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राजस्थान के स्कूलों में नहीं खुलेगी दूसरी वेबसाइट, इंटरनेट के उपयोग के समय बच्चों पर होगी निगरानी , जानिए क्यों

राजकीय विद्यालयों में बच्चे कम्पयूटर पर अब अवांछित वेबसाइट नहीं देख सकेंगे।

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सीकर. राजकीय विद्यालयों में बच्चे कम्पयूटर पर अब अवांछित वेबसाइट नहीं देख सकेंगे। हाल ही में ऑनलाइन गेम ब्लूव्हेल से बच्चों के शिकार होने से सचेत हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों में आवश्यक बेवसाइट को छोड़ सभी को ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों के मुताबिक इंटरनेट के उपयोग के समय बच्चों पर सतत निगरानी रखी जाएगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों देशभर में अनेक बच्चे ऑनलाइन गेम ब्लूव्हेल के शिकार हो गए थे। अनेक बच्चे तो इस खेल में इस तरह उलझ गए थे कि उनको जान तक गंवानी पड़ गई थी। इसके अलावा बच्चों के हाथों में हथियार भी देखने को मिले थे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर इंटरनेट के जरिए खेले जाने वाले खेलों के प्रति सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल बस के चालक-परिचालक के मोबाइल की भी नियमित जांच होगी। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग ने इंटरनेट के उपयोग से संबंधित दिशा निर्देश दिए हैं।

यह दिए निर्देश
-विद्यार्थी इंटरनेट का उपयोग बिना जागरूकता के करते हैं तो अवैध गतिविधियों, साइबर धमकियों, जालसाजी या अन्य गंभीर स्थतियों के शिकार हो सकते हैं। इंटरनेट के उपयोग पर नियंत्रण रखें।

-विद्यार्थियों को इंटरनेट के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षित किया जाए।

-इंटरनेट पर उपलब्ध अवांछित सामग्री ब्लॉक की जाए। फिल्टरिंग व ब्लॉकिंग प्रणालियों की निरंतर समीक्षा की जाए।

-इंटरनेट के उपयोग की सुविधा इस प्रकार रखी जाए कि इसके उपयोग के समय बच्चे अच्छी तरह दिखाई देते रहें।
-विद्यार्थियों के आयु वर्ग के अनुसार पूर्व निर्धारित चुनिंदा वेबसाइट का उपयोग ही अनुमत किया जाए।

-अभिभावकों, शिक्षकों व अन्य स्टाफ को भी इंटरनेट सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया जाए।

-अवैध सामग्री देखते हुए मिलने पर सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाए।

- विद्यालय छोडऩे पर यूजरनेम व पासवर्ड तत्काल बंद किए जाएं।

-लाइसेंस वाले सॉफ्टवेयर का ही उपयोग किया जाए।

-मोबाइल का उपयोग किसी भी सूरत में नहीं किया जाए।

-समुचित मानकों के अनुसार एंटीवायरस अथवा पैरेंटल कंट्रोल फिल्टर्स युक्त कम्प्यूटर्स का उपयोग किया जाए।

-स्कूल बसों में भी इंटरनेट या अन्य किसी प्रकार की डिवाइस का उपयोग नहीं हो।

-स्कूल बस के चालक/परिचालक के मोबाइल की भी नियमित जांच की जाए।

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