
दौलतपुरा (कटराथल) निवासी एक मजदूर के बेटे का चयन यूपीएससी की ओर से घोषित सिविल सेवा की परीक्षा में हुआ है। पहली से नौंवी तक गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़े सुरेश कुमार मीणा की 1053 वीं रेंक आई है। दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में आईआईटी उत्तीर्ण सुरेश आठवीं में भी मेरिट में आ चुका। राजस्थान पत्रिका तथा एक कोचिंग सेंटर की ओर से आयोजित परीक्षा में भी मेरिट आ चुका। सुरेश ने बताया कि प्रतिदिन 15 से 16 घंटे नियमित पढ़ाई कर यह मुकाम हांसिल किया है। रेंक बढ़ाने के लिए फिर से तैयारी कर रहा है। सुरेश की मां भी मजदूरी का कार्य करती है।
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चुनौती स्वीकारी
सिविल सेवा परीक्षा के घोषित परिणाम में श्रीमाधोपुर निवासी सौरभ गोयल का चयन हुआ है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के फाइनल सिलेक्शन प्रोसेस के बाद पूरे देश में 479वीं रैंक हासिल करने वाली सौरभ गोयल ने राजस्थान पत्रिका से कहा कि असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो, क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो। संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम। गोयल का गत परीक्षा में सपना अधूरा रहा जिसे उस ने चुनौती मान कर कोशिश की और 479वीं रैंक प्राप्त की। एमएनआईटी जयपुर से इंजीनियरिंग कर चुका सौरभ वर्तमान में आई आई एम रायपुर से एमबीए कर रहा है।
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पहले प्रयास में शुभम चयनित
नीमकाथाना कस्बे के यूपीएससी की ओर से बुधवार को घोषित हुए सिविल सेवा की परीक्षा में उपखंड क्षेत्र के गांव भूदोली निवासी शुभम गुप्ता (23) ने प्रथम बार में ही पास कर ली है। शुभम की 366वीं रैंक आई है। वर्तमान में शुभम का परिवार पिछले कई वर्षों से जयपुर वैशाली नगर में रह रहा है। उनके पिता अनिल गुप्ता श्रीमाधोपुर में प्रॉपर्टी का काम करते हैं। गांव के लोगों से हमेशा से लगाव रखने वाले शुभम का यूपीएससी परीक्षा में चयन होने की सूचना पर गुरुवार को ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। शुभम वर्तमान में दिल्ली में स्थित एमकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग में दिन रात मेहनत कर प्रथम प्रयास में सफलता हासिल की। दिल्ली से शुभम ने पत्रिका को बताया कि वह शुरू से ही देश सेवा में जाने के लिए इच्छा रखते थे। उन्होंने बताया कि मेहनत करने वालों के सामने आसमान की सीढिय़ा कोई मायने नहीं रखती है। पूरी सफलता का श्रेय सबसे ज्यादा अपनी माता अनुपमा को दिया। कोचिंग में शिक्षक कर्मसिंह को भी अपनी सफलता का श्रेय दिया। पिता अनिल गुप्ता ने पत्रिका को बताया कि गांव को छोड़े हुए करीब 25 वर्ष से ज्यादा हो गए, लेकिन ग्रामीणों की हर समस्या पर उनके बीच में खड़ा रहता हूं। गांव से आज भी उनका उतना ही लगाव जब से उन्होने गांव छोड़ा था बेटे के परिणाम की सूचना के बाद गांव से बधाई देने वालों से खूब फोन आ रहे हैं।
Published on:
02 Jun 2017 12:28 pm
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