
कविता: मैं भारत का संविधान हूं..
गणतंत्र का सजग प्रहरी...
मैं भारत का संविधान हूं ।
समानता का पाठ पढ़ाता ,
मैं विस्तृत हिन्द-वितान हूं ।।
हम भारत के लोग...से करता
आगाज़ ,
मैं वही विधान हूं ।
गणतंत्र का सजग प्रहरी.......
मैं भारत का संविधान हूं ।।
सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न बनाता,
मैं भारत का अभिमान हूं ।
समाजवाद का प्रबल समर्थक ,
पंथनिरपेक्षता का सम्मान हूं ।
गणतंत्र का सजग प्रहरी......
मैं भारत का संविधान हूं ।।
लोकतंत्र का सदैव प्रहरी ,
गणराज्य का प्रतिमान हूं ।
त्रिविध न्याय समाहित रखता ,
मैं न्याय से शक्तिमान हूं ।
गणतंत्र का सजग प्रहरी......
मैं भारत का संविधान हूं ।।
विचार , अभिव्यक्ति, विश्वास , धर्म ,
उपासना का अधिमान हूं ।
प्रतिष्ठा , अवसर की समता ,
गरिमा का संधान हूं ।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता ,
बंधुता का प्रमाण हूं ।
गणतंत्र का सजग प्रहरी
मैं भारत का संविधान हूं ।।
डॉ० प्रदीप कुमार दीप,लक्ष्मणगढ़
रचनाकार क्रय विक्रय सहकारी समिति लि० लक्ष्मणगढ़ में महाप्रबंधक है।
Published on:
26 Sept 2020 05:02 pm
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