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फतेहपुर (सीकर). दूसरे राज्यों के युवा भी राजस्थान के सामान्य वर्ग के युवाओं का नौकरी का हक छीन रहे हैं, लेकिन इसकी चिंता सरकार को नहीं है। राज्य के युवा अब चुनावी साल में यह कोटा खत्म करने की मांग उठाने लगे हैं।
दूसरे राज्य के विद्यार्थियों के लिए राजस्थान में 50 प्रतिशत कोटा निर्धारित है। अच्छे अंक लाने पर वह सामान्य श्रेणी की 100 प्रतिशत सीटों पर भी नियुक्ति पा सकते हैं, जबकि कई राज्य तो अन्य प्रदेशों के अभ्यर्थियों को कोटा देते ही नहीं है व कुछ राज्यों में कोटा महज पांच से दस प्रतिशत है। बेरोजगार युवाओं का दावा है कि देश के किसी भी राज्य में राजस्थान के जितना कोटा नहीं है। जानकारी के अनुसार पड़ौसी राज्य हरियाणा में महज पांच प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है। इससे प्रदेश के सामान्य वर्ग के बेरोजगारों पर दूसरे प्रदेश के बेरोजगार भारी पड़ रहे हैं।
नई भर्तियों में भी होगा नुकसान
चुनावी साल होने के कारण सरकार ने इस वर्ष बम्पर भर्तियां निकाली है। भर्तियों की विज्ञप्ति के अनुसार अन्य राज्यों के अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रदेश में सामान्य वर्ग में शामिल किया जाएगा।
इसके साथ ही बाहरी राज्य का कोई भी अभ्यर्थी अच्छे अंक लाता है व प्रदेश के अभ्यर्थियों से ज्यादा अंक लाएगा तो उसे सामान्य श्रेणी में नौकरी दी जाएगी। ऐसे में प्रदेश के सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ कुठाराघात किया जा रहा है। प्रदेश का सामान्य वर्ग पहले से ही नौकरियों के मामलों में पिछड़ता आ रहा है। अन्य वर्ग के अभ्यर्थी अच्छे अंक लाते हैं तो उन्हें सामान्य में नियुक्ति मिल जाती है। वहीं अब बाहरी अभ्यर्थी भी सामान्य वर्ग को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
27000 पदों पर कर सकते हैं कब्जा
प्रदेश में अब तक सबसे बड़ी भर्ती रीट की निकली है। इसमें कुल पद 54 हजार है। पूर्व में बाहरी राज्य के अभ्यर्थियों को भर्ती में रोकने के लिए 50 प्रतिशत से ज्यादा राजस्थान का सामान्य ज्ञान पूछा जाता था। हाल ही में एनसीआरटी की गाइड लाइन के अनुसार केवल खुद के विषय व मनोविज्ञान के संबंधित ही प्रश्र पूछे गए। जो अन्य राज्यों में भी समान है।
भर्ती में सामान्य श्रेणी के करीब 27 हजार पद हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार यदि अन्य राज्य के अभ्यर्थी प्रदेश के सामान्य श्रेणी के व्यक्ति से अधिक अंक लाते हैं तो उन्हें आसानी से नौकरी दी जा सकती है। यही स्थिति प्रदेश की अन्य भर्तियों में है। ऐसे में बाहरी राज्य के अभ्यर्थी बड़ी संख्या में आवेदन कर परीक्षा दे चुके हैं।
पड़ौसी राज्यों की हकीकत
राजस्थान के पड़ौसी राज्य हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए कोटा निर्धारित है। हरियाणा में महज पांच प्रतिशत कोटा दिया जाता है। पंजाब में पांच प्रतिशत कोटा दिया जाता है साथ ही 10 वीं में पंजाबी भाषा होना अनिवार्य है। ऐसे में राजस्थान के अभ्यर्थी ही इसके लिए पात्र ही नहीं होते हैं। उत्तरप्रदेश में भी बाहरी राज्यों के लिए पांच प्रतिशत कोटा निर्धारित है। कई अन्य राज्यों में तो दूसरे राज्यों के लिए कोई आरक्षण ही निर्धारित नहीं है व स्थानीय भाषा भी अनिवार्य कर रखी है, ऐसे में वहां पर अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को मौका ही नहीं मिल पाता है।
Published on:
26 Apr 2018 08:02 pm
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