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Assembly election: राव राजा कल्याण सिंह ने ठुकरा दिया था पूर्व मुख्यमंत्री सुखाडिय़ा का चुनाव लडऩे का प्रस्ताव

चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर हालात अतीत से बिल्कुल उलट हो गए हैं। एक-एक सीट के लिए आज जहां दर्जनों दावेदार दमखम दिखाते हैं, वहीं शुरुआती दौर में राजनीतिक दलों को ढूंढे भी उम्मीदवार नहीं मिलते थे।

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सीकर

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Sachin Mathur

Oct 20, 2023

Assembly election: राव राजा कल्याण सिंह ने ठुकरा दिया था पूर्व मुख्यमंत्री सुखाडिय़ा का चुनाव लडऩे का प्रस्ताव

Assembly election: राव राजा कल्याण सिंह ने ठुकरा दिया था पूर्व मुख्यमंत्री सुखाडिय़ा का चुनाव लडऩे का प्रस्ताव

Rajasthan assembly election: Rao Raja Kalyan Singh had rejected former Chief Minister Sukhadia's proposal to contest the elections. चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर हालात अतीत से बिल्कुल उलट हो गए हैं। एक-एक सीट के लिए आज जहां दर्जनों दावेदार दमखम दिखाते हैं, वहीं शुरुआती दौर में राजनीतिक दलों को ढूंढे भी उम्मीदवार नहीं मिलते थे। कुछ तो प्रस्ताव रखने पर भी दलों को दूर से ही प्रणाम कर देते। ऐसे ही एक शख्स सीकर के राव राजा कल्याण सिंह भी थे। जिनके कल्याणकारी कार्यो व जन समर्थन को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा ने उन्हें 1962 में सीकर विधानसभा सीट से कांग्रेस से चुनाव लडऩे का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए वे खुद उनसे मिलने सीकर आए थे। सुखाडिय़ा ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले भी सीकर के शासक रहने के अनुभव का लाभ कांग्रेस उनसे आगे भी चाहती है। पर सामाजिक कार्यो में अग्रणी रहे राव राजा कल्याण सिंह ने राजनीति के क्षेत्र में उतरने से साफ मना कर दिया।

दूसरे विकल्प ने भी किया मना

राव राजा कल्याण सिंह के विकल्प के रूप में सुखाडिय़ा को लोगों ने पुरोहित स्वरूप नारायण का विकल्प सुझाया। वे भी समाज के सबसे प्रतिष्ठित लोगों की फेहरिस्त में ऊंचाई पर थे। पर रोचक बात ये है कि संपर्क करने पर उन्होंने भी एकबारगी चुनाव लडऩे से साफ मना कर दिया। काफी प्रयास के बाद वे कांग्रेस से चुनाव लडऩे को तैयार हुए।

चुनाव जीतने पर भी रहा धोखा
ये चुनाव सियासत में सदाशयता, सरलता, संस्कारो व सिद्धांतों के लिए भी नजीर रहा। दरअसल चुनाव में पुरोहित स्वरूप नारायण के सामने जनसंघ के जगदीश प्रसाद माथुर उम्मीदवार रहे। जिनसे उनके संबंध बेहद मधुर थे। वे हमेशा कहते कि जगदीश मेरे बेटे के समान है और मैं उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। जगदीशप्रसाद माथुर भी सार्वजनिक मंचों से पुरोहित स्वरूप नारायण को पितातुल्य कहते। खास बात ये भी थी कि चुनाव जीतने के बाद भी पुरोहित स्वरूप नारायण खुश नहीं थे। जगदीश प्रसाद ने जीत पर उन्हें हाथों से माला पहनाई तो भावुक होकर उन्होंने उन्हें सीने से लगा लिया था। वे बाद में भी अक्सर कहते कि उन्हें इस बात का धोखा है कि उन्होंने जगदीश माथुर के रूप में एक युवा नेता की राह रोक दी।

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