
Photo- AI
Sikar News: राजस्थान के शेखावाटी के सीकर जिले के नीमकाथाना नगर पालिका क्षेत्र के पैराफेरी में शामिल गांवों को बाहर करने की मांग को लेकर ग्रामीणों और किसानों की आवाज तेज होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012 में नगर पालिक क्षेत्र की पैरफेरी में शामिल किए गए अधिकांश गांव आज भी पूरी तरह कृषि आधारित है, बावजूद इसके इन पर आवासीय और व्यावसायिक दरें लागू कर आर्थिक के बोझ बढ़ाया जा रहा है।
जानकारी अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में पैराफेरी सहित करीब 30 गांव शामिल है, जिनमें से ज्यादातर शहर से पांच से 18 किलोमीटर दूर स्थित है। इन गांवों में मुख्य रूप से कृषि गतिविधियां ही संचालित है तथा किसी प्रकार का शहरी विकास या गैर कृषि गतिविधियां नहीं हो रही है।
राजस्थान सरकार के मापदंडों के अनुसार उन्हीं गांवों को पैराफेरी में शामिल किया जाना चाहिए जहां कृषि के स्थान पर आवासीय अथवा अन्य शहरी गतिविधियां बढ़ चुकी हो। ग्रामीणों की मांग की है कि कृषि एवं खनन आधारित गांवों को पैराफेरी क्षेत्र से हटाकर किसानों को राहत दिलाए।
पैराफेरी में शामिल होने के कारण कृषि भूमि पर भी आवासीय डीएलसी दरें लागू हो रही हैं, जिससे किसानों को भूमि संबंधी कार्यों में भारी शुल्क चुकाना पड़ रहा है। जहां स्थानीय स्तर पर कृषि भूमि का 500 रुपए शुल्क में पट्टा जारी होता है, वहीं नगर पालिका क्षेत्र में किसानों से 400 से 500 प्रति वर्गगज के हिसाब से भारी राशि वसूली जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012 में कई गांवों को पैराफेरी में शामिल करते समय उनकी राय नहीं ली गई और न ही उन्हें इसके फायदे-नुकसान बताए गए। उनका कहना है कि पैराफेरी में शामिल होने से गांवों को कोई विशेष लाभ नहीं मिला, बल्कि आर्थिक भार ही बढ़ा है।
जिन गांवों को अलग करने की मांग की गई है, उनमें सिरोही, महावा, मारोला, नीमोद, मंडोली, कैरावली, राणासर, जगतसिंह नगर, गोरधनपुरा, नयाबास, चरणसिंहनगर, खुड़ोलिया, तेतरावाला का बास, भूदोली और गणेश्वर शामिल है। इनको हटाने के लिए सरकार को पत्र भेजा गया है।
पूर्व में सैनिक कल्याण समिति अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर ने 15 गांवों को पैराफेरी से हटाने की सिफारिश की थी, लेकिन अब भी कई ऐसे गांव शामिल है जहां केवल खेती और आंशिक खनन गतिविधियां होती है। ग्रामीणों मांग है कि ऐसे गांवों को भी पैराफेरी से बाहर किया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि आस पास की अन्य नगर पालिकाओं में केवल पांच से सात गांव ही पैराफेरी में शामिल है, जबकि नीमकाथाना में करीब 30 गांवों को शामिल करना अनुचित है।
हमारे गांव में आज भी पूरी तरह कृषि कार्य ही होता है। पैराफैरी में शामिल होने से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। सरकार को कृषि आधारित गांवों को इससे बाहर करना चाहिए।
पैराफेरी क्षेत्र में आने के बाद कृषि भूमि पर भी आवासीय दरें लागू हो रही हैं, जिससे किसानों को जमीन संबंधी कार्यों में परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन को जल्द समाधान करना चाहिए।
नगर पालिका की पैराफेरी में कुल 30 गांव शामिल किए गए हैं। इनमें से 15 गांवों को पैराफेरी से हटाने की अभिशंषा सरकार को भेजी जा चुकी है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द इन गांवों को पैराफेरी से बाहर किया जाए, जिससे ग्रामीणों और किसानों को राहत मिलने के साथ आर्थिक रूप से भी फायदा हो।
Updated on:
20 May 2026 06:27 pm
Published on:
20 May 2026 06:07 pm
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
