24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान के इस डिपो में एक दर्जन से ज्यादा रूट से गायब हुई रोडवेज, हजारों यात्री परेशान

यात्रियों की सुविधा को सर्वोपरी मानने वाले रोडवेज में अव्यवस्था के घुन ने रोडवेज सेवा को दीमक की तरह चाट लिया है। सीकर डिपो में वर्ष 2018 में रोजाना डेढ़ सौ से ज्यादा बस चलती थीं। लेकिन अब अव्यवस्थाओं के कारण डिपो में बसों की संख्या 115 ही रह गई है। सीकर जिले में लाडनूं, जयपुर, फतेहपुर, दांतारामगढ़, खंडेला सहित एक दर्जन से ज्यादा मार्ग की बस सेवा लम्बे समय से बंद है।

2 min read
Google source verification
सीकर डिपो में बसों की कमी के कारण एक दर्जन से ज्यादा रूट बंद चल रहे हैं। जिससे सैंकड़ों गांव- ढाणी के यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

सीकर डिपो में बसों की कमी के कारण एक दर्जन से ज्यादा रूट बंद चल रहे हैं। जिससे सैंकड़ों गांव- ढाणी के यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।


यात्रियों की सुविधा को सर्वोपरी मानने वाले रोडवेज में अव्यवस्था के घुन ने रोडवेज सेवा को दीमक की तरह चाट लिया है। सीकर डिपो में वर्ष 2018 में रोजाना डेढ़ सौ से ज्यादा बस चलती थीं। लेकिन अब अव्यवस्थाओं के कारण डिपो में बसों की संख्या 115 ही रह गई है। सीकर जिले में लाडनूं, जयपुर, फतेहपुर, दांतारामगढ़, खंडेला सहित एक दर्जन से ज्यादा मार्ग की बस सेवा लम्बे समय से बंद है। जिससे एक ओर जहां डिपो की आय हर माह औसतन पांच लाख रुपए तक गिर गई। कई रूट की बस सेवाएं बंद होने से हजारों लोगों को सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से महरूम होना पड़ रहा है। जिसका नतीजा है कि चार माह पहले तक प्रदेश के टॉप पांच जिलों में शुमार सीकर जिला फिसल कर अक्टूबर माह में 13 वें स्थान पर पहुंच गया है। इस कारण डिपो के कर्मचारियों को न तो समय पर वेतन मिल पा रहा है और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन। गौरतलब है कि सीकर डिपो में रोजाना 450 बसों में करीब 20 हजार यात्री सफर करते हैं।
एक दर्जन से ज्यादा रूट बंद
सीकर डिपो में चार साल के दौरान बसों के 38 परिचक्र घट गए हैं। सबसे खराब हालात खाटू, दांतारामगढ़, खंडेला, जयपुर और फतेहपुर मार्ग के यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। डिपो प्रबंधन ने इन मार्ग की अधिकांश बसों को स्टॉफ और बसों का अभाव बताते हुए बंद कर दिया। आंकड़ों के अनुसार पिछले चार साल में सीकर डिपो में बसों का संचालन तीन हजार किलोमीटर तक घट कर 49 171 किलोमीटर रह गया है। जबकि दिसम्बर 2018 में डिपो की ओर सेेेेेेेेे 138 शिड्यूल पर 52 हजार किलोमीटर बस चलाई जाती थी।
यात्री सुविधाओं पर असर
रोडवेज के सीकर डिपो में पिछले चार साल के दौरान करीब पांच लाख रुपए कम हो गई है। इससे डिपो की ओर से यात्रियों को दी जाने वाली सफाई, पानी, शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए भामाशाहों पर निर्भर रहना पड़ता है। डिपो परिसर की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जिससे तेज गति से आने वाली बसों के कारण दिनभर धूल उड़ती रहती है वहीं अचानक गड्ढ़े में गिरने से बस में बैठा यात्री
इनका कहना है
सीकर डिपो में बसों की कमी के कारण एक दर्जन से ज्यादा रूट बंद चल रहे हैं। जिससे सैंकड़ों गांव- ढाणी के यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मुख्यालय की ओर से सीकर डिपो को नई बसें और स्टॉफ दिया जाए तो बंद हो चुके मार्ग पर दोबारा बसों को शुरू किया जा सके।

मुनकेश लांबा मुख्य प्रबंधक सीकर डिपो

बड़ी खबरें

View All

सीकर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग