
25 हजार कर्मचारियों का आरजीएचएस का लाभ अटका
सीकर. राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा योजना के नाम पर नगर निकायों के करीब 25 हजार सेवानिवृत कर्मचारियों की परेशानी बढ़ा दी है। स्वायत शासन विभाग ने योजना के आजीवन लाभ के लिए पूर्व कर्मचारियों से स्लैब के आधार पर एकमुश्त एक लाख पांच हजार रुपए की राशि जमा कराने को कहा है। ऐसा नहीं करने वाले सेवानिवृत कर्मचारियों का आरजीएचएस लाभ भी बंद कर दिया गया है। खास बात ये है कि आरजीएचएस की घोषणा के बाद सरकार ने आरजीएचएस कार्ड बनवाने के बाद दिसंबर महीने में ये राशि 61 हजार रुपए तय की थी। जिसकी भी ज्यादातर सेवानिवृत कर्मचारियों को भनक नहीं लगने पर चुनिंदा कर्मचारी ही ये राशि जमा करवा पाए। पर अब जब अचानक योजना का लाभ बंद कर दिया तो पता करने पर सेवानिवृत कर्मचारियों के सामने एक लाख पांच हजार रुपए की मांग का अचानक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
यूं समझें पूरा मामला
सरकारी व सेवानिवृत कर्मचारियों के कैशलेस इलाज के लिए राज्य सरकार ने पिछले साल बजट में आरजीएचएस योजना की घोषणा की थी। जिसमें नगर निकाय के मौजूदा व सेवानिवृत कर्मचारियों केा भी शामिल किया गया। इस पर सेवानिवृत कर्मचारियों ने भी आरजीएचएस कार्ड बनवाकर योजना का लाभ लेना शुरू कर दिया। पर दिसंबर महीने में स्वायत शासन विभाग ने पालिकाओं को एक आदेश जारी किया। जिसमें योजना के लाभ के लिए सेवानिवृत कर्मचारियों से 61 हजार रुपये की एकमुश्त प्रीमियम राशि लेकर जमा करवाने को कहा गया। ऐसे में पालिकाओं के संपर्क में रहे चुनिंदा सेवानिवृत कर्मचारियों ने तो ये राशि जमा करवा दी, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों को इसकी जानकारी तक नहीं मिली। इसके बाद स्वायत शासन विभाग ने फिर पिछले महीने 7 जुलाई को पालिकाओं को नया आदेश जारी कर प्रीमियम की एकमुश्त राशि को बढ़ाकर 1 लाख 5 हजार रुपए कर दिया। जिसे एक महीने में जमा नहीं करवाने पर सेवानिवृत कर्मचारियों को आरजीएसएच योजना से वंचित कर दिया गया है। अब चूंकि हजारों सेवानिवृत कर्मचारी इस राशि को वहन करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में उनके लिए स्वास्थ्य सुरक्षा बड़ा संकट बन गई है।
मंत्रीमंडल का आदेश नहीं मानने का खामियाजा
सेवानिवृत कर्मचारियों को ये खामियाजा मंत्रीमंडल के एक आदेश की पालना नहीं होने पर उठाना पड़ रहा है। 4 अक्टूबर 2012 को तत्कालीन मंत्रिमंडल ने पालिका सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए चुंगी पुनर्भरण की तीन प्रतिशत राशि का फंड बनाने का फैसला किया था। जिसे लेकर मुख्य सचिव सी.के. मैथ्यू ने आदेश भी जारी किया था। लेकिन, उसकी अब तक पालना नहीं हुई। जिसके चलते सेवानिवृत कर्मचारियों के सामने ये संकट खड़ा हुआ है।
2012 का आदेश हो लागू
मामले में सेवानिवृत कर्मचारियों ने अब फिर से 2012 के फंड के आदेश को लागू कर उसका फायदा आरजीएस योजना में देने की मांग उठाई है। नगर पालिका पेंशनर्स एसोसिएशन सचिव राजेन्द्र माथुर का कहना है कि सरकार को 2012 के आदेशों की पालना करवानी चाहिए। तब तक मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना जितनी प्रीमियम राशि लेकर सेवानिवृत पालिका कर्मचारियों की आरजीएचएस सुविधा बहाल करनी चाहिए।
Published on:
28 Aug 2022 07:26 pm
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
