
कविता: माना वह एक डॉक्टर है, बेशक कोई भगवान नहीं
माना वह एक डॉक्टर है, बेशक कोई भगवान नहीं,
डॉक्टर का डॉक्टर होना, मगर इतना भी आसान नहीं,
कई त्योहार बिन अपने परिवार के वो बिताता है,
कभी किताबों में तो, कभी इमरजेंसी टेबिल पर सो जाता है,
जाने कितने लोगों ने गहरी नींद से उसे जगा दिया,
जाने कितने रोगों को उसने दुनिया से ही भगा दिया,
ना कभी कोई आराम ना कोई छुट्टी की गुजारिश,
ना पता रहता कब सर्दी आई ना पता कब आती बारिश,
फिर भी जो तुम्हें जो हर वक्त खुश दिखें, परेशान नहीं,
डॉक्टर का डॉक्टर होना, मगर इतना भी आसान नहीं
डॉक्टर का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी हो
आखिर जिसके भरोसे हम, उसके प्रति आभारी हो
ऊपर वाला खुद नहीं आता, इसलिए भेजता डॉक्टर ही
डॉक्टर का डॉक्टर होना, मगर इतना भी आसान नहीं।
कोरोना काल में एक योद्धा की तरह कोविड से जूझ रहे चिकित्सकों को समर्पित
आशा अग्रवाल, व्याख्याता, श्रीमाधोपुर (सीकर, राजस्थान)
Published on:
08 Sept 2020 04:37 pm
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