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Sikar in Mann ki Baat : पीएम मोदी से तारीफ सुनने के बाद कुछ ऐसा रहा इन बेटियां का रिएक्शन

Sikar in Mann ki Baat : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' 27 May 2018 में सीकर की बेटियां का भी जिक्र किया।

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Sikar in Mann ki Baat

सीकर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपनी 'मन की बातÓ में सीकर की बेटियां का भी जिक्र किया। ये बेटियां कभी कचरा बीनती थी और वर्तमान स्वरोजगार के जरिए परिवार का सहारा बनी हुई हैं। पीएम मोदी से तारीफ सुनकर इन बेटियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

Sikar in Mann ki Baat

ये बेटियां ब्यूटी पार्लर और सिलाई का प्रशिक्षण पाकर न केवल परिवार का सहारा बन गई है बल्कि, प्रधानमंत्री मोदी की जुबान पर आई मन की बात के जरिए देश और दुनियां तक अपना नाम रोशन कर चुकी है।

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बस्ती की मनीषा, प्रियंका और सुमन का कहना है कि वह रोजाना 100 से 300 रुपए सिलाई से कमा कर परिवार को बड़ा सहारा दे रही है। जिन बेटियों ने ब्यूटीशिन का कोर्स किया है वह भी छोटो- मोटा काम कर रही है।

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सीकर की कच्ची बस्ती के बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए पत्रिका पिछले चार साल से प्रयासरत है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति से इस बस्ती के बच्चों को दूर रखने के लिए पत्रिका ने 2014 में अभियान चलाया था। जिसमें समाज सेवी शैतान सिंह की करणी प्राथमिक स्कूल सहयोगी बनी।

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सीकर की कच्ची बस्ती की इन बेटियों को कौशल विकास के जरिए रोजगार से जोडऩे की पहल राजस्थान पत्रिका ने की थी। पत्रिका ने रोजगार की दहलीज तक ले जाने के लिए जेएमबी स्किल सेंटर की मदद से एक मजबूत राह दी। कौशल प्रशिक्षण हासिल करने के बाद कच्ची बस्ती की बच्चियां अब ब्लाउज, पेटीकोट, लहंगा, और फ्रोक आदि सिलने लगी है। जिससे उनकी आमदनी भी शुरू हो गई है।

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प्रधानमंत्री की जुबान से अपनी तारीफ सुनकर यह बेटियां अब खुशी से लबरेज हंै। जैसे ही मन की बात में प्रधानमंत्री से अपनी तारीफ सुनने की जानकारी मिली, तो शैतान सिंह की अगुआई में कच्ची बस्ती में जश्न का सा माहौल हो गया।

Sikar in Mann ki Baat

ये कहा पीएम ने मेरे प्यारे भाइयो-बहनो ! मैं टीवी पर एक कहानी देख रहा था। सीकर की कच्ची बस्तियों की हमारी गऱीब बेटियों की। हमारी ये बेटियां, जो कभी कचरा बीनने से लेकर घर-घर मांगने को मजबूर थीं, आज वे सिलाई का काम सीख कर गऱीबों का तन ढ़कने के लिए कपड़े सिल रही हैं। यहां की बेटियां, आज अपने और अपने परिवार के कपड़ों के अलावा सामान्य से लेकर अच्छे कपड़े तक सिल रही हैं। वे इसके साथ-साथ कौशल विकास का कोर्स भी कर रही हैं। हमारी ये बेटियां आज आत्मनिर्भर बनी हैं। सम्मान के साथ अपना जीवन जी रही है और अपने-अपने परिवार के लिए एक ताक़त बन गई हैं। मैं आशा और विश्वास से भरी हमारी इन बेटियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।