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Rajasthan Election 2023 : चुनाव की तिथि आगे बढ़ी, फिर भी चिन्ता….कहां होंगे बेटी के हाथ पीले

Rajasthan Election 2023 : शादियों के सीजन को देखते हुए भले ही निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तिथियों में बदलाव कर दिया हो, लेकिन शादी समारोह वाले परिवारों की चिन्ता कम नहीं हुई है।

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सीकर

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Nupur Sharma

Oct 15, 2023

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अजय शर्मा
सीकर। rajasthan election 2023 : शादियों के सीजन को देखते हुए भले ही निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तिथियों में बदलाव कर दिया हो, लेकिन शादी समारोह वाले परिवारों की चिन्ता कम नहीं हुई है। क्योंकि निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सभी जिलों में 1700 से ज्यादा सामुदायिक भवन, मैरिज गार्डन, धर्मशालाओं को चुनाव के लिए अधिग्रहित करने की तैयारी कर ली है। निर्वाचन आयोग से सामुदायिक भवन व मैरिज ***** संचालकों को नोटिस देकर भवनों को खाली रखने के फरमान भी तैयार कर लिए है। ऐसे में कई मैरिज होम संचालकों की ओर से निर्वाचन आयोग का तर्क देकर कई शहरों में बुकिंग भी कैसिंल की जा रही है। प्रदेश में 23 व 24 नम्बर को 45 हजार से अधिक शादियां होने का अुनमान है। इस बीच कई शादी समारोह वाले परिवारों ने बजट के हिसाब से दूसरे विवाह स्थल तलाशने शुरू कर दिए है।

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श्रीगंगानगर: धर्मशाला संचालक के फोन से परिवार में चिन्ता
बीकानेर निवासी मनीष पारीक ने श्रीगंगानगर में आकर अपनी बेटी विनीता की शादी करने की योजना बनाई थी। उन्होंने माहेश्वरी धर्मशाला की बुक करा ली, लेकिन अब धर्मशाला संचालकों की ओर से फोन किया गया है कि वैकल्पिक व्यवस्था कर ले। ऐसे में परिवार के साथ साथ रिश्तेदारों की चिंता बढ़ गई है। परिवार के राजीव कुमार का कहना है कि अच्छी सुविधा वाली धर्मशालाएं खाली नहीं मिल रही है। बाराती और घराती के लिए एक ही जगह ठहराने की व्यवस्था की गई थी, अब नए स्थल के लिए भागदौड़ हो रही है।

सीकर: तलाश रहे दूसरे राज्य में रिसोर्ट
सीकर निवासी आयुष की 23 नवम्बर को शादी है। परिवार ने अच्छी लोकेशन वाले मैरिज गार्डन को बुक किया है, लेकिन यहां भी दूसरे राज्यों से आने वाले जाब्ता को ठहराया जाएगा। ऐसे में परिवार के सदस्यों ने अब दिल्ली हाइवे पर एक रिसोर्ट की बुकिंग कराई है।

बीकानेर: यहां भी चिन्ता, अब तलाश रहे दूसरे भवन
निर्वाचन आयोग ने यहां भी 150 से ज्यादा मैरिज गार्डन व सामुदायिक भवनों अधिग्रहित करने की तैयारी कर ली है। वहीं बीकानेर जिले में 31 बूथ सामुदायिक भवनों में बनाए है। अमूमन इन भवनों में सबसे ज्यादा शादियां होती है। ऐसे में शादी वाले परिवारों की मुसीबत बढ़ गई है। कई परिवारों ने अब दूसरे भवन तलाशने की कवायद शुरू कर दी है।

कोटा: 20 गार्डन अधिग्रहित, शादियों की बुकिंग रद्द
कोटा में 15 यूआईटी के और 5 नगर निगम के मैरिज गार्डन है। यह गार्डन एक नवंबर से 30 नवंबर निर्वाचन विभाग के अधीन रहेंगे। ऐसे में यहां अब शादी-समारोह के कार्यक्रम नहीं होंगे। इन मैरिज गार्डनों में होने वाले 15 शादी समारोह के कार्यक्रमों की बुकिंग कैसिंल हो चुकी है।

जयपुर: अब होटल में देने पड़ेंगे दोगुने दाम
सीकर रोड निवासी रमेश प्रजापत ने बताया कि बेटे की शादी अभी तय की। सामुदायिक केंद्र में मेहमानों के ठहराने की व्यवस्था की थी। वहां निर्वाचन आयोग की ओर से तीन कमरे लेने की बात कही गई। इसके चलते मेहमानों को अब होटल में ठहराया जाएगा। इससे तैयारियां पूरी प्रभावित हो गई है। ऐसे में दोगुने दाम होटल में लगेंगे।

भरतपुर: मैरिज होम संचालकों को खाली रखने के फरमान
संभाग मुख्यालय पर करीब 60 से 65 मैरिज होम हैं। प्रशासन ने अभी तक मैरिज होम को अधिग्रहण नहीं किया है, लेकिन कुछ मैरिज होम संचालकों को मैरिज होम खाली रखने को कहा गया है। ऐसे में कुछ शादी समारोह वाले परिवारों में संशय की स्थिति बनी हुई है।

चुनावी सीजन में शादी-समारोहों का अनुमान.....
जयपुर: 15 हजार
भीलवाड़ा: 3 हजार
उदयपुर: 7 हजार
सवाईमाधोपुर: 3200
कोटा: 2000
सीकर: 1500
झुंझुनूं: 300
टोंक: 900
नागौर: 700
दौसा: 700
बाड़मेर: 700
पाली: 700
भरतपुर: 700
चूरू: 650
अजमेर: 600
करौली: 500
अलवर: 500
बांसवाड़ा: 400
बीकानेर: 250

कोई ग्रामीण क्षेत्र में गार्डन तो कोई तलाश रहा रिसोर्ट
मतदान तिथि के बीच में शादी समारोह आने की वजह से अब शादी वाले परिवारों ने बजट के हिसाब से विवाह स्थल तलाशना शुरू कर दिया है। कई परिवारों की ओर से जहां ग्रामीण क्षेत्र के मैरिज गार्डन के कम अधिग्रहित होने की वजह से वहां बुकिंग कराई जा रही है। वहीं कई परिवारों की ओर से अब दूर-दराज इलाके में रिसोर्ट भी तलाशे जा रहे हैं।

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शादियों को ध्यान में रखकर बनाया प्लान: निर्वाचन विभाग
नवम्बर महीने में काफी शादियां है। इसके हिसाब से भवनों को अधिग्रहित करने का प्लान तैयार किया है। दूसरे राज्यों से आने वाले जाब्ता सहित अन्य कार्य के लिए मैरिज गार्डन व सामुदायिक भवनों का अधिग्रहण किया है। इन भवनों को चुनाव से दो से तीन दिन पहले पूरी तरह कब्जे में लेने की योजना है। इसके बाद भी यदि कही किसी तरह की दिक्कत रहती है तो समस्या का समाधान कराने की कोशिश भी रहेगी।-सौरभ स्वामी, जिला निर्वाचन अधिकारी, सीकर