Rajasthan BJP Chief Madan lal saini : राजस्थान भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें
सीकर. शादी नै 55 बरस हो ग्या...। जद सूं आई हूं या ही देखी हूं वे घरां कम अर बारै ही ज्यादा रहैया। बस हरदम जनता की सेवा। पार्टी की सेवा। नै दन देख्या नै रात। घर नै तो म्हें ही संभाळी हूं। बच्चा नै भी पढ़ाई। पण अब मेहनत को फल मिलग्यो। अब म्यारी या ही मन की बात है कि पार्टी की सरकार वापस बण ज्या।
यह कहना है भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी की पत्नी पतासी देवी का। नवलगढ़ के पास गुमानाराम की ढाणी निवासी पतासी देवी ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि जब वे दसवीं में पढ़ते थे तब ही शादी हो गई।
शादी के बाद में ही बीए, एमए व वकालत की। कई पदों पर रहे। घर से ज्यादा पार्टी को समय दिया। पर अब जीवन की सबसे बड़ी खुशी हो रही है। एक बात है तो है, सच्चे मन से जो सेवा करता है उसे फल जरूर मिलता है चाहे देरी से ही सही।
उसने बताया कि उनके आते ही सबसे पहले राज्य की बेटियों को रोजगार दिलाने, अपराध कम कराने की बात कहूंगी। साथ ही कहूंगी कि अब और ज्यादा मेहनत करो, ताकि पार्टी फिर से सत्ता में आ जाए। 95 साल की मां मोहिनी देवी ना तो ज्यादा बोल सकती है ना ही सुनने की क्षमता है। लेकिन खुशियां देखकर वे भी बेटे को आशीर्वाद दे रही थी।
पापा से कहूंगी यूथ पर ध्यान दो
ससुराल कोटा से आई हुई छठे नंबर की बेटी एकता सैनी ने कहा कि बहुत ज्यादा खुशी हो रही है। अब आते ही पापा से कहूंगी कि ऐसी नीति बनाएं कि अपराध कम हों और यूथ को ज्यादा से ज्यादा नौकरियां व स्वरोजगार मिले। अभी यूथ के पास डिग्री तो खूब है लेकि न वे काम की कम है। ज्यादा से ज्यादा को नौकरियां मिले, स्वरोजगार के लिए ऋण लेने की प्रक्रिया आसान हो। यूथ को खुद का उद्योग बनाने के लिए प्रेरित किया जाए, उनको ऐसी सुविधाएं भी दी जाए।
खेजड़ी की छंगाई
पत्नी ने बताया कि वे बिल्कुल जमीन से जुड़े हुए हैं। राज्यसभा सदस्य बनने से कुछ माह पहले वे एक दिन खेत पर (खेजड़ी) जांटी की छंगाई कर रहे थे, कुल्हाड़ी की हाथ में ऐसी चोट लगी कि ऑपरेशन करवाना पड़ गया था।
छह भाइयों में सबसे बड़े, बस में ही सफर
मदन लाल सैनी छह भाइयों में सबसे बड़े हैं। भाई गोपाल, महावीर व जगदीश ने भी खुशियां जताई, जबकि ओमप्रकाश का निधन हो चुका। बेटा मनोज जयपुर हाईकोर्ट में वकालत करता है। छह बेटियां हैं। राज्यसभा सदस्य बनने से पहले वे अधिकतर सफर रोडवेज बस में ही करते रहे हैं।