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कविता: फिर नई शुरुआत कर देंगे..

रुक सी गयी है सब ज़िंदगीया,बंद हो गयी सब बंदगीया ।टूटता है अब सब्र सारा,थम सी गई है सब ज़िंदगीया ।।

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सीकर

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Sachin Mathur

Oct 03, 2020

कविता: फिर नई शुरुआत कर देंगे..

कविता: फिर नई शुरुआत कर देंगे..

रुक सी गयी है सब ज़िंदगीया,बंद हो गयी सब बंदगीया ।
टूटता है अब सब्र सारा,थम सी गई है सब ज़िंदगीया ।।


ज़िंदगी की राह को हम,सब रोशन पुनः कर लेंगे ।
न तनिक घबराओ प्यारे,फिर नई शुरुआत कर देंगे ।।


माना हैं सब बंद गलियां,कैद उपवन, कैद कलियाँ ।
जल्द ही सब मुक्त होगा,खिलखिलायेंगी ये गलियाँ ।।


गली के हर इक मोड़ को,फिर आबाद हम कर लेंगे ।
न तनिक घबराओ प्यारे,फिर नई शुरुआत कर देंगे ।।


नियति का है खेल सारा,दनुजता का दोष सारा ।
हो किसी की भूल चाहे,या अधम व्यवहार सारा ।।


यदि हमारी भूल है तो,फिर हम सुधार कर लेंगे ।
न तनिक घबराओ प्यारे,फिर नई शुरुआत कर देंगे ।।


माना के तम घनघोर है,दिखता न कोई छोर है
खो रहे हैं धीरज सभी,पर तू नहीं कमज़ोर है ।।


निराशा की इस रात को,हम रोशन पुनः कर लेंगे ।
न तनिक घबराओ प्यारे,फिर नई शुरुआत कर देंगे ।।


फिर से चहकेंगी ये गलियां,मुस्कुराएँगी सारी कलियाँ ।
फिर छटेंगे अवसाद सारे,फिर मिलेंगे दोस्त, सखियां।


योगेश उस आशा के दीपक को कभी बुझने न देंगे ।
न तनिक घबराओ प्यारे,फिर नई शुरुआत कर देंगे ।।


योगेश शर्मा एडवोकेट कोला की नांगल, नीमकाथाना सीकर