
विनोद सिंह चौहान
Big News : सरकार की ओर से गांव-ढाणियों के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाने के दावे जुगाड़ की व्यवस्था में उलझे हुए हैं। सरकार ने इन स्कूलों को हाईटेक स्कूल बनाने के वादे भी किए, लेकिन अभी भी संसाधनों के मामले में यह स्कूल फिसड्डी साबित हो रहे हैं। विधानसभा में घोषणा के बाद भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए अभी तक नियमित दस हजार शिक्षकों की भर्ती नहीं हो सकी है। ऐसे में हिन्दी माध्यम स्कूलों के शिक्षकों को ही मजबूरी में साक्षात्कार के जरिए लगाना पड़ रहा है।
यह हैं हालात
हालात यह है कि प्रदेश के 171 स्कूलों को पिछले साल प्रिसिंपल ही नहीं मिल सके थे। इस साल सरकार ने 2500 स्कूल और खोलने की घोषणा कर दी। लेकिन मापदंड वाले स्कूल नहीं मिलने पर सरकार को बीच में ही फैसला बदलना पड़ा। ऐसे में सरकार की ओर से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए अलग से भवन तैयार कराने के बजाय हिन्दी माध्यम स्कूलों का ही नाम बदलकर अंग्रेजी माध्यम का बोर्ड लगाया जा रहा है। इससे शैक्षिक गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कई जिलों में विरोध हुआ तो विभाग को यूटर्न भी लेना पड़ा। दूसरी तरफ अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर शहरी क्षेत्रों में ज्यादा क्रेज सामने आ रहा है। यहां एक-एक सीट के लिए दस से लेकर 30 विद्यार्थियों के बीच दाखिले की दौड़ रही। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की ज्यादातर स्कूलों में सीटें खाली हैं। बड़ी बात तो यह भी है कि स्कूलों के संसाधन का जुगाड़ भामाशाहों के जरिए किया गया है।
प्रदेश के जिलों से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट
अलवर: शहरी क्षेत्र में क्रेज, ग्रामीण में अभी भी सीट खाली
यहां पांच अंग्रेजी माध्यम महात्मा गांधी विद्यालय पहले से संचालित है। शहरी क्षेत्र की स्कूलों में एक सीट के लिए दस-दस विद्यार्थियों की टक्कर रही। जबकि अलावड़ा, ततारपुर, नारायणपुर, रामपुर स्कूल की 255 सीट अभी तक पूरी नहीं भर सकी है। यहां रैणी व हरसौरा में सीनियर माध्यमिक विद्यालयों को महात्मा गांधी विद्यालय बनाने का विरोध हुआ। इसके बाद विभाग को अपना फैसला बदलना पड़ा। यहां भी सुविधाओं का टोटा होने की वजह से भामाशाहों का सहयोग लेना पड़ा है।
भीलवाड़ा: पांच सीटों के लिए 84 आवेदन
भीलवाड़ा जिले के शहरी क्षेत्र की स्कूलों में इस बार दाखिले की दौड़ में कड़ी टक्कर देखने को मिली। लेबर कॉलोनी स्कूल में पहली कक्षा के लिए 5 सीट थी। इन सीटों के लिए 84 आवेदन आए। कक्षा तीन में 4 के मुकाबले 42, कक्षा 6 में 10 के मुकाबले 74 आवेदन आए। पोटला राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय गौरीबाई गणेशीराम बाहेती ने गोद लिया तो व्यवस्था पटरी पर आई है।
जोधपुर: दाखिले की कड़ी रही टक्कर
जिले में अब 12 स्कूलों में दाखिले की दौड़ पूरी हो चुकी है। इस साल 21 विद्यालय संचालित होने की आस है। जालोरी गेट महात्मा गांधी स्कूल में कक्षा छह में छह सीटों पर प्रवेश के लिए 128 फार्म जमा हुए। वहीं चैनपुरा स्कूल में एलकेजी में प्रवेश के लिए तीन सीटों के लिए 38 फार्म आए।
श्रीगंगानगर: बेटियों की स्कूल को बंद करने पर तुले तो विवाद, बाद में यूटर्न
जिले में 13 स्कूल पहले से संचालित हैं। इस साल 12 स्कूल और संचालित होने की संभावना है। करणपुर में एक बालिका स्कूल को अंग्रेजी माध्यम बनाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। हालांकि बाद में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने समझाइश से मामला शांत कराया था। जिला मुख्यालय पर एक स्कूल है जिसका भवन व अन्य कार्य विधायक कोष व भामाशाहों के जरिए हुआ है।
चित्तौड़गढ़़: इस सत्र में 29 विद्यालय और होंगे शुरू
अब तक जिले में दो अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संचालित हैं। नए सत्र के लिए 31 अंग्रेजी स्कूल स्वीकृत हो चुके हैं। इनमें से दो शुरू हो चुके हैं और 29 इस महीने में शुरू होने की आस है। बस्सी अंग्रेजी माध्यम स्कूल को लेकर काफी विरोध हुआ। पंचायत समिति की बैठक में सदस्यों ने कहा कि अंग्रेजी स्कूल खोलने के लिए बेटियों की स्कूलों को बंद नहीं होने देंगे। यहां भी शहरी क्षेत्रों में ज्यादा उत्साह है।
जयपुर ग्रामीण: अभिभावकों में उत्साह, लेकिन संसाधन नहीं
इस वर्ष जयपुर ग्रामीण में 28 विद्यालय अंग्रेजी माध्यम में संचालित होंगे। शाहपुरा के लेटकाबास स्थित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में फर्नीचर आदि सुविधाओं का टोटा दिखा तो भामाशाहों ने हाथ आगे बढ़ाया है। जयपुर ग्रामीण के अभिभावकों में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर काफी उत्साह है।
हनुमानगढ़: जनता उतरी सड़कों पर तो बची बेटियों की स्कूल
फिलहाल 24 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संचालित हैं। कोहला, डूंगराना, कैनाल कॉलोनी के स्कूलों में प्रवेश को लेकर मारामारी सामने आई। यहां भी बालिका स्कूल को बंद करने का विरोध हुआ। आमजन के आंदोलन के बाद बेटियों की स्कूल बची और शिक्षा विभाग को दूसरे स्कूल को अंग्रेजी माध्यम के लिए चुनना पड़ा। यहां भी वाटर कूलर से लेकर फर्नीचर भामाशाहों के सहयोग से किया है।
बस्सी: जनप्रतिनिधियों में भी नाराजगी, जर्जर भवनों में कैसे पढ़ेगे बच्चे
बस्सी ब्लॉक में फिलहाल तीन अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संचालित हैं। स्कूल चयन को लेकर जनप्रतिनिधियों ने काफी नाराजगी सामने आ चुकी है। चयनित स्कूलों में से कई स्कूलों के भवन काफी जर्जर हैं।
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में इतने खुलने हैं अंग्रेजी माध्यम स्कूल
अजमेर: 56
अलवर: 37
बांसवाड़ा: 17
बांरा: 17
बाड़मेर: 14
भरतपुर: 29
भीलवाड़ा: 45
बीकानेर: 49
बूंदी: 21
चित्तौड़गढ़: 14
चूरू: 42
दौसा: 10
धौलपुर: 13
डूंगरपुर: 14
श्रीेगंगानगर: 31
हनुमानगढ़: 21
जयपुर: 144
जैसलमेर: 10
जालौर: 9
झालावाड़: 13
झुंझुनूं: 28
जोधुपर: 75
करौली: 22
कोटा: 66
नागौर: 32
पाली: 38
प्रतापगढ़: 5
राजसमंद: 17
सवाईमाधोपुर: 10
सीकर: 28
सिरोही: 9
टोंक: 21
उदयपुर: 35
Updated on:
23 Jun 2022 08:45 am
Published on:
23 Jun 2022 08:42 am
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