
नीमकाथाना जिले की मांग को लेकर आमजन और विभिन्न संगठनों द्वारा किया जा रहा संघर्ष तेज होता जा रहा है। युवा शक्ति संगठन ने आंदोलन को और तेज करने के लिए 30 जनवरी को चक्का जाम करने का निर्णय लिया है। संगठन के पदाधिकारी शशिपाल भाकर ने बताया कि युवा शक्ति संगठन अब छात्रों और युवाओं को जोड़कर आंदोलन को संगठित करने और कानूनी पहलुओं पर काम करेगी।
बुधवार को खेतड़ी मोड़ स्थित एक निजी रेस्टोरेंट में समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों और अन्य नेताओं ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष जयचन्द जाखड़ ने की। बैठक में करीब डेढ़ दर्जन पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शामिल हुए। इनमें रमेश शर्मा, मदन भावरिया, जयप्रकाश मीणा, रामावतार बड़सरा, राजेंद्र मीणा, कुलदीप सिंह चोसला, कपिल देव वर्मा, रोशन मुंडोतिया, रणजीत सिंह कुड़ी, नितिन लेखरा, सुरेन्द्र जाट पहलवान, नरेन्द्र वर्मा, सुरेश गुर्जर, विनोद भूदोली, और अभिषेक मीणा शामिल थे।
मीटिंग में समन्वय समिति ने निर्णय लिया कि यह नीमकाथाना जिले की बाहाली को लेकर सभी नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करेगी। बैठक में सर्व सहमति से पांच वरिष्ठ पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों को समिति का संरक्षक चुना गया। शेष को सहसंयोजक नियुक्त किया गया। जयचन्द जाखड़ ने कहा कि नीमकाथाना जिले की बहाली के लिए 30 जनवरी को आयोजित होने वाले चक्का जाम आंदोलन में समन्वय समिति पूरी तरह से सहयोग करेगी। समिति संयोजक राजेंद्र मीणा नेसंघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया और कहा कि समिति नीमकाथाना जिले की बहाली के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।
सहसंयोजक रणजीत सिंह कुड़ी ने भी इस आंदोलन को तेज करने और चक्का जाम को सफ ल बनाने का संदेश दिया। विनोद भूदोली ने कहा कि नीमकाथाना के छात्र-छात्राओं ने समय-समय पर छात्रसंघ अध्यक्षों को चुना है और उनकी टीम इस आंदोलन में एकजुट होकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाएगी।
उधर विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन और हड़ताल जारी है। 23वें दिन भी नीमकाथाना जिला बनाने की मांग को लेकर कलक्ट्रेट पर क्रमिक अनशन जारी रहा। अनशन पर बैठे लोगों को माला पहनाकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। दोलनकारियों का कहना है कि नीमकाथाना को जिला बनाए जाने से यहां के आर्थिक और सामाजिक विकास में सुधार हुआ था, लेकिन जिले के हटने से नागरिकों की खुशहाली पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
विरोध में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी अपनी आवाज उठाई है और इस आंदोलन में समर्थन देने का संकल्प लिया है। नगर परिषद उपाध्यक्ष महेश मंगोतिया, श्रीराम गुर्जर, अनिल काजला, सुनील डांडिया, सुरेश खैरवा, बलवीर खैरवा, देवेन्द्र बिजारणिया सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं ने आंदोलन का समर्थन किया है। वहीं अभिभाषक संघ ने भी 30 जनवरी को चक्का जाम का एलान किया है। 21 दिन से पैन डाउन हड़ताल पर है।
अभिभाषक संघ अध्यक्ष सत्यनारायण यादव ने कहा कि राजनीतिक द्वेष के कारण नीमकाथाना जिले और सीकर संभाग को हटाया गया है। उनका कहना है कि जब तक जिले और संभाग को बहाल नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही कलक्ट्रेट के बाहर जिला संघर्ष समिति के बैनर तले अनिश्चितकालीन चक्का जाम की तैयारी हो रही है। इस प्रकार नीमकाथाना जिले की बहाली के लिए चल रहा यह संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठन इसे मजबूती से समर्थन दे रहे हैं। 30 जनवरी को आयोजित होने वाले चक्का जाम आंदोलन से इस संघर्ष में एक नई दिशा देखने को मिल सकती है।
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Updated on:
23 Jan 2025 08:57 am
Published on:
23 Jan 2025 08:56 am
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