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VIDEO: जाम में एंबुलेंस का बजता रहा सायरन, लोगों ने किया अनसुना, 3.4 किमी दूर से 45 मिनट बाद पहुंची अस्पताल

Sikar Patrika Traffic Campaign : शहर के बीचोंबीच जाम से गुजरती ए्म्बुलेंस ( Ambulance Stuck in Traffic ) को एक भी वाहन चालक ने खुद हटकर रास्ता नहीं दिया। तेज सायरन को भी सुनकर लोगों ने अनसुना कर दिया। जबकि एम्बुलेंस में कोई गंभीर मरीज भी हो सकता था। हैरानी की बात तो यह है कि सर्किलों पर खड़े पुलिसकर्मियों ने भी जाम में फंसी एम्बुलेंस को देखकर निकालने में मदद नहीं की।

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सीकर

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Naveen Parmuwal

Dec 18, 2019

जाम में फंसी एंबुलेंस का बजता रहा सायरन, लोगों ने किया अनसुना, 3.4 किमी दूर से 45 मिनट बाद अस्पताल पहुंची

जाम में फंसी एंबुलेंस का बजता रहा सायरन, लोगों ने किया अनसुना, 3.4 किमी दूर से 45 मिनट बाद अस्पताल पहुंची

विक्रम सिंह सोलंकी, सीकर.

sikar patrikatraffic Campaign : शहर के बीचोंबीच जाम से गुजरती ए्म्बुलेंस ( ambulance Stuck in Traffic ) को एक भी वाहन चालक ने खुद हटकर रास्ता नहीं दिया। तेज सायरन को भी सुनकर लोगों ने अनसुना कर दिया। जबकि एम्बुलेंस में कोई गंभीर मरीज भी हो सकता था। हैरानी की बात तो यह है कि सर्किलों पर खड़े पुलिसकर्मियों ने भी जाम में फंसी एम्बुलेंस को देखकर निकालने में मदद नहीं की। एसके अस्पताल से रायजी का कुआं तक पहुंचने में एम्बुलेंस को 42 मिनट लग गए। जबकि यहां से रायजी का कुआं तक का रास्ता केवल 3.4 किलोमीटर का ही है। वहां से अस्पताल तक लेकर आने में भी 45 मिनट लग गए। हालांकि एम्बुलेंस में मरीज नहीं था, लेकिन सवाल यह है कि अगर एम्बुलेंस में मरीज होता तो अस्पताल से आने-जाने में ही करीब डेढ़ घंटा लग गया। ऐसे में गंभीर मरीज की स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती है। ऑक्सीजन भी नहीं थी।


नियम: रास्ता नहीं देने पर 10 हजार जुर्माना
एमवी एक्ट के अनुसार अगर फयर बिग्रेड व एम्बुलेंस को रास्ता नहीं दिया जाता है तो ऐसे वाहन चालकों पर दस हजार रुपए का जुर्माना किया जा सकता है। हैरानी की बात तो यह है कि सीकर में आज तक कार्रवाई नही की गई।


कमेटी मीटिंग आज
यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए बुधवार को यातायात कमेटी की मीटिंग की जाएगी। जिसमें प्रशासन, ं सहित परिवहन विभाग व पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

खुद निकलते हैं पहले
एम्बुलेंस को रास्ता देने की बजाय लोग खुद आगे निकलने की होड़ करते हैं। -विनोद पंडित, एंबुलेंस यूनियन अध्यक्ष


समय रहते नहीं पहुंच पाते मरीज ह्दयाघात के गंभीर मरीज के जीवन को बचाने में पहले 30 मिनट गोल्डन पीरियड के रूप में जाने जाते हैं। यह अफसोसजनक बात है कि यातायात जाम के कारण ह्दय के 50 प्रतिशत मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण बीच में दम तोड़ देते हैं। अस्पताल में समय पर पहुंचने पर तुरंत ब्लॉकेज को दूर करने की दवा दी सकती है। साथ ही ह्दय की पंपिंग कैपेसिटी/ एलवीइएफ कायम रह जाती है - डा. मनीष रूहेला, कार्डियोलॉजिस्ट (डीएम)


एसके अस्पताल से रायजी का कुआं दूरी : 3.4 किमी, समय: 42 मिनट
हैलो एम्बुलेंस, मेरे भाई की तबीयत खराब है। मैं रायजी का कुआं के पास से बोल रहा हूं। आप जल्दी आ जाओ...। करीब दो बजे एम्बुलेंस को चालक दिनेश लेकर जाता है। अस्पताल से निकलते ही कल्याण सर्कि ल के पास ही दो बजकर दस मिनट पर वह जाम में फंस गया। कई बार सायरन भी बजाया। पुलिसकर्मियों ने भी ध्यान नहीं दिया। वहां से निकलने के बाद दो बजकर 25 मिनट पर जाट बाजार में फंसी रही। रेंग-रेंग कर एम्बुलेंस सालासर स्टैंड पर पहुंची। वहां पर भी वाहनों की लाइनें लगी थी। एम्बुलेंस को 42 मिनट रायजी का कुआं तक पहुंचने में लग गए।


रायजी का कुआं से वापस अस्पताल दूरी : 3.4 किमी, समय: 45 मिनट
रायजी का कुआं के पास पहुंचने के बाद पत्रिका टीम रुकने के बाद वापस तीन बजे चली। एंबुलेंस सालासर स्टैंड पर रेंगते हुए पांच मिनट में पहुंची। चांदपोल गेट तक पहुंचने में सात मिनट लगे। एम्बुलेंस 3.12 बजे पहुंची। घंटाघर व सूरजपोल गेट को पार करने में काफी परेशानी हुई। जाट बाजार में एम्बुलेंस 3.20 पर पहुंची। तापडिय़ा बगीची तक पहुंचने में दस मिनट का समय लगा। 3.30 पर एंबुलेंस तापडिया बगीची पहुंची। काफी लंबा जाम लगा हुआ था। रेंगती हुई एम्बुलेंस लुहारू स्टैंड पर तीन बजकर 35 मिनट पर पहुंची। एसके अस्पताल तक 3.45 बजे पहुंची।