
Sikar Politics News: सीकर जिले में पंचायतीराज विभाग से जुड़ा मामला अब सियासी रंग ले चुका है। हाल ही में मंत्री मदन दिलावर के दौरे के दौरान स्वच्छता में लापरवाही को लेकर कई ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को पद से हटा दिया गया था। लेकिन अब महज दो दिन के भीतर ही सांवलोदा धायलान और जसरासर ग्राम पंचायत के प्रशासकों को फिर से बहाल करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस अचानक बदलाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा से जुड़े प्रशासकों को जल्द बहाल कर दिया गया, जबकि अन्य विचारधारा से जुड़े प्रशासकों को अब तक राहत नहीं मिली है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला ने इसे “सियासी ड्रामा” करार देते हुए कहा कि अगर कार्रवाई वास्तव में स्वच्छता के मुद्दे पर हुई होती, तो इतनी जल्दी बहाली नहीं होती।
मामले में एक और मोड़ तब आया जब सामने आया कि बाजौर ग्राम पंचायत के प्रशासक को अभी तक बहाल नहीं किया गया है। विभाग ने दो प्रशासकों को तो वापस पद पर बैठा दिया, लेकिन एक को बाहर रखने से सवाल खड़े हो रहे हैं। इस असमानता को लेकर कई संगठनों ने नाराजगी जताई है और पारदर्शिता की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम में पंचायतीराज विभाग के 11 अधिकारियों को भी निलंबित किया गया था। लेकिन अब तक उनकी जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। इसका असर विभागीय कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। कई पंचायतों में प्रशासनिक काम धीमा पड़ गया है, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीकर का यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरी तरह सियासी मुद्दा बन चुका है। फैसलों में तेजी से हुए बदलाव और चयनात्मक बहाली ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
Published on:
01 Apr 2026 03:59 pm
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