
श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई में निरंतर आगे बढ़ाने के सरकारी दावे हो रहे फेल
रविन्द्र सिंह राठौड़
सीकर. आर्थिक तंगी और अभावों को मात देकर पढ़ाई में सिरमौर रहने वाले युवाओं की तरक्की पर श्रम विभाग ने ब्रेक लगा दिए है। विभाग अभी तक होनहारों को प्रोत्साहन राशि नहीं दे सका है। होनहारों का कहना है कि प्रोत्साहन राशि के अभाव में आगे की पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है। जबकि सरकार लगातार श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई में निरंतर आगे बढ़ाने के दावे कर
रही है।
इन चार पीडि़त विद्यार्थियों की कहानी से समझें परेशानी
चीढि़या टिब्बा पुरोहित की ढ़ाणी निवासी धर्मेंद्र शर्मा लंबे समय से रंगाई-पुताई का काम करते है। इन्होंने विभाग में छात्रवृत्ति के लिए पांच अक्टूम्बर2017 को ऑनलाइन आवेदन किए। इनमें से एक आवेदन दसवीं कक्षा में 78.33 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले राकेश शर्मा का था। होनहार छात्र राकेश को छात्रवृत्ति के नौ हजार रुपए के साथ चार हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी मिलनी थी। लेकिन विभाग ने दोनों विद्यार्थियों के नाम केवल छात्रवृत्ति की राशि ही खाते में जमा कराई। प्रदीप ने 11 वीं कक्षा उत्तीर्ण कर 12वीं कक्षा में प्रवेश लिया है। इस मामले में पूर्व सहायक श्रम आयुक्त प्रदीप कुमार का कहना था कि विभाग के कुछ नए कर्मचारियों की वजह से इस बार गलती हो गई। आगामी सत्र में ध्यान रखा जाएगा।
-प्रोत्साहन राशि पर जिन विद्यार्थियों का हक है, उन्हें मिलना चाहिए। लेकिन यह भी हो सकता है कि सिस्टम में किसी विद्यार्थी ने छात्रवृत्ति के साथ प्रोत्साहन राशि का कॉलम नहीं भरा हो। इसके बावजूद अगर एेसा है, तो आवेदनों की फिर से जांच कराई जाएगी।- चैन सिंह शेखावत, सहायक आयुक्त, श्रम विभाग सीकर
-सरकार के अनुसार होनहार विद्यार्थियों की प्रोत्साहन राशि के लिए कोई शर्ते लागू नहीं है। नियमों को तोडक़र जो श्रम विभाग ने जो कृत्य किया हैं।
बृजसुंदर जांगिड़, जिला महामंत्री, भवन निर्माण यूनियन सीटू सीकर
यह है योजना
निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास और मेद्यावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व प्रोत्साहन राशि हर साल दी जाती है। योजना के तहत होनहारों को कक्षा आठ से दस तक चार हजार, 11वीं व 12वीं को छह हजार, डिप्लोमा (पॉलिटेक्निक, इंजीनियर या अन्य डिप्लोमा) में दस हजार, स्नातक (सामान्य) आठ हजार, स्नातकोत्तर (सामान्य) 12 हजार, स्नात्तक (व्यवसायिक कोर्स) 25 हजार व स्नातकोत्तर (व्यवसायिक कोर्स) में 35 हजार रुपए तक जारी होते हैं।
अब तक लगा रहा है चक्कर
जैतूसर निवासी प्रेमचंद कुमावत ने 11वीं कक्षा में अध्ययनरत अपनी बेटी रितू कुमावत व प्रतापपूरा निवासी प्यारेलाल महला ने नोवी कक्षा में अध्ययनरत अपनी बेटी निकिता महला का छात्रवृत्ति आवेदन किया। लेकिन इन्हें भी मेघावी श्रेणी आने के बावजूद कोई लाभ नहीं मिला।
यहां भी टूट गए सपने
भोपतपुरा निवासी माया देवी ने अपने पुत्र अंशु के नाम छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया। अशु ने 10वीं कक्षा में 77.50 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बावजूद विभाग ने केवल छात्रवृत्ति के नौ हजार रुपए ही खाते में जमा करवाएं। विभाग ने प्रोत्साहन राशि के चार हजार रुपए जारी नहीं की है।
-विभाग में प्रोत्साहन राशि के नाम पर गरीबों को गुमराह करने वाले इस मामले की जांच होनी चाहिए। सरकार का एक तरफ तो यह कहना है कि श्रमिकों का हक उन्हें मिले। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों पर सरकार का कोई अंकुश नहीं हैं। जानकारी के अभाव में भी कई गरीब परिवार सामने नहीं आते है। एेसे में लोगों का यह भी आरोप है कि छात्रवृत्ति की आड़ में विभागीय कर्मचारी प्रोत्साहन राशि का पैसा हजम कर रहे हैं।
दीपक शर्मा, जिला महासचिव, भारतीय जनता मजदुर महासंघ
Updated on:
09 Jun 2018 02:15 pm
Published on:
09 Jun 2018 01:55 pm
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