
कोरोना के बाद 20 फीसदी महिलाओं का बढ़ा जुड़ाव, चार योजनाओं में सबसे ज्यादा लोन
कोरोना से आधी दुनिया को भी बड़ी सीख मिली है। महिलाओं ने भी अब स्वरोजगार के लिए बड़ी कदमताल शुरू कर दी है। गु्रप में स्वरोजगार शुरू करने का रेकार्ड भी सीकर की महिलाओं के नाम दर्ज है। कोरोना के बाद महिलाओं का जुड़ाव भी बढ़ा है। सीकर में अब समूहों की संख्या 5500 को पार कर गया है। प्रदेश में कोरोना के बाद 50 हजार नए स्वंय सहायता समूहों का गठन भी हुआ है। समूह की सदस्यों की ओर से ब्लू पॉटरी, हैंडमेड बैग और वॉल पेंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, टेबल रनर, ज्वैलरी, पेपर प्रोडक्ट, जूट उत्पाद, लैपटॉप बैग और पर्स, अचार और पापड़, कोटा डोरिया, मीनाकारी, लाख की चूडियाँ, हर्बल हैंडमेड साबुन, सजावटी थाली, अगरबत्ती अप्लीक साड़ी, शहद, मोजरी, अजरख टेक्सटाइल्स और लेदर बैग आदि का प्रदर्शन किया गया। राजीविका से प्रदेश की करीब 32 लाख ग्रामीण महिलाएं जुडी हुई हैं।
केस एक कोई तैयार करवा रही साबुन, किसी की पशु आहार की दुकान
महिलाएं अब स्वरोजार के साथ नए लघु उद्योग भी शुरू कर दिए है। दांतारामगढ़ ब्लॉक के दलपतपुरा गांव की सीतादेवी पिछले साल से चार साल से जुड़ी है। उन्होंने लोन लेकर स्वरोजगार की पहल शुरू की है। श्रीश्याम सीएलएफ की कलस्टर प्रबंधक शशिबाला स्वामी ने बताया कि लिखमा का बास की अनिता वर्मा ने साबुन को लेकर उद्यु उद्योग शुरू किया है। वहीं कमला वर्मा ने पशु आहार का उत्पाद बेचने की शुरूआत की है। उन्होंने बताया कि राजीविका के जरिए कई महिलाओं का आत्मनिर्भर बनने का सपना पूरा हुआ है।
केस दो 50 रुपए से शुरू की बचत, अब खुद का मिनी बैंक
प्रदेश के कई समूहों ने मिनी बैंक की शुरूआत कर सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण भी पेश किया है। जैतारण पंचायत समिति के राबडिय़ावास, बलाड़ा, रास, सेवरिया, एवं कुड़की में रहने वाली महिलाओं ने छोटी-छोटी बचत से 25 लाख का मिनी बैंकिंग कारोबार खड़ा कर दिया। अधिकांश महिलाओं ने कभी स्कूल में जाकर पढ़ाई नहीं की। उन्होंने न केवल स्वयं सहायता समूह के माध्यम से संगठन खड़ा किया। महिलाओं ने 50 रुपए प्रतिमाह की बचत से अपना बचत अभियान शुरू किया था। अब संगठन में आसपास की 5 ग्राम पंचायतों के 11 गांव-ढाणियों में ऐसे 60 स्वयं सहायता समूह बन गए। जिसमें महिला समूह के पास करीब 25 लाख की जमा पूंजी है। महिलाएं अपने समूह की सदस्यों को घरेलू जरूरतों, कृषि, पशुपालन, किराणा, सब्जी की दुकान, तेल, आटा चक्की उद्योग, सिलाई, पार्लर, एवं बेरोजगार बच्चों का कौशल उद्यमिता के लिए लोन भी दे रही है।
केस तीन चुनी संघर्ष की राह, अब बनी नजीर
रूल्याणी निवासी कृष्णा शर्मा परिवार में हुए हादसे के बाद पूरी तरह टूट गई। इसके बाद कृष्णा ने स्वंय सहायता समूह के जरिए प्रशिक्षण लिया। अब ब्यूटी पार्लर का संचालन करती है। इससे अपने परिवार का आसानी से खर्चा चलाती है। खास बात यह है कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए भी महिलाओं को का प्रेरित करती है।
आगे क्या अब महिला निधि के जरिए भी लोन
बजट में मुख्यमंत्री ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला निधि की घोषणा की थी। सरकार का दावा है कि इसमें पहले चरण में 50 करोड़ रुपए का अंशदान देने की घोषणा की है। इसकी वित्तिय स्वीकृति भी जारी हो चुकी है।
किस ब्लॉक में कितने का लोन स्वीकृत
अजीतगढ़ 10.40 लाख
दांतारामगढ 63.28 लाख
धोद 10 लाख
फतेहपुर 39.7 लाख
खंडेला 30 लाख
लक्ष्मणगढ़ 55.01
नेछवा 14.08
नीमकाथाना 22.45
पलसाना 10 लाख
पाटन 18 लाख
पिपराली 49.92 लाख
श्रीमाधोपुर 54.36 लाख
इनका कहना है
सीकर जिले की महिलाएं स्वरोजगार की तरफ बेहतर तरीके से आगे बढ़ रही है। विभिन्न योजनाओं के जरिए महिलाओं के समूहों को लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाएं अपना स्वरोजगार भी शुरू कर पा रही है। कई समूहों के उत्पादों को राज्यस्तर पर पहचान भी मिली है।
अर्चना मौर्य, जिला परियोजना प्रबंधक, राजीविका
महिला अधिकारिता व राजीविका की ओर से महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसका परिणाम अब लगातार सामने आ रहे है। महिलाओं की साक्षरता दर बढऩे का फायदा भी मिल रहा है।
अनुराधा सक्सेना, सहायक निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग
Published on:
14 Nov 2022 11:32 am
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