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UPSC Result: करगिल युद्ध में पैर गंवाने वाले पिता बने प्रेरणा, सिविल सर्विस परीक्षा में 9वीं रैंक हासिल कर अब बेटा करेगा देश की सेवा

सीकर. सपना बड़ा होना चाहिए। उसे पूरा करने का उतना ही बड़ा संकल्प भी होना चाहिए। तभी सफलता का शिखर मिलता है। ये फलसफा है यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 9वीं रैंक हासिल करने वाले 24 वर्षीय प्रीतम कुमार चौधरी का।

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सीकर

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Sachin Mathur

May 30, 2022

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सीकर. सपना बड़ा होना चाहिए। उसे पूरा करने का उतना ही बड़ा संकल्प भी होना चाहिए। तभी सफलता का शिखर मिलता है। ये फलसफा है यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 9वीं रैंक हासिल करने वाले 24 वर्षीय प्रीतम कुमार चौधरी का। जिन्होंने पहले तो आईआईटी रोपड़ से इलेक्ट्रिकल्स में इंजीनियरिंग की। बाद में जब करगिल युद्ध में पैर गंवा चुके पिता ने आईएएस बनकर देश सेवा करने राह सुझाई तो उनके सपने को ही अपना सपना बनाकर उसे पूरा करने की जिद ठान ली। जहन में ऐसा जज्बा रखा कि बड़ी कंपनियों के बड़े पैकेज व आरएएस सरीखी परीक्षाओं का मोह छोड़ उनके लिए कभी आवेदन तक नहीं किया। बस दिल्ली में रहकर लगातार यूपीएससी की ही तैयारी की। इस बीच दो प्रयासों में इंटरव्यू तक पहुंचकर सफलता से चंद कदम दूरी से लौटने का दंश भी सहा। पर पहाड़ सा हौंसला रखने वाले सैनिक पिता के बेटे ने भी हार नहीं मानी और आखिरकार तीसरे प्रयास में देश में इतिहास रच दिया। यूपीएससी में चयन के की सूचना के साथ ही उनके घर में बधाई देने वालों का तांता लग गया।

पिता ने करगिल में की देश सेवा, गंवावा पांव
प्रीतम के पिता सुभाषचंद बतौर सैनिक देश की सेवा कर चुके हैं। करगिल युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना बांया पैर गंवा दिया था। जिसके बाद सेवानिवृति मिलने पर उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग में हो गई। नीमकाथाना के सीबीईओ कार्यालय में वे अब एलडीसी के पद पर नियुक्त है। जिनके मन में देश सेवा का पल रहा जज्बा ही प्रीतम का हौंसले के रूप में काम आया। दो बहनों के छोटे भाई प्रीतम की मां सुमित्रा गृहणी है।

गांव से शुरू की पढ़ाई, ठुकराई नौकरी
12 दिसंबर 1997 को जन्मे प्रीतम ने कक्षा एक से चार तक की पढ़ाई कोटड़ा गांव की एक निजी बालाजी स्कूल में की। कक्षा 5 व 6 नीमकाथाना की सेम स्कूल में पढऩे के बाद कोटपूतली की निजी स्कूल में प्रवेश लिया। जहां 12वीं तक की पढ़ाई के बाद 2014 में प्रीतम का चयन आईआईटी रोपड़ में हो गया। बकौल प्रीतम आईआईटी के बाद उन्हें एक कंपनी में जॉब का ऑफर भी मिला। पर इंटरव्यू से पहले ही उनका मन बदल गया।

कोरोना में घर में बाधा आई तो किराये के कमरे में की पढ़ाई
यूपीएससी के साथ प्रीतम की कोरोना काल ने भी परीक्षा ली। इस दौरान गांव आने पर उन्हें अपनी पढ़ाई में बाधा होने लगी। जिसके चलते उन्होंने नीमकाथाना में एक कमरा लेकर उसमें पढऩा शुरू किया। करीब डेढ साल तक प्रीतम ने वहीं पढ़ाई की।