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थाने में पुलिस को हर वक्त सता रहा मौत का खौफ, भय के माहौल में करते हैं काम

रेल की पटरियों पर अपराधियों से निपटने वाले जीआरपी के जवान सीकर ( Sikar GRP Police Station ) में मौत के साए में जी रहे हैं। जवान थाने और क्वार्टर दोनों ही स्थानों पर सुरक्षित नहीं है। कब सिर पर चूने का लेवड़ा गिर जाए। हर समय उन्हें यह डर सताता रहता है।

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सीकर

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Naveen Parmuwal

Feb 11, 2020

थाने में पुलिस को हर वक्त सता रहा मौत का खौफ, भय के माहौल में करते हैं काम

थाने में पुलिस को हर वक्त सता रहा मौत का खौफ, भय के माहौल में करते हैं काम

सीकर.

रेल की पटरियों पर अपराधियों से निपटने वाले जीआरपी के जवान सीकर ( Sikar GRP Police Station ) में मौत के साए में जी रहे हैं। जवान थाने और क्वार्टर दोनों ही स्थानों पर सुरक्षित नहीं है। कब सिर पर चूने का लेवड़ा गिर जाए। हर समय उन्हें यह डर सताता रहता है। परेशानी को लेकर जवानों ने रेलवे के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे। हाल ही दौरे पर आए उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक को भी अपनी पीड़ा बताई। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। जवानों का कहना है कि जीआरपी राज्य सरकार के अधीन आती है, जबकि थाने का रख-रखाव रेलवे के जिम्मे होता है। ऐसे में राज्य सरकार की तरफ से थाने को कुछ मिलता नहीं है और रेलवे के अधिकारी सुनाई नहीं करते हैं।


थाने पहुंचना कठिन
सीकर का जीआरपी थाना रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर दूर ऐसे स्थान पर बना है, जहां पर यात्रियों का पहुंचना ही संभव नहीं है। थाने तक पहुंचने के लिए नवलगढ़ पुलिया के नीचे रेलवे कॉलोनी होकर आना पड़ता है। ऐसे में स्टेशन पर रात के समय किसी यात्री के साथ कोई वारदात होने पर वह थाने जाकर मामला भी नहीं दर्ज करवा सकता। मामला दर्ज करवाने का प्रयास भी करता है तो आने-जाने में ही उसका एक घंटे से अधिक का समय खर्च हो जाएगा।

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नाकारा आवास में जवानों का निवास
थाना ही नहीं जवान रेलवे की ओर से नकारा घोषित किए गए आवास में निवास करते हैं। रेलवे विभाग की ओर से कई वर्ष पहले 10 आवास जवानों के लिए आवंटित किए थे। इन क्वार्टरों को रेलवे ने नाकारा घोषित कर दिया, लेकिन नए क्वार्टर बनने के बाद भी आवंटन नहीं होने े के कारण जवान नाकारा क्वार्टर में ही रहने को मजबूर है।


स्वागत कक्ष और महिला डेस्क महज नाम की
इस थाने में स्वागत कक्ष और महिला डेस्क के लिए भी जगह नहीं है। इनके नाम की प्लेट बरामदे में लगा रखी है। इसके अलावा थाने की बैरिक की जर्जर हालत में पहुंच गई है। हर समय छत से पानी और दीवारों से चुना गिरता रहता है। जवानों का कहना है कि जर्जर हो चुकी बैरिक कभी भी गिर सकती है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा थाने में शौचालय भी जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। परिवादियों के लिए पीने के शुद्ध पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय में लगे पानी के नल लम्बे समय से खराब है। उनमें हर समय पानी रिसता रहता है।


इनका कहना है
थाने की दयनीय स्थिति को लेकर रेलवे के अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया गया। उत्तर-पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधन को भी ज्ञापन दिया गया है। सुविधाओं के अभाव में जवान परेशान है। अधिकारियों को जल्द ही समस्याओं का समाधान करना चाहिए। -रामकुमार मीणा थाना प्रभारी, जीआरपी थाना

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