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राजस्थानी फिल्म चिड़ी बल्ला को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवलस में मिले पांच अवार्ड

राजस्थानी भाषा में बनी चिड़ी बल्ला पहली फिल्म है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने अवार्ड मिले हंै। फिल्म को जल्द हिंदी भाषा में रिलीज किया जाएगा।

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सीकर

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Gaurav Saxena

Oct 16, 2019

राजस्थानी फिल्म चिड़ी बल्ला को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवलस में मिले पांच अवार्ड

राजस्थानी फिल्म चिड़ी बल्ला को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवलस में मिले पांच अवार्ड

सीकर. फतेहपुर कस्बे के युवा प्रोड्यूसर के द्वारा राजस्थानी भाषा में बनाई गई फिल्म चिड़ी बल्ला को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवलस में पांच अवार्डों से नवाजा गया है। चिड़ी बल्ला पर बनी पहली फिल्म को पहले भी कई अवार्ड मिल चुके हैं। निदेशक राधेश्याम पीपलवा ने बताया कि पिछले तीन दिनों में फिल्म ने पांच पुरस्कार जीते हैं।
फ्लोरेंस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट ओरिजनल स्टोरी व बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला है। वहीं ओनिरोस फिल्म फेस्टीवल इटली में बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर, बेस्ट प्रोड्यूसर और बेस्ट इंडि फिल्म पुरस्कार मिले हंै।
इससे पहले फिल्म को ड्रक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में और व्हाइट यूनिकॉर्न इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 3 पुरस्कार मिल चुके हैं। फिल्म निर्माता राधेश्याम पीपलवा का कहना है कि राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं होने के बाद भी फिल्म को इस तरह से अवार्ड मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह राजस्थानी भाषा में बनी पहली फिल्म है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने अवार्ड मिले है। फिल्म को जल्द हिंदी भाषा में रिलीज किया जायेगा।
दिखाई राजस्थानी कला
फिल्म में राजस्थानी कला को एक फ्रांसीसी प्रवासी और राजस्थान प्रेमी औरत के माध्यम से दिखाया गया है। उसके जीवन का उद्देश्य राजस्थान की प्राचीन कला को पुनस्थापित करना और उसकी रक्षा करना है। जो स्थानीय और प्रवासी राजस्थानियों के द्वारा भुलाई जा रही है। उसकी यात्रा तब की नारीशक्ति को उजागर करने का प्रयास है । फिल्म में संगीत के द्वारा महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा का वर्णन है।
फिल्म निर्माता राधेश्याम पिपलवा ने बताया कि यह बहुत दुखदाई है कि करोड़ों लोगों की भाषा को सरकार ने मान्यता नहीं दे रखी है। जबकि कई छोटे छोटे प्रदेशों की भाषाओं को मान्यता है। उन्हेांने कहा कि प्रधानमंत्री राजस्थान आकर राजस्थानी में भाषण दे सकते है फिर संसद में भाषा को मान्यता क्यों नहीं दिला सकते है। उन्होंने कहा की राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए चल रहे प्रयासों को संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है। पीपलवा ने कहा की यह मुद्दा स्थानीय केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों द्वारा संसद में गंभीरता से नहीं उठाया जाना बहुत पीड़ादायक है।
यह है फिल्म की कहानी
फिल्म के डायरेक्टर राधेश्याम पीपलवा ने बताया की फिल्म चिड़ी बल्ला 1990 के दशक में स्थित है। गाँव के एकमात्र स्कूल को बंद होने की नौबत आ जाती है और किसी तरह जिम्मेदार प्रधानाचार्य स्कूल को बंद होने से बचाने के लिए प्रयास करते है। वह एक निर्बोध बालक को दिशा प्रदान करने और पुरे गाँव को एकजुट करने की कोशिस करता है। निर्बोध बालक चिड़ी बल्ला खेलकर स्कूल को बचाने का काम करता है। पूरी कहानी एक जीवंत कहानी पर आधारित है।


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