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OPS: सरकार बदलते ही ओपीएस-एनपीएस के फेर में उलझे कर्मचारी, 6.25 लाख कर्मचारियों को हुई चिंता

रमेश शर्मा Old pension scheme in rajasthan: कांग्रेस के चुनावी रण का मास्टर स्ट्रोक रही कर्मचारियों की पेंशन स्कीम ओपीएस ने अब प्रदेश के सवा छह लाख से अधिक कर्मचारियों की चिन्ता बढ़ा दी है।
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सीकर

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Sachin Mathur

Dec 22, 2023

सरकार बदलते ही ओपीएस-एनपीएस के फेर में उलझे कर्मचारी, 6.25 लाख कर्मचारियों को हुई चिंता

सरकार बदलते ही ओपीएस-एनपीएस के फेर में उलझे कर्मचारी, 6.25 लाख कर्मचारियों को हुई चिंता

rajasthan old pension scheme update: कांग्रेस के चुनावी रण का मास्टर स्ट्रोक रही कर्मचारियों की पेंशन स्कीम ओपीएस (old pension scheme) ने अब प्रदेश के सवा छह लाख से अधिक कर्मचारियों की चिन्ता बढ़ा दी है। वजह यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने ओपीएस को लेकर अपना रूख फिलहाल स्पष्ट नहीं किया है। वहीं कर्मचारी नई सरकार से भी पेंशन की गारंटी चाहते हैं। कई कर्मचारी संगठनों की ओर से राजस्थान में ओपीएस ही लागू रखने का मुद्दा उठाया जा रहा है। हालांकि भाजपा की चुनावी रैलियों में पार्टी नेताओं ने ओपीएस को लेकर कोई वादा नहीं किया गया। ऐसे में कर्मचारियों की चिन्ता है कि कहीं भाजपा सरकार पहले की तरह उनको एनपीएस (new pension scheme)के ही दायरे में नहीं ले आए। ऐसे में कर्मचारियों को अब फिर से भविष्य की चिन्ता सताने लगी है। वैसे भी किसी भी भाजपा शासित राज्य में अभी ओपीएस लागू नहीं है। जबकि गहलोत सरकार ने पहले चरण में ही राज्य कर्मचारियों को ओपीएस के दायरे में लिया था। इसके बाद बोर्ड, आयोग व निगम कर्मचारियों की मांग पर उनको भी ओपीएस में शामिल किया। हालांकि कर्मचारियों के एनपीएस अंशदान के 41 हजार करोड़ की राशि नहीं लौटाने से केन्द्र व राज्य में एक साल काफी टकराव रहा।

रिजर्व बैंक का तर्क

ओपीएस को लागू करने पर रिजर्व बैंक के अधिकारियों का तर्क है कि यह अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यूपीए सरकार में रिजर्व बैंक के गर्वनर रह चुके रघुराम राजन भी कह चुके हैं कि ओपीएस लाने पर राज्य सरकारों की भविष्य में देनदारियां बढ़ेंगी।

फिलहाल इन राज्यों में ओपीएस (OPS in indian States)

फिलहाल देश के हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में ओपीएस लागू है। जबकि पश्चिम बंगाल में पहले से ही ओपीएस लागू है। कांग्रेस ने वोट बैंक में सेंधमारी के लिए ओपीएस को चुनावी मुद्दा बनाया था।

केद्र ने सुधार के लिए समिति बनाई
लोकसभा में भी पिछले दिनों ओपीएस का मुद्दा उठाया गया। केन्द्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि एनपीएस की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन किया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद इसमें सुधार किए जा सकते है। वहीं केन्द्र सरकार की लोकसभा में यह भी कहा गया कि जिन राज्यों ने ओपीएस लागू की है उनके प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए गए।

फैक्ट फाइल
ओपीएस के दायरे में राज्य कर्मचारी: लगभग 5 लाख
बोर्ड, निगम व आयोग कर्मचारी: 1.25 लाख
राजस्थान में दुबारा ओपीएस लागू हुआ : 2022
ओपीएस को हटाकर एनपीएस लागू: 2004 से 2022

कर्मचारियों को चाहिए पेंशन की गारंटी
कर्मचारियों का कहना है कि ओपीएस में दस साल की सेवा पर आनुपातिक पेंशन की गारंटी होती है। इसमें न्यूनतम पेंशन 8,850 रुपए मासिक है। जबकि एनपीएस बाजार पर टिकी हुई है। इसमें मासिक 148 रुपए की पेंशन मिलने के भी उदाहरण सामने आ चुके है।

इनका कहना है
ओपीएस कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा है। सरकार ने एक अप्रेल 2004 से एनपीएस योजना शुरू की थी। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सवालों के घेरे में है। गहलोत सरकार ने कर्मचारियों की भावना को समझते हुए अप्रेल 2022 में दुबारा ओपीएस की शुरूआत की थी। केंद्र सरकार के मंत्रियों के बयानों से अब राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ओपीएस की जगह एनपीएस शुरू होने की आशंका है। यदि सरकार ने फैसला बदला तो प्रदेश के कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ ( शेखावत)