ा दी है। ये वे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति 2010 में टेट लागू होने से पहले हुई थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार अब उन्हें दो वर्ष की समय-सीमा में टेट उत्तीर्ण करना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनकी सेवा पर संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में यह फैसला वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों के लिए नौकरी पर मंडराते खतरे के रूप में देखा जा रहा है। मामले को लेकर शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और आंदोलन की रणनीति तेज कर दी है।

ये कहता है आदेश

सितंबर महीने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी नए शिक्षकों के लिए टेट पास करना अनिवार्य होगा। वर्तमान सेवारत शिक्षकों को भी सेवा जारी रखने व पदोन्नति के लिए दो साल में टेट पास करना अनिवार्य होगा। सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय वाले शिक्षकों को जरूर इससे छूट रहेगी।

15 साल पहले लागू हुई टेट

देशभर में टेट 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद 23 अगस्त 2010 को देशभर में अनिवार्य की गई। इसके बाद 2011 में पहली बार सीटेट आयोजित हुई थी। इसके बाद राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर इसे लागू किया। राजस्थान में ये टेस्ट रीट के नाम से 2011 में लागू हुआ। इसके बाद हुई ग्रेड थर्ड शिक्षकों की भर्तियां इसी आधार पर हुई।

एक चौथाई शिक्षकों पर संकट

प्रदेश की सरकारी स्कूलों में एल-1 व एल-2 के अभी करीब 2.30 लाख शिक्षक नियुक्त है। इनमें से करीब 1.70 हजार शिक्षक तो 2011 के बाद रीट के आधार पर भर्ती हुए हैं, लेकिन करीब 60 हजार शिक्षक 2010 से पहले के नियुक्त है। दो साल में रीट नहीं करने पर अब इन्हें नौकरी पर खतरा दिख रहा है।

इनका कहना है

सेवारत शिक्षकों के लिए अब पढ़ाई कर टेट पास करना अव्यवहारिक है। उनके लिए टेट की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर देश के 14 शिक्षक संगठनों ने अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया है। 5 फरवरी को देशभर के शिक्षक दिल्ली में संसद कूच करते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगे। एसटीएफआइ की ओर से कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दर्ज की गई है।

उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत।