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VIDEO : सीकर एक्सीडेंट में मरने वालों की संख्या बढ़ी, इस घायल ने भी तोड़ा दम, पति-पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

हादसे में मरने वालों की संख्या 11 से बढकऱ 12 हो गई है। अब रतनगढ़ के घायल की मौत हुई है।

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skar accident photo

सीकर.

जयपुर-बीकानेर हाईवे (एनएच 11) पर फतेहपुर सदर थाना इलाके के गांव रोलसाहबसर के पास बुधवार सुबह लोक परिवहन बस व ट्रोले की भिड़ंत में घायल हुए एक अन्य यात्री ने भी दूसरे दिन गुरुवार को दम तोड़ दिया। इससे हादसे में मरने वालों की संख्या 11 से बढकऱ 12 हो गई है। अब शकील पुत्र याकूब 30 बीका बास रतनगढ़ की मौत हुई है। शकील को हादसे के बाद गंभीर हालत में रैफर किया गया था।

उधर, सरदारशहर के वार्ड 39 निवासी सीताराम प्रजापत व उनकी पत्नी कमला भी हादसे का शिकार हो गए थे। गुरुवार को दोनों की अर्थी एक साथ उठी और एक ही चिता पर दाह संस्कार किया गया। सीताराम बुधवार को पत्नी कमला का स्वास्थ्य खराब होने के कारण उसे दिखाने के लिए सीकर ले जा रहा था।

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पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
8 जुलाई 2015: लक्ष्मणगढ़ इलाके के छिंछास बस स्टैण्ड पर पिकअप और बोलेरो की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई थी, जिसमें चार साल की बच्ची समेत नौ जनों की मौत हो गई थी। ये सब नागौर के रहने वाले थे और बोलेरो में सवार होकर शराब छुड़वाने के लिए फतेहपुर एक स्थान पर आए थे।
22 अक्टूबर 2017: सीकर में बीकानेर ? बाइपास पर दो बाइकों में हुई आमने सामने की टक्कर में चार युवकों ने दम तोड़ दिया था।
8 नवम्बर 2017: सीकर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलकेड़ा के पास सडक़ पर बने कट में टर्न ले रहे एक ट्रोले ने शैक्षणिक भ्रमण से लौट रहे विद्यार्थियों की बस को टक्कर मार दी। भिड़ंत में बस में सवार 59 बच्चे घायल हो गए तथा चार शिक्षकों को चोटें आई।
9 मई 2017: फतेहपुर के पास रामगढ व आसास रोड पर भीषण सडक़ हादसा हुआ, जिसमें चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और करीब दस लोग घायल हो गए थे। यहां मारूती व जीप में भिड़ंत हई थी।
19 अगस्त 2017: फतेहपुर में ही बीड़ में स्थित पींजरापोल के पास ट्रक और जीप की आमने सामने की भिड़ंत में 4 लोगों की मौत हो गई थी।
16 अगस्त 2017: खाटूश्यामजी में दांता रोड पर मगनपुरा के पास दो बाइकों की आमने-सामने हुई भिड़ंत में तीन युवकों की मौत हो गई थी।

यह पांच बड़ी लापरवाही बनी काल


1. रोडवेज के पीछे से रवाना हुई लोकपरिवहन बस के चालक ने महज 25 किलोमीटर के दायरे में तीन बार तो खतरनाक तरीके से रोडवेज बस को ओवरटेक कर लिया। इस दौरान दो बार लोक परिवहन की बस रुकी भी और सवारियां भी बिठाई, जबकि रोडवेज कहीं रुकी भी नहीं । इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बस कितनी स्पीड में थी और किस तरह चल रही थी।
2. जहां हादसा हुआ वहां से महज 10 मिनट बाद फतेहपुर स्टैंड आने वाला था। यहां की सवारियां उठाने के चक्कर में ही लोक परिवहन को भगाया जा रहा था। एक एक सवारी के चक्कर में इस कदर लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही थी।
3. जहां हादसा हुआ उससे ठीक पहले खतरनाक मोड़ और चढ़ाई भी है। चढ़ाई में ही बस ट्रोले से भिड़ी है। इतनी खतरनाक जगह पर ओवरटेक करना ही सबसे बड़ी लापरवाही है।
4. पूरे जिले में तेज गति से दौड़ रहे वाहनों की जांच के लिए महज एक इंटरसेप्टर गाड़ी है। यह गाड़ी रींगस से लेकर बीरमसर तक चलती है। ऐसे में वाहनों की स्पीड की जांच तो नामुमकिन है।
5. लोक परिवहन को लेकर परिवहन विभाग व पुलिस बिल्कुल गंभीर नहीं है। जबकि ये बसें बहुत स्पीड से चलती हैं और पहले भी कई बार इनसे हादसे हो चुके हैं।

दुर्घटना में ये हुए थे घायल

हादसे में जगवीर पुत्र त्रिलोका राम, निरंजन पुत्र रमेश शर्मा, सांवरमल पुत्र दूदाराम, दशरथ पुत्र बलराम, श्यामलाल पुत्र शिवदत्त, महेंद्र पुत्र बिल्लाराम, हरमान पुत्र आशुनाथ, राजू पुत्र रामदत्त, राकेश पुत्र बालाराम, राजेश पुत्र महावीर प्रसाद, सुभाष पुत्र गोपालाराम, सुरेंद्र सिंह पुत्र राजू सिंह, अशोक पुत्र बजरंग, मुकेश पुत्र लक्ष्मणसिंह, अरमान पुत्र मुबारक, मुबारक पुत्र मोहम्मद आमीन, किशोर पुत्र सोहन सिंह, पवन पुत्र अजय कुमार, अनिल व चार अन्य लोग गंभीर घायल हो गए।

बस ड्राईवर तक की जानकारी छुपा रहा मालिक, कंडक्टर भी फरार

हादसे में बस के चालक की मौत भले ही हुई है, लेकिन बस का मालिक उसकी जानकारी भी पुलिस ने छिपाता रहा। कभी किसी चालक का नाम बताता रहा तो कभी किसी का। यहां तक कि बस का कंडक्टर भी एकबार तो पुलिस को मिला और बाद में भाग निकला। पुलिस का कहना है कि बस को कंवलपुरा निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र दीपसिंह चला रहा था। उसके लाइसेंस की भी जांच की जाएगी।

एक दिन पहले सीकर में बाल बाल बची थी यही बस

यातायात पुलिस के सूत्रों के मुताबिक बुधवार को रोलसाहबसर में हादसे का शिकार हुई बस एक दिन पहले ही सीकर में भी बाल बाल बची थी। मंगलवार शाम बजरंग कांटा पर सवारियां लेने के चक्कर में बस एक ऑटो से भिड़ते भिड़ते बची थी। यातायात पुलिसकर्मीं ने रोकने की कोशिश की तो ड्राइवर बस को लेकर निकल गया।


सोशल मीडिया पर उठी आवाज, परलोक व मौत परिवहन हो बंद

लोक परिवहन बस से हादसे के बाद बुधवार को लोगों ने सोशल मीडिया पर सरकार की ओर से जारी इस सेवा का जमकर विरोध किया। कई यूजर ने तो यह तक लिख दिया कि सरकार ने खुद के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इनको परमिट दिए और बदले में ये लोगों की जान ले रहे हैं। कई यूजर ने इसे मौत परिवहन सेवा तो कइयों ने परलोक परिवहन सेवा तक करार दे दिया। लोगों ने मांग उठाई कि यह सेवा बंद होनी चाहिए। एक एक सवारी के चक्कर में ये लोग सैकडों सावरियों की जान जोखिम में डाल देते हैं।


मदद को आगे आया हर हाथ

हादसे में घायलों की मदद के लिए फतेहपुर के लोग बढ़चढकऱ आगे आए। सबसे पहले हालांकि सदर थाना पुलिस ने राहत कार्य शुरू किया लेकिन बाद में जिसने भी सुना वह मदद के लिए दौड़ पड़ा। स्काउट गाइड सहित कई संगठन आगे आए।
शहर के युवाओं ने अस्पताल पहुंच कर घायलों के इलाज में सहयोग किया। कोई दवाईयां ला रहा था तो कोई स्ट्रेचर खींच रहा था। घायलों से घर के नंबर लेकर परिजनों को सूचना दी। स्काउट के मोतीराम महिचा, ईश्वर सिंह नेहरा, करण सिंह जाखड़, गुलाब अलबेला, लायंस क्लब के सुरेश जाखड़, तैयब मेहराब खान, राजेश पप्पू नेहरा, लोकेश राड़, राजू कुल्हरी, हेमेंद्र महला, आबिद हुसैन व मुबारिक खान सहित कई लोगों ने मौके पर हर संभव मदद की।