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रोचक इतिहास : राम भक्त रानी ने राम के नाम से बसाया था रामगढ़ और रघुनाथ गढ़

भगवान राम की भक्ति से राजस्थान के सीकर जिले के दो कस्बों की उत्पत्ति का इतिहास भी जुड़ा है। यह कस्बे रामगढ़ और रघुनाथगढ़ है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Aug 06, 2020

रौचक: राम भक्त रानी ने राम के नाम से बसाया रामगढ़ और रघुनाथ गढ़

रौचक: राम भक्त रानी ने राम के नाम से बसाया रामगढ़ और रघुनाथ गढ़

सीकर. भगवान राम की भक्ति से राजस्थान के सीकर जिले के दो कस्बों की उत्पत्ति का इतिहास भी जुड़ा है। यह कस्बे रामगढ़ और रघुनाथगढ़ है। जिनकी स्थापना सीकर के राव राजा देवीसिंह ने रानी बणीरोत की रामभक्ति देखकर करवाई थी। इतिहासकार महावीर पुरोहित बताते हैं कि संवत 1820 में राजगद्दी संभालने वाले देवी सिंह का विवाह चूरू की बणीरोत से हुआ था। जो परम राम भक्त थी। अपनी रानी की रामभक्ति से प्रसन्न उन्होंने रानी की इच्छा पर शहर के बावड़ी गेट के बाहर रघुनाथजी का मंदिर और रघुनाथगढ़ तथा रामगढ़ सेठान कस्बा बसा दिया। हालांकि राव राजा खुद गोपीनाथ जी के परम भक्त थे। लेकिन, रानी की भक्ति व इच्छा से उन्होंने भगवान राम को भी जिले में प्रतिष्ठित करवाया।

धनतेरस पर बसा रामगढ़

रामगढ़ सेठान की स्थापना संवत 1848 में धनतेरस के दिन हुई। इतिहासकारों के मुताबिक रामगढ़ पहले चूरू के अधीन नासा की ढाणी थी। जहां धनतेरस के दिन राव राजा देवी सिंह ने धाड़ा डालकर व्यापारियों के बही खाते यहां लाकर रख दिए और रामगढ़ बसाने की बात कही। शुरू में तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर चूरू राजघराने से हस्तक्षेप की मांग की। लेकिन, सीकर राज से समधी का सबंध होने पर चूरू राजघराने ने दखल से इन्कार कर दिया। इसके बाद राजा व व्यापारियों में समझौता हुआ और धीरे-धीरे कस्बे की बसावट शुरू हो गई।

रघुनाथगढ़ में बनाए एक जैसे पांच मंदिर

इतिहासकार पुरोहित बताते हैं कि रघुनाथगढ़ का पुराना नाम खोह था। रानी की इच्छा पर 1848 में किला बनाकर रामगढ़ नगर बसाया गया। कस्बे में एक जैसे पांच मंदिर भी बनवाए। जो अब जीर्ण शीर्ण हो चुके हैं। इसी तरह बावड़ी गेट के बाहर रघुनाथजी के मंदिर की नींव संवत 1840 में रखी गई।