
सीकर. सरकारी स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए जिले के भामाशाह अनूठी नजीर पेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना में जिले के भामाशाह प्रदेश में सबसे ज्यादा सहभागिता निभा रहे हैं। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सात साल में जिले के भामाशाहों ने सबसे ज्यादा 27.75 करोड़ की राशि सरकारी स्कूलों में दी है। जिसके चलते सरकार को भी योजना का सबसे ज्यादा 24 प्रतिशत हिस्सा सीकर जिले को देना पड़ा है।
भामाशाहों के सहयोग पर 60 फीसदी देती है सरकार
सरकारी स्कूलों से लोगों का जुड़ाव व जन सहभागिता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 2016-17 में मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना शुरू की थी। योजना में जन सहयोग से 40 प्रतिशत राशि जमा होने पर शेष 60 प्रतिशत राशि सरकार की ओर से जारी की जाती है। जिसका उपयोग विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति स्कूल विकास के लिए करती है।
24 फीसदी बजट सीकर में खर्च
योजना के तहत राज्य सरकार हर साल प्रदेश में 25 करोड़ का बजट जारी करती है। पिछले सात साल में सरकार 175 करोड़ रुपए जारी कर चुकी है। जिनमें से 42.62 करोड़ रुपए अकेले सीकर में जारी हुए हैं। इसकी वजह जिले के भामाशाह ही रहे। जिन्होंने स्कूलों के लिए 27.75 करोड़ रुपए दान कर सरकार के हिस्से के रूप में ये राशि जिले को दिलवाई।
दान देकर नहीं चाहते प्रचार
जिले के भामाशाहों की एक खास बात दान देकर प्रचार नहीं चाहने की भी है। यहां ऐसे बहुत से भामाशाह हैं जो स्कूलों में गुपचुप ही दान कर रहे हैं। उसकी जानकारी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर भी अपडेट नहीं की जा रही।
जिले को यूं मिली सरकारी राशि
2016-17- 209.37 लाख
2017-18- 556.22 लाख
2018-19- 192.62 लाख
2019-20- 433.53 लाख
2020-21- 430.48 लाख
2021-22- 77.58 लाख
2022-23- 1362.92 लाख
यह जिले टॉप
सात साल में सरकारी स्कूलों में जन सहयोग करने में सीकर के बाद झुंझुनूं, चूरू, अलवर व चित्तोडगढ़़ सरीखे जिलों के भामाशाह आगे रहे हैं। पिछले सत्र में ही झुंझुनूं के भामाशाहों ने करीब पांच करोड़ रुपए दानकर करीब 12 करोड़ तथा चित्तोडगढ़़ के भामाशाहों ने साढ़े चार करोड़ रुपए दानकर सरकारी कोष से करीब 11 करोड़ रुपए स्कूलों को दिलाए। जबकि सीकर के भामाशाहों के दान से जिले को 13 करोड़ 62 लाख से ज्यादा राशि प्राप्त हुई।
एक्सपर्ट व्यू
मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना में सीकर जिले के भामाशाहों का योगदान सबसे ज्यादा है। इसकी वजह राजस्थान पत्रिका का 2015 में शुरू किया गया नींव अभियान भी है। जिसकी वजह से आमजन व भामाशाहों में सरकारी स्कूलों के प्रति लगाव बढ़ा और उन्होंने जिले की स्कूलों को चमन करने में अहम भूमिका निभाई। नींव अभियान के बाद सीकर ज़िले के शिक्षकों ने प्रेरक और भामाशाह की भूमिका निभाई है,आज भी प्रदेश में सबसे ज्यादा सुविधाओं वाली स्कूल सीकर जिले में ही मिलेगी।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत
Published on:
03 Aug 2023 12:19 pm
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