
श्रीमाधोपुर नहीं....शिव माधोपुर कहिए जनाब!
Haritage News: श्रीमाधोपुर कस्बे में कई शिवालय हैं और हर शिवालय की अपनी जुड़ी कहानी है। कस्बे के हरिदास आश्रम श्मशान स्थल में शिव विराजमान हैं, कस्बे के बीच चौपड़ बाजार में ऐतिहासिक शिव मंदिर तो नोलखा कोठी में स्फटिक शिव और ब्रह्मचारी आश्रम में पारद शिवलिंग। सोनी बगीची में स्थित शिव मंदिर, बस स्टैंड के पीछे पिपलेश्वर महादेव, गोपीनाथजी, रघुनाथजी व अखाड़े स्थित शिव मंदिर की अनूठी महिमा हैं।
इसके अलावा भी कस्बे में दर्जनों की तादाद में शिव के मंदिर हैं। चर्तुमुखी शिवलिंग के साथ-साथ माता गौरी, अष्टधातु की माता पार्वती, गणेशजी तथा नंदी की मूर्तियाँ भी स्थापित की गई। इस मंदिर की शिव पंचायत की सबसे खास बात यह है कि यहाँ माता पार्वती तथा माता गौरी की मूर्ति एक साथ है तथा कार्तिकेय की मूर्ति नहीं है।
जबकि सभी जगह शिव पंचायत में माता गौरी की जगह कार्तिकेय की मूर्ति होती है। मंदिर में प्रवेश द्वार पर सीढियों के निकट द्वारपाल के रूप में कीर्तिक स्वामी की मूर्ति मौजूद है। माता पार्वती की अष्टधातु की मूर्ति बेशकीमती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस चमत्कारी मूर्ति की कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है।
इतिहास के पन्नों में श्रीमाधोपुर
विक्रम संवत 1818 ईस्वीं सन 1761 में जयपुर रियासत के महाराजा सवाई माधो सिंह प्रथम के शासन में प्रधान दीवान नोपपुरा निवासी कस्बे के संस्थापक खुशहालीराम बोहरा ने अक्षय तृतीया पर रखी थी श्रीमाधोपुर की नींव। जयपुर की तर्ज पर हर रास्ते आर पार बनाए गए, गढ़ बनाया, सुंदर बावड़ी, बुर्ज और दरवाजे का निर्माण करवाया, खूबसूरत हवेलियां और कुएं बनवाएं।
Published on:
18 Jun 2022 11:29 am
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