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शिक्षक भर्ती घोटाले से अभी उबरा नहीं जेएनवीयू, अब सामने आई पेंशन की समस्या

जेएनवीयू -पेंशन के लिए 114 करोड़ रुपए पहले ले चुका है कर्ज
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सीकर

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Harshwardhan Singh Bhati

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Updated: 2 Feb 2017, 7:59 PM IST

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जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पास अपने सैंकड़ों सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों को पेंशन भुगतान के लिए फण्ड नहीं है। कुलपति डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों को जनवरी की पेंशन का भुगतान करने में दिक्कत आ सकती है या विलम्ब हो सकता है। विवि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रहा है।

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पेंशन के भुगतान के लिए ले रखे हैं 114 करोड़ उधार

विवि के लिए पेंशन की समस्या नई नहीं है। 2016 में अप्रेल का वेतन व पेंशन देने में भी विलम्ब हुआ था। विवि पहले ही सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों के पेंशन व ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए 114 करोड़ रुपए बैंक सहित अन्य मदों से ओवरड्रॉफ्ट ले चुका है। इसमें 93 करोड़ रुपए पेंशन के लिए और 21 करोड़ ग्रेच्युटी के शामिल हैं। विवि को प्रतिमाह करीब 1500 शिक्षकों व कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान करना होता है।

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हर साल घाटे में जा रहा विवि

जेएनवीयू में हर वर्ष घाटे का बजट पास किया जाता है। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2016-17 में विवि 22 करोड़ 80 लाख 48 हजार रुपए घाटे में था। इस वित्तीय वर्ष में विवि के खर्च 1 अरब 48 करोड़ 14 लाख 21 हजार रुपए बताई गई। इसमें से वेतन और पेंशन मद पर 1 अरब 6 करोड़ 44 लाख 54 हजार रुपए खर्च होना है।

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सरकार ने हाथ किए खड़े

प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की पेंशन का भार राज्य सरकार उठाती हैं। लेकिन प्रदेश के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों की पेंशन के भार उठाने के मामले में सरकार ने हमेशा पल्ला झाड़ा है। सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालय अपने स्तर पर संसनधा जुटाए और कर्मचारियों की पेंशन का भुगतान करें। विवि शिक्षक संघ कई बार मांग उठा चुके हैं कि विवि के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों की पेंशन का भार सरकार उठाए। पेंशन भुगतान के लिए विवि प्रशासन कई बार अपनी जमीन बेचने का मानस बना चुका है।

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विवि की आर्थिक ठीक नहीं

विवि के पास पेंशन के लिए फंड नहीं है। हम प्रयास कर रहे है कि सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों को परेशानी न हो। सरकार को अवगत किया जाएगा। विवि की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

- डॉ. रामपाल सिंह, कुलसचिव, जेएनवीयू