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नियमों में पेंच, ऐसे कैसे बनेगा राजस्थान सौर में हब

सौर ऊर्जा में राजस्थान को हब बनाने के दावों पर सरकार की नई योजना भारी पड़ रही है। पिछले दिनों सरकार ने सौर कृषि आजीविका योजना की शुरूआत की। लेकिन इसके नियमों ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है।

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विनोद सिंह चौहान/सीकर। सौर ऊर्जा में राजस्थान को हब बनाने के दावों पर सरकार की नई योजना भारी पड़ रही है। पिछले दिनों सरकार ने सौर कृषि आजीविका योजना की शुरूआत की। लेकिन इसके नियमों ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। क्योंकि सरकार ने दस हजार ग्राम पंचायतों में से महज 781 को पहले चरण में शामिल किया है। दूसरी तरफ सरकार ने आवेदन के लिए शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। इससे भी सरकार की ओर से योजना पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उधर, सरकार का तर्क है कि बंजर भूमि के उपयोग को देखते हुए पहले चरण की योजना तैयार की है। दूसरे चरण में अगली ग्राम पंचायतों को शामिल किया जा सकता है। वहीं, किसानों का कहना है कि सरकार ने अनुदान बचाने के फेर में नियमों में कई बदलाव किए हैं।

ऐसे समझें योजना का पूरा खाका
सौर कृषि आजीविका पोर्टल किसान एवं डवलपरों के लिए तैयार किया गया है। इच्छुक किसान व भूमि मालिक अपनी बंजर और अनुपयोगी भूमि को लीज पर देने के लिए पंजीकरण कर सकेंगे। वहीं, डवलपर आसानी से पोर्टल पर किसान की जमीन का विवरण देख सकेंगे। इससे राजस्थान डिस्कॉम के 33/11 केवी सब-स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में सुविधा मिलेगी। इस योजना में छोटे प्लांट लगेंगे और इनसे उत्पादित बिजली का लाभ प्लांट के आसपास के क्षेत्रों के किसानों को ही मिलेगा। योजना के तहत जिन क्षेत्रों में कृषि बिजली का भार अधिक है, उन जीएसएस को चिन्हित करके पीएम-कुसुम योजना-सी में फीडर लेवल सोलराइजेशन के तहत संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।

यह कायदे बढ़ा रहे चुनौती
1. जमीन की दूरी सब स्टेशन से 5 किमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
योजना के कई कायदे किसानों के साथ डवपलर की चुनौती बढ़ा रहे हैं। योजना के तहत अधिकतम एक हैक्टेयर (चार बीघा) भूमि पर लीज पर लेकर संयंत्र लगा सकेंगे। इसके लिए बंजर भूमि की दूरी सब स्टेशन से पांच किमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अब तक प्रदेश के लगभग आठ हजार किसान व 900 से अधिक डेवलपर्स पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। किसानों की मांग है कि इस दायरे को बढ़ाकर आठ किलोमीटर किया जाना चाहिए।

2. किसान को 1180 एवं डवलपर को 5900 फीस जमा करानी होगी
किसान लॉगिन व डेवलपर लॉगिन में से ऑप्शन चुनकर रजिस्टर बटन पर क्लिक करके मोबाइल नंबर, नाम और ओटीपी डालकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। डवलपर को पंजीकरण के समय 5900 रुपए फीस के रूप में जमा कराने होंगे। रजिस्ट्रेशन करने के बाद प्राप्त यूजर आईडी और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा। इसके आगे की प्रक्रिया किसान और डेवलपर दोनों के लिए अलग-अलग प्रकार की होगी। लॉगिन करने के बाद लिस्ट में उपयुक्त 33/11 किलोवाट सब स्टेशन का चयन करना होगा। इसके बाद स्क्रीन पर एक आवेदन फार्म खुलने पर जरूरी दस्तावेज अपलोड के बाद पंजीकरण शुल्क 1180 रुपए का भुगतान कर दें। इसके बाद भूमि का डिस्कॉम द्वारा आवेदन की जांच करके भूमि का सत्यापन किया जाएगा।

राहत: उत्पादित बिजली किसानों को मिलेगी, जिससे लोड कम होगा
राज्य सरकार की सौर कृषि आजीविका योजना के तहत स्थापित होने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इन संयंत्रों से उत्पादित होने वाली बिजली आस-पास के क्षेत्र के किसानों को ही मिलेगी। इस योजना से किसानों को दिन के समय कृषि कार्य करने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इससे किसानों को कृषि कार्य करने में सुविधा होगी व उत्पादित बिजली सरकार को बेच कर भी किसान लाभ कमा सकते हैं।

अनुदान: कुल लागत का 30 फीसदी तक मिल सकेगा
सौर कृषि आजीविका योजना से विकासकर्ता भी संयंत्र लगाने के लिए पीएम कुसुम योजना के तहत केन्द्रीय अनुदान लागत का 30 फीसदी हासिल कर सकेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा भूमि मालिक, किसान, विकासकर्ता संबंधित डिस्कॉम या कंपनी के मध्य त्रिपक्षीय अनुबंध किया जाएगा। भूमि मालिक व किसानों को जोखिम से सुरक्षा प्रदान की जा सके।

अलर्ट: वेबसाइट से सावधान रहने की एडवाइजरी जारी
ऊर्जा विभाग ने किसानों को फर्जी वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन को लेकर अलर्ट जारी किया है। क्योंकि इस योजना में आवेदन के साथ शुल्क लेने का प्रावधान है। पिछले दिनों कई किसानों के पास फर्जी साइट से मैसेज भी पहुंचे थे।

एक्सपर्ट व्यू....विसंगति दूर हो तो किसान बने आत्मनिर्भर
वर्ष 2019 मे भारत सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से पीएम कुसुम योजना की शुरूआत की थी। कोई भी किसान जिसकी जमीन संबंधित जीएसएस से 5 किलोमीटर की दूरी के अंदर है वो इस योजना के माध्यम से दो मेगावाट तक का सौलर प्लांट लगाकर अपनी आय बढ़ा सकता है। किसानों की ओर से लगाए जाने वाले प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को सरकार की ओर से आगामी 25 वर्षों तक 3.14 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदने का अग्रीमेंट किया जाता है। इससे किसान आसानी से इस योजना मे निवेश कर सकते हैं। वर्तमान मे राजस्थान मे लगे सौलर प्लांट्स से 11821.87 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। यदि योजना की विसंगति दूर होती है तो किसानों का आत्मनिर्भर बनने का सपना पूरा हो सकता है।
सुधेश पूनियां, नेशनल यूथ अवार्डी, सीकर


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