
राजस्थानी कविता: कुण्डळियां कोरोणां की !!!
1.
डर ज्यो मत ना डूंगजी, सुण कोरोणां नाम !
सरकारी निरदेस ही, अब तो आसी काम !!
अब तो आसी काम, ग्यान मत सारो ढोळो !
सीधा चालो लीक, खाव स्यो नहीं डबोळो !!
रहणौ घर कै मांय, पाँव मत बारैं धर ज्यो !
चोखी काडौ नींद, डूंगजी मत ना डर ज्यो !!
2.
मूंडा माळै फेर ज्ये, मती मूळिया हाथ !
मेळा खेळा टाळ कै, रह घर कां कै साथ !!
रह घर कां कै साथ, राख पण निश्चित दूरी !
बार बार मत हांड, बता झूंठी मजबूरी !!
खांसी ओर बुखार, सांस नैं मत ना टाळै !
बरत ढील मत बीर, कहूं मैं मूंडा माळै !!
3.
साबण राखो सायबा, फिर फिर धोवो हाथ !
हिरदै में हणमान जी, भली करै जगनाथ !!
भली करै जगनाथ, करोणां कांई लेसी !
किरपा करणी मात, राख हिम्मत पण बेसी !!
भै'म भगावो दूर, करो ना झूंठो हाको !
मूंडा कै तो मास्क, हाथ में साबण राखो !!
4.
कळजुग में कोप्यो धणी, धर कोरोणां रूप !
मिनख बध्या दरखत घट्या,पग पग खुदिया कूप !!
पग पग खुदिया कूप, मचायो तांडव भारी !
रात्यूं रात बिणास, सांवरा लीला थारी !!
मान मुळक मत बीर, मिनख खुद खांपो रोप्यो !
घणी दिवी रै ढील, आय कळजुग में कोप्यो !!
5.
बूढां नैं तो मायतां, घणों राखणौ ध्यान !
बारैं फिरबो छोड कै, घर में छेड़ो तान !!
घर में छेड़ो तान, राम की बांचो लीला !
करो योग अभ्यास, मनां सूं पड़ो न ढीला !!
ओ जबरो है रोग, करोणा कैतो कैतो !
पड़ै छोडणी जिद्द, मायतां बूढां नैं तो !!
6.
जाग्यो सारो चोखळो, थे क्यूं सूता पीव !
कोरोणा रो रोग ओ, काळो ओर कुजीव !!
काळो ओर कुजीव, बार णै मत ना हांडो !
अब गूवाड़ां बीच, पगलिया क्यांटै मांडो !!
बेटो अर परिवार, समेटण सारो आग्यो !
पी सूता अणजाण, चोखळो सारो जाग्यो !!
7.
घर बैठा ही पूछ ल्यो, कुशल छेम समचार !
कन्नै जा के काड स्यो, भड़ भख में सिरदार !!
भड़ भख में सिरदार, मोत नैं नूंत बुलावो !
नहीं ठिठोळी ठीक, ठोक कै गेट खुलावो !!
मती लड़ावो चूंच, बात आ पक्की ठाई !
काड मुबाइल फोन, पूछ ल्यो घर बैठा ही !
8.
रसना ऊपर रामजी, हरजी हिवड़ै बीच !
मायक अर भोंपू बिना, हरि बाड़ी नैं सींच !!
हरि बाड़ी नैं सींच, भीड़ रो काम कठै है !
भूखा नैं दे भोग, अरै भगवान बठै है !!
निचल्यो रह अब मान,बणै मत हूपर डूपर !
धर कोरोणा ध्यान, रामजी रसना ऊपर !!
9.
सुचिता राखो सायबा, रहो मलिन सूं दूर !
सुचिता में है श्यामजी, आ कैबत मसहूर !!
आ कैबत मसहूर, गंदगी ह्वै जीं नर में !
गुरबत आवै साथ, रोग सारा बीं घर में !!
कोरोणां नीं काळ, जिवो जीवण फळ चाखो !
कपड़ा लत्ता साफ, सायबा सुचिता राखो !!
10.
काळो मूंडो कद हुवै, कोरोणां को पीव !
पाछै पड़ियो जगत कै, सारी तोड़ी सींव !!
सारी तोड़ी सींव, आँकड़ा अटपट आवै !
जणां जणां की पीड़, मिनख नैं खटपट खावै !!
मोटो बेजां रोग, मान ओ बेजां भूंडो !
लीली ऐडी होय, हुवै कद काळो मूंडो !!
11.
नीं रोणों नीं रींकणो, काची ल्याणी नांय !
लाठा भाटा छोड कै, रहणों घर कै मांय !!
रहणों घर कै मांय, राखणी दो गज दूरी !
देकर कै सुण ध्यान, बात जद होसी पूरी !!
घर घर में संदेस, सीख रो दीयो जोणों !
सब कै चेत्यां मान, भाग सी ओ को'रोणों !!
12.
आडो राखो छींकतां, मूंडो कर अवरुद्ध !
रिपु* कर* नीं करवाळ* है, अजब देखियो जुद्ध !!
अजब देखियो जुद्ध, मोरचो घर में लीनो !
ताळाबंदी देख, गयो है छूट पसीनो !!
काम लियोड़ा मास्क, तळै धरती में गाडो !
कोरोणां किरकांट, चालसी तिरछो आडो !!
* रिपु = शत्रु, कर = हाथ, करवाळ = तलवार
रचनाकार: मानसिंह शेखावत 'मऊ , सीकर
Published on:
20 Sept 2020 05:37 pm
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