
UPSC Result: हमारे यूथ की सिविल सेवा से लग गई ‘प्रीत’, फिर टॉप 10 में हमारी रैंक
सीकर. इंजीनियरिंग और मेडिकल के साथ प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं में सिरमौर रहने वाले सीकर के यूथ की अब सिविल सेवा से प्रीत लग गई है। किसी को तीन तो किसी को पांच बार असफलता मिली। लेकिन हार मानकर सपनों का पीछ़ा नहीं छोड़ा। सोमवार को सिविल सेवा का परिणाम जारी हुआ तो हमारे होनहार देशभर में चमक उठे। नीमकाथाना इलाके के कोटड़ा गांव निवासी प्रीतम कुमार ने नवीं रैेंक हासिल कर सीकर का देशभर में गौरव बढ़ा दिया। खास बात यह है कि हमारे यूथ की मेहनत के दम पर रैकिंग में भी लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2006 के सिविल सेवा परिणाम के बाद इस बार सीकर के युवा प्रीतम ने सिंगल डिजिट तक रैंक पहुंचाई है। इससे पहले सीकर निवासी गौरव गोयल भी यूपीएससी परिणाम में दसवीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद इस परीक्षा में सीकर के लाल ने नवीं रैेंक हासिल की है। इसके अलावा गौरव गोयल ने महज 22 साल की आयु में दसवीं रैंक हासिल कर शिक्षानगरी के साथ राजस्थान को चर्चा में ला दिया था। इस बार प्रीतम ने 24 साल की आयु में नवीं रैंक हासिल कर सीकर का मान बढ़ाया है। गांव-ढाणियों में सफलता का जश्न रहा। इंजीनियरिंग सेक्टर के युवाओं का सिविल सेवा में सफलता का ग्राफ बढ़ रहा है। 10साल में 37 युवा सिविल सेवा के साथ राजस्थान प्रशासनिक सेवा में बाजी मार चुके है।
हर असफलता से सीखा, इस बार 404वीं रैंक मिलीरामकृष्ण सहारण ने बढ़ाया सीकर का मान
सीकर. यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो मुसीबत खुद राह से हट जाती है। यह साबित कर दिखाया है कि पिपराली रोड निवासी रामकृष्ण सहारण ने। उन्होंने सिविल सेवा के परिणाम में 404 वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले सहारण का भारती वन सेवा में चयन हो गया था। लेकिन उनका लक्ष्य सिविल ही था इसलिए वह एक साल का अवकाश लेकर सिविल सेवा की तैयारी में जुटे रहे। खास बात यह है कि चार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने सपनों का पीछा करना नहीं छोड़ा। पत्रिका से खास बातचीत में सहारण ने बताया कि एनआईटी तमिलनाडू से बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद नामी कंपनी में प्लेसमेंट भी हो गया। लेकिन यहां पहुंचकर लगा कि समाज के लिए कुछ करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सिविल सेवा को चुना। उन्होंने बताया कि हर बार की असफलता से बहुत सीखा। हर बार की कमियों को दूर कर तैयारी में जुटा रहा। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बड़े धैर्य की आवश्यकता होती है। उनका कहना है कि खुद पर भरोसा रखकर वह इस मुकाम पर पहुंच सके है। उन्होंने दसवीं व बारहवीं कक्षा नवजीवन साइंस स्कूल से 90 फीसदी अंकों से पास की। उन्होंने सफलता का श्रेय पिता भागीरथ सहारण व मां बनारसी देवी एवं शिक्षक शंकर बगडिय़ा को दिया है। संस्था निदेशक अनिता चौधरी ने बताया कि इससे पहले संस्थान के सोहनलाल ने भी सिविल सेवा के परिणाम में 201 वीं रैंक हासिल कर मान बढ़ा चुके है। वहीं विक्रम सिहाग, रणवीर बगडिय़ा व सुरेश मीणा भी सिविल सेवा व आईआरएस परीक्षाओं में बाजी मार चुके है। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद 50 विद्यार्थियों को सिविल व राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
नीमकाथाना. सपना बड़ा होना चाहिए। उसे पूरा करने का उतना ही बड़ा संकल्प भी होना चाहिए। तभी सफलता का शिखर मिलता है। यह फलसफा है यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर नवीं रैंक हासिल करने वाले 24 वर्षीय प्रीतम कुमार चौधरी का। जिन्होंने पहले तो आईआईटी रोपड़ से इलेक्ट्रिकल्स में इंजीनियरिंग की। बाद में जब करगिल युद्ध में पैर गंवा चुके पिता ने आईएएस बनकर देश सेवा करने राह सुझाई तो उनके सपने को ही अपना सपना बनाकर उसे पूरा करने की जिद ठान ली। जहन में ऐसा जज्बा रखा कि बड़ी कंपनियों के बड़े पैकेज व आरएएस सरीखी परीक्षाओं का मोह छोड़ उनके लिए कभी आवेदन तक नहीं किया। बस दिल्ली में रहकर लगातार यूपीएससी की ही तैयारी की। इस बीच दो प्रयासों में इंटरव्यू तक पहुंचकर सफ लता से चंद कदम दूरी से लौटने का दंश भी सहा। पर पहाड़ सा हौंसला रखने वाले सैनिक पिता के बेटे ने भी हार नहीं मानी और आखिरकार तीसरे प्रयास में देश में इतिहास रच दिया।
पिता ने करगिल में की देश सेवा,गंवाया पांव
प्रीतम के पिता सुभाषचंद बतौर सैनिक देश की सेवा कर चुके हैं। करगिल युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना बांया पैर गंवा दिया था।जिसके बाद सेवानिवृति मिलने पर उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग में हो गई। नीमकाथाना के सीबीईओ कार्यालय में वे अब एलडीसी के पद पर नियुक्त है। जिनके मन में देश सेवा का पल रहा जज्बा ही प्रीतम का हौंसले के रूप में काम आया। दो बहनों के छोटे भाई प्रीतम की मां सुमित्रा गृहणी है।
गांव से शुरू की पढ़ाई, ठुकराई नौकरी
12 दिसंबर 1997 को जन्मे प्रीतम ने कक्षा एक से चार तक की पढ़ाई कोटड़ा गांव की एक निजी बालाजी स्कूल में की। कक्षा 5 व 6 नीमकाथाना की सेम स्कूल में पढऩे के बाद कोटपूतली की निजी स्कूल में प्रवेश लिया। जहां 12वीं तक की पढ़ाई के बाद 2014 में प्रीतम का चयन आईआईटी रोपड़ में हो गया। बकौल प्रीतम आईआईटी के बाद उन्हें एक कंपनी में जॉब का ऑफर भी मिला। पर इंटरव्यू से पहले ही उनका मन बदल गया।
कोरोना में घर में बाधा आई तो किराए के कमरे में की पढ़ाई
यूपीएससी के साथ प्रीतम की कोरोना काल ने भी परीक्षा ली। इस दौरान गांव आने पर उन्हें अपनी पढ़ाई में बाधा होने लगी। जिसके चलते उन्होंने नीमकाथाना में एक कमरा लेकर उसमें पढऩा शुरू किया। करीब डेढ साल तक प्रीतम ने वहीं पढ़ाई की। परिणाम आने के बाद जैसे ही परिवारजनों को सूचना लगी तो उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रीतम को उनके घर गांव कोटड़ा में बधाई देने के लिए रिश्तेदारों व ग्रामीणों का तांता लगा रहा।
प्रतीक ने हासिल की 613 वीं रैंक
गांव कदमा का बास निवासी प्रतीक गहलोत ने भारतीय प्रशासनिक सेवा 2021 में 613 वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने दूसरे प्रयास में सफलता का परचम लहराया है। प्रतीक ने आईआईटी बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर आईओसीएल में फील्ड ऑफिसर की सेवा छोड़कर वर्ष 2017 से भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2018 तथा 2019 की परीक्षाओं में साक्षात्कार तक पहुंचे लेकिन चयन नहीं हुआ। कभी हार नहीं मानने वाले प्रतीक ने चौथे चांस में वर्ष 2020 की परीक्षा में 651 वी रैंक हासिल की। फिलहाल वह आईपीएस का प्रशिक्षण ले रहे है। इनके पिता नरसाराम गहलोत जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण, धोद में मंत्रालयिक कैडर में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत है। माता विनोद गहलोत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कासली में अध्यापिका के पद पर कार्यरत है।
गुहाला के लाल ने 446 वीं रैेंक हासिल कर बढ़ाया मान
चला. गांव गुहाला के लाल मनीष अग्रवाल पुत्र सुभाष अग्रवाल ने यूपीएससी परीक्षा में बाजी मारी है। मनीष ने अपनी सफतला का श्रेय अपने प्रधानाचार्य पिता सुभाष अग्रवाल व माता अनीता अग्रवाल को दिया है। मनीष ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की इस परीक्षा में 446 रैंक के साथ पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त की है। इस दौरान दादा गिरधारीलाल सुखावाला की अगुवाई में राकेश, मुन्ना, सुनील, नितेश चौधरी, कन्हैयालाल पटवारी, पंचायत समिति सदस्य चौथमल सैनी, रमाकांत शर्मा मौजूद थे।
बैरास के विकास को 221वीं रैंक
लक्ष्मणगढ़. संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से सोमवार को घोषित परीक्षा परिणाम में लक्ष्मणगढ उपखण्ड के बैरास ग्राम के होनहार युवा विकास ने सफलता प्राप्त की है। विकास ने परीक्षा में 221वीं रैंक प्राप्त की है। सेवानिवृत्त शिक्षक रामकुमार रूहेला के पुत्र विकास फिलहाल कमांडिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत है। इससे पहले बैंक ऑफ इंडिया में प्रबंधक के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा सीकर में हासिल की तथा आईएएस की कोचिंग दिल्ली में ली।
रोहन केशान ने 387 रैंक के साथ पूरा किया दादा का सपना
फतेहपुर. कस्बे के प्रमुख व्यवसायी सुनील केशान के पुत्र रोहन केशान ने आइएएस परीक्षा में 387वीं रैंक प्राप्त कर मान बढ़ाया है। रोहन कस्बे का पहला विधार्थी है जिसने आईएएस में सफलता प्राप्त की। सीए की परीक्षा के बाद ही रोहन के दादा परमेश्वर लाल केशान ने उसे आईएएस की तैयारी के लिए प्रेरित किया। रोहन ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। रोहन ने सीए फाउन्डेशन परीक्षा में भी आल इंडिया में नवीं रैंक हासिल की थी। रोहन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा परमेश्वर लाल केशान को समर्पित की।
इंजीनियरिंग सेक्टर के युवाओं का बढ़ा ग्राफ
सीकर के यूथ की आगे बढ़ने की ललक को सिविल सेवा के परिणाम के जरिए पूरे देश ने देखा है। वन सेवा में चयन के बाद भी हमारा युवा अपनों सपनों के लिए जुटा रहा। दूसरी तरफ आईआईटी में चयन के बाद भी सीकर के प्रीतम ने सिविल सेवा के सपने बुने। इंजीनियरिंग सेक्टर के युवाओं के सिविल सेवा में जाने का ग्राफ सबसे ज्यादा बढ़ा है। पिछली तीन भर्तियों के राजस्थान प्रशासनिक सेवा व सिविल सेवा के परिणाम को देखे तो हमारे युवाओं की धाक लगातार मजबूत हो रही है।
शंकर बगडिय़ा, एक्सपर्ट, सीकर
Published on:
31 May 2022 10:37 am
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
