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11 साल से वेतन विसंगति बनी शिक्षकों की परेशानी, अब निदेशालय ने बढ़ाई गफलत

शिक्षा निदेशालय के एक आदेश ने 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों में गफलत पैदा कर दी है। दरअसल कोर्ट के एक आदेश की पालना में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिलों से उन शिक्षकों की रिपोर्ट मांगी है जो कनिष्ठ से कम वेतन पा रहे हैं।

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सीकर

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Sachin Mathur

Feb 13, 2024

11 साल से वेतन विसंगति बनी शिक्षकों की परेशानी, अब निदेशालय ने बढ़ाई गफलत

11 साल से वेतन विसंगति बनी शिक्षकों की परेशानी, अब निदेशालय ने बढ़ाई गफलत

शिक्षा निदेशालय के एक आदेश ने 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों में गफलत पैदा कर दी है। दरअसल कोर्ट के एक आदेश की पालना में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिलों से उन शिक्षकों की रिपोर्ट मांगी है जो कनिष्ठ से कम वेतन पा रहे हैं। जबकि हकीकत में 2013 में फिक्सेशन के बाद प्रदेश में ऐसे मामलों की कोई गुंजाइश ही नहीं बची है। पर इस बीच 11 साल से वेतन विसंगति दूर करने का इंतजार कर रहे 2008 में नियुक्त 50 हजार से ज्यादा प्रबोधकों व थर्ड ग्रेड शिक्षकों ने इसे छठे वेतन आयोग की विसंगति दूर करने से जोडकऱ देखना शुरू कर दिया है। ऐसे में बहुत से शिक्षकों में इसे लेकर पसोपेश बढ़ गई है।

यूं समझे पूरा मामला
राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2013 को थर्ड ग्रेड शिक्षकों की ग्रेड पे 2800 से बढ़ाकर 3600 रुपए की थी। प्रोबेशन काल का स्थाई वेतन भी 11 हजार 170 से बढ़ाकर 12 हजार 900 रुपए हो गया था। चूँकि ये छठे वेतनमान की विसंगति का दुरुस्तीकरण था, लिहाजा 2008 में नियुक्त 56 हजार शिक्षकों व प्रबोधकों ने इसे एक जनवरी 2006 से लागू करने की मांग रखी। जिसे लेकर शिक्षक संगठनों ने भी आंदोलन किए। इसके बाद सरकार के वित्त विभाग ने 28 मई 2021 को एक आदेश जारी कर किसी भी शिक्षक को कनिष्ठ यानी बाद में नियुक्त शिक्षक से कम वेतन मिलने पर उसे बराबर किए जाने का आशय जारी किया। उधर, कुछ लोगों ने इस विसंगति के निस्तारण के लिए कोर्ट में वाद पेश कर दिया। जिसमें कोर्ट ने शिक्षा निदेशालय को कनिष्ठ शिक्षक के अधिक वेतन लेने पर वरिष्ठ का वेतन बराबर करने का फैसला दिया। जिसकी अनुपालना के लिए निदेशालय ने 28 मई 2021 के वित्त विभाग के आदेश की पालना करने, कनिष्ठ के बराबर वरिष्ठ को वेतन देने और नए वेतनमान संशोधन एक जुलाई 2013 से प्रभावी करने के आदेश जारी कर दिए। अब चूंकि एक जुलाई 2013 को नए शिक्षकों का फि़क्स वेतन पहले से बढ़ाकर 12 हजार 900 किया गया और 2008 में नियुक्त शिक्षक उस दिन 13020 के मूल वेतन पर आ गए। ऐसे में निदेशालय का किसी भी शिक्षक को फायदा नहीं मिल रहा। ऐसे में इसे कोर्ट के आदेश की अनुपालना की औपचारिकता माना जा रहा है।

2006 से लाभ नहीं
इधर, 2008 में नियुक्त शिक्षक इसे वेतन विसंगति दूर होने से जोड़ रहे हैं। 2013-14 की बजट घोषणा व वेतन विसंगति कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक वे इसे 1 जनवरी 2006 से वेतन स्थरीकरण के रूप में ले रहे हैं। जबकि शिक्षा अधिकारियों व एक्सपर्टïï्स के अनुसार इस आदेश का संबंध 2013 के फिक्सेशन से है। मामले में शिक्षक संगठनों ने 2013-14 की बजट घोषणा और वेतन विसंगति कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार ही शिक्षकों का वेतन स्थरीकरण एक जनवरी 2006 से लागु करने की मांग भी की है।

इनका कहना है:
वरिष्ठ व कनिष्ठ शिक्षक का वेतन समान करने के निदेशालय का आदेश औपचारिक है। इसका किसी शिक्षक को लाभ नहीं मिलेगा। इसकी बजाय सरकार को 2013-14 की बजट घोषणा के अनुसार 2008 के शिक्षकों का वेतन स्थरीकरण 1 जनवरी 2006 से करना चाहिए।

विनोद पूनियाँ जिलाध्यक्ष
राजस्थान शिक्षक संघ ( शेखावत)