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‘बाबाओं’ की तरह इन्होंने भी किया घिनौना काम, मगर 21 साल में सजा मिली सिर्फ 2 को

यह राजस्थान की बेहद कड़वी हकीकत है।

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पूरण सिंह शेखावत
सीकर. पीसीपीएनडीटी एक्ट के लागू होने के 21 वर्ष बाद भी महज दो आरोपितों को ही सजा हो पाई। जबकि स्वास्थ्य विभाग पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लगातार नजर रखने और समय-समय पर जरूरी कार्रवाई करने का दावा करता रहा है। इस बीच सीकर में लिंगानुपात में पहले की अपेक्षा कुछ बढ़ोत्तरी जरूर दर्शायी गई है, लेकिन अब भी लिंगानुपात सामान्य से कम होना इसी ओर संकेत करता है कि कहीं न कहीं अभी भी भ्रूण **** परीक्षण का धंधा जारी है।

हकीकत बयां कर रहे पांच प्रकरण

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पांच कर्मचारी व अधिकारियों के खिलाफ भी पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन का मामला सामने आया है। वर्ष 2015 में सीकर के एसके अस्पताल के कम्पाउंडर निर्मल कुमार, 2016 में झुंझुनंू की नर्स भानुमति सहित दो नर्स, 2016 में जोधपुर क्षेत्र के बीसीएमओ इम्तियाज, एम्स के रेडियोग्राफर भैंरू सिंह, 2017 में बूंदी में एनयूएचएम की लाज व्यास व बालचंद पाड़ा शहरी सीएचसी के खिलाफ कार्रवाई की गई। खैरवाड़ा में 2016 में निर्मला कुमारी, इसके अलावा एक कार्रवाई गुजरात के राधनपुर रेडियोलॉजिस्ट शैलेन्द्र व सीएचसी प्रभारी को प्रकरण में दोषी मान गिरफ्तार किया गया था।

100 मशीनें सील

एक्ट के तहत प्रदेश में अब तक 114 से ज्यादा मशीनें सील की गई हैं। इनमें उन सरकारी अस्पतालों की मशीनें भी शामिल हैं, जहां रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड केन्द्रों में लगी सभी पोर्टेबल मशीनें भी सील की गई हैं। पोर्टेबल मशीनें केवल उन अस्पतालों में रखने की इजाजत है, जहां मरीजों को भर्ती किया जाता है।

656 परिवाद दायर, 141 आरोपी तय

पीसीपीएनडीटी एक्ट 1996 में पूरे देश में लागू कर दिया गया था। 2003 में संशोधन के बाद एक्ट पूरी तरह से लागू हो पाया। एक्ट के लागू होने के बाद वर्ष 2015-2016 के दौरान ही सबसे अधिक कार्रवाई हुई। एक्ट के नियम और अधिनियम पालना नहीं करने के विरोध में प्रदेश में 656 परिवाद दायर हुए। जिसमें जांच में146 आरोपितों को दोषी पाया गया और विभाग में महज जुर्माना अदा करने के निर्देश दिए गए। जिले में इस दौरान 10 अल्ट्रासाउंड केन्द्रों के खिलाफ ही कार्रवाई हुई।

मामले विचाराधीन हैं


सीकर में 2010 में दो, 2016 व 2017 में क्रमश: चार-चार डिकॉय आपरेशन किए जा चुके हैं। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। -नंदलाल पूनिया, समन्वयक पीसीपीएनडीटी सीकर