
SEPCIAL REPORT: 33 करोड़ खर्च कर 11 राज्यों में गिरा लिंगानुपात, हमारे यहां 60 फीसदी पैसा लैप्स कर भी सुधार
आशीष जोशी
सीकर. बाल लिंगानुपात Child Sex ratio में सुधार और बालिकाओं के उत्थान के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2015 में शुरू की गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना को लेकर राजस्थान समेत अधिकांश राज्य गंभीर नहीं है। Most of the states including Rajasthan are not serious about the (BBBP) scheme. हालात यह है कि किसी भी प्रदेश ने केंद्र से आया पूरा पैसा ही उपयोग नहीं लिया। राजस्थान ने तो पिछले छह सालों में केंद्र से आई योजना राशि में से 60 फीसदी से ज्यादा पैसा लैप्स कर दिया। हाल ही में राजस्थान विधानसभा Rajasthan Legislative Assembly में इस संबंध में मामला गूंजने के बाद पत्रिका ने योजना की देशव्यापी पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। ग्यारह राज्य तो ऐेसे हैं जिन्हें योजना शुरू होने से अब तक 65.60 करोड़ रुपए आवंटित होने के बावजूद वहां 2014-15 की तुलना में लिंगानुपात Sex ratio गिर गया। इन राज्यों ने आवंटित राशि का करीब 50 फीसदी पैसा यानी 33 करोड़ रुपए ही खर्च किए। जबकि राजस्थान Rajasthan में 17 अंकों का सुधार दर्ज हुआ है। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआइएस) Health Management Information System (HMIS) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में बाल लिंगानुपात में 19 अंकों का सुधार हुआ है। वर्ष 2014-15 में राष्ट्रीय स्तर पर यह 918 थाए जो 2020-21 में 937 पर पहुंच गया।
राजस्थान ने बदली तस्वीर रू 929 से 946 हुईं बेटियां
योजना शुरू होने से पहले वर्ष 2014-15 में राजस्थान में जन्म के समय 1000 बेटों पर 929 बेटियां थी। वहीं 2020-21 में 17 अंकों के सुधार के साथ बेटियों की संख्या 946 हो गईं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम का पूरे देश में विस्तार झुंझुनूं से किया था।
बिहार-केरल समेत 11 राज्यों में गिरा लिंगानुपात
11 राज्यों में योजना के तहत करोड़ों रुपए मिलने के बावजूद लिंगानुपात में सुधार की बजाय स्थिति और बिगड़ गई। केरल जैसा शिक्षित प्रदेश भी एक अंक लुढक गया। योजना को लेकर पूरे देश की समग्र तस्वीर भी उजली नहीं है। वर्ष 2015-16 से 2020-21 तक केंद्र की ओर से सभी राज्यों को कुल 434.69 करोड़ रुपए आवंटित हुए। इनमें से करीब 50 फ ीसदी पैसा ही खर्च हो पाया। केवल लक्षद्वीप ही ऐसा प्रदेश था जहां 2014 में जन्म के समय एक हजार बेटों पर 1000 ही बेेटियां थी। वहां भी अब 948 बेटियां ही रह गई।
इन राज्यों में बिगड़ा बाल लिंगानुपात
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र .. लिंगानुपात
2014.15..2020.21
बिहार . 936 . 915
केरल . 959 . 958
अंडमान.निकोबार . 967 . 961
जम्मू.कश्मीर . 936 . 933
दादरा नगर हवेली . 939 . 883
लक्षद्वीप . 1000 . 948
मिजोरम . 971 . 962
नागालैंड . 948 . 897
ओडिशा . 948 . 936
सिक्किम . 957 . 929
त्रिपुरा . 958 . 944
(स्वास्थ्य मंत्रालय की एचएमआइएस रिपोर्ट के अनुसार)
एक्सपर्ट व्यू : ऐसे तो 1000 तक कब पहुंचेंगे...
हर साल बजट लैप्स हो रहा हैए किसी को चिंता नहीं है। ऐसे तो लिंगानुपात एक हजार तक कब पहुंचेगा। पीसीपीएनडीटी को लेकर वर्ष 2009 में डिकॉय ऑपरेशन शुरू हुए थे, 2014 में रफ्तार पकड़ी। वर्ष 2018 तक खूब चले। उसके बाद से ऐसी गतिविधियां कम हो गई। अभियान से संबंधित गतिविधियों के लिए जिलों में सालाना करीब एक-एक करोड़ का बजट होता है। कई जगह तो ये पैसा दूसरे मद में खर्च करने की भी शिकायतें आती हैं। सरकार और जिलों के प्रशासन को गंभीरता दिखानी होगी।
राजन चौधरी, राजस्थान प्रतिनिधि, एसआरकेपीएस
Updated on:
03 Mar 2022 10:44 am
Published on:
03 Mar 2022 10:16 am
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