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355 साल पुराना है नरोदड़ा का शिव मंदिर, 23 साल पहले हुआ जीर्णोद्धार

राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बसे नरोदड़ा गांव में स्थित शिव मंदिर ऐतिहासिक महत्व लिए हुए है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Jul 21, 2022

355 साल पुराना है नरोदड़ा का शिव मंदिर, 23 साल पहले हुआ जीर्णोद्धार

355 साल पुराना है नरोदड़ा का शिव मंदिर, 23 साल पहले हुआ जीर्णोद्धार

प्रभाष नारनौलिया
सीकर/लक्ष्मणगढ़. राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बसे नरोदड़ा गांव में स्थित शिव मंदिर ऐतिहासिक महत्व लिए हुए है। मान्यता है कि गांव की स्थापना से पूर्व में बसे इस मंदिर में शुद्ध व सात्विक मन से आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूरी होती है। गांव के मुख्य चौक में बने मंदिर की स्थापना संवत 1724 में ढोलास गांव के कुंए से पानी लाकर की गयी थी। पवित्र सावन मास में जहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, वहीं आस-पास के ग्रामीण भी मंदिर में धोक लगाने आते हैं। मंदिर परिसर में ही ग्राम देवता सकल जी महाराज, बालाजी और कुलदेवी दधिमथी का मंदिर है। मान्यता है कि सकल जी के मंदिर में बुहारी निकालने से मस्सों की बीमारी से छुटकारा मिलता है।

एक माह चलते हैं रूद्राभिषेक पाठ
गांव के पंडित मांगीलाल शर्मा ने बताया कि आस्था को केन्द्र होने से बुजुर्गो के साथ-साथ महिलाएं व बच्चे भी रोजाना जल और दुग्ध से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। यहाँ रुद्राभिषेक कार्यक्रम पूरे सावन मास में ही आयोजित करवाया जाता है। ऐतिहासिक महत्व के कारण गाँव और आसपास के लोग यहाँ कांवड़ चढ़ाते हैं। कुछ युवाओं का दल तो माह के सोमवार को हरिद्वार व लोहार्गल से कावड़ लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते है। कांवडिय़ों और यात्रियों के विश्राम के लिए यहाँ मंदिर परिसर में ही शौचालय, विश्रामघर और शीतल जल की व्यवस्था 24 घंटे उपलब्ध रहती है। वर्तमान में पुजारी परिवार की चौथी पीढ़ी के बाल संत भरत शर्मा पूजा अर्चना करते हैं।

सिंघानिया परिवार ने करवाया जीर्णोद्धार
गांव की स्थापना के पूर्व से बसे उक्त मंदिर का जीर्णोद्धार मंदिर के महंत दिवंगत केशरदेव पुजारी की प्रेरणा से 1999 में प्रवासी भामाशाह स्वर्गीय डूंगरमल सिंघानियां ने करवाया। नरोदड़ा गांव हमेशा से ही संतों के संपर्क में रहा। बऊ धाम के भोलानाथजी महाराज, श्रद्धानाथ जी महाराज, ब्रह्मचारी जी महाराज,परमानंद जी महाराज, महाकाल जति महाराज, सोमेश्वर जति महाराज आदि का आवागमन समय-समय पर लगा ही रहता था। संतों के आशीर्वाद से ही नरोदड़ा गांव में स्थित उक्त प्राचीन मंदिर का जीर्णाेद्धार संभव हो पाया।