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राजस्थान में सरकारी स्कूलों के दो हजार से ज्यादा प्रोजेक्ट अटके, सामने आई ये हैरान कर देने वाली वजह

Rajasthan Govt School: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जहां आधारभूत विकास के करीब दो हजार प्रोजेक्ट अटक गए हैं, वहीं भामाशाहों में भी इसे लेकर आक्रोश है।

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सीकर

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Alfiya Khan

Oct 18, 2024

school rajasthan

सचिन माथुर
सीकर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के विकास के लिए भामाशाहों की ओर से दी गई करीब 25 करोड़ से ज्यादा की राशि सरकार दबाकर बैठ गई है। मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना के तहत ये राशि स्कूल विकास के लिए भामाशाहों ने दो सत्रों में जमा करवाई है, लेकिन अप्रैल 2023 के बाद से राज्य सरकार ने अपने हिस्से का अंशदान जारी नहीं कर योजना पर ही ब्रेक लगा रखा है। लिहाजा स्कूलों में जहां आधारभूत विकास के करीब दो हजार प्रोजेक्ट अटक गए हैं, वहीं भामाशाहों में भी इसे लेकर आक्रोश है।

सीकर के भामाशाहों के अटके 4.91 करोड़

योजना के तहत सीकर जिले में सरकारी स्कूलों के आधारभूत विकास के लिए पिछले दो सत्रों में 411 प्रोजेक्ट तैयार किए गए। जिनके लिए भामाशाह 4.91 करोड़ की राशि दान कर चुके हैं, लेकिन सरकार द्वारा अपने हिस्से के 7.31 करोड़ जारी नहीं करने पर ये काम डेढ़ साल से अटके हुए हैं।

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सरकार को देने है 40 करोड़ रुपए

योजना के तहत भामाशाहों की जमा राशि के हिसाब से सरकार को स्कूल विकास के करीब दो हजार प्रोजेक्ट के लिए करीब 40 करोड़ रुपए जारी करने होंगे। हालांकि अब तक के रिकॉर्ड के अमूमन 25 करोड़ की राशि सालाना जारी करती है। जो भी पिछले सत्र से अटकी हुई है।

स्कूलों में संसाधन बढ़ाने का प्रस्ताव

पिछली भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना 2016-17 में शुरू की थी। इसमें भामाशाहों से 40 फीसदी राशि मिलने पर स्कूल विकास के लिए 60 फीसदी राशि राज्य सरकार देती है। इस राशि से स्कूल में कक्षा कक्षों, प्रयोगशाला, बरामदों, खेत मैदान, चारदीवारी, बालिका कक्ष, पुस्तकालय कक्ष आदि का निर्माण व भवन की मरम्मत जैसे काम करवाए जा सकते हैं। योजना को लेकर सीकर, झुंझुनूं, अलवर, अजमेर सहित कई जिलों के भामाशाहों में काफी उत्साह है। भामाशाहों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से राशि समय पर नहीं दी जाएगी तो फिर कैसे सरकारी स्कूलों की सूरत बदलेगी।

कमरों का निर्माण अटका

राउमावि दीनारपुरा में दादा-दादी के नाम पर दो कक्षों के निर्माण के नाम लिए चार लाख रुपए की राशि दी थी, लेकिन सरकार का अंशदान नहीं होने से कमरों का निर्माण अटका हुआ है। समय पर कार्य नहीं होने पर भामाशाहों में भी निराशा होती है। सरकार को अंशदान की नियमितता रखनी चाहिए।
कर्नल राजेश भूकर भामाशाह, सीकर

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