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333 वर्ष का हुआ सीकर: ऐसा सन्नाटा कभी नहीं देखा

सीकर का 334वां स्थापना दिवस आज

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सीकर

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Gaurav Saxena

Apr 02, 2020

फोटो: जगदेव सिंह पवार  ड्रोन सहयोग: जितेन्द्र सिंह चौहान  कंटेंट: सचिन माथुर

फोटो: जगदेव सिंह पवार ड्रोन सहयोग: जितेन्द्र सिंह चौहान कंटेंट: सचिन माथुर

मैं सीकर..! आज 333 बरस का हो गया। अपने जन्म से अब तक मैंने मुगल साम्राज्य, ब्रिटिश शासन, स्वतंत्रता आंदोलन, आजादी और इसके बाद लोकतंत्र देखा। हर्ष से भरे पर्व देखे, तो रियासती संघर्ष भी देखे। मेलों का कोलाहल, तो पीड़ा से भरा 56 का अकाल भी देखा। लहलहाती फसलें, तो उजड़ते चमन देखे। प्रेम, भाईचारा व सौहार्द के साथ अनगिनत हड़ताल, बंद व महामारी का दंश भी देखा-झेला। लेकिन, सुख- दुख की किसी भी घड़ी मेंं मुझे सूनापन कभी नहीं भाया। गली-कूचों में उधम मचाते बच्चों का कलरव, यार दोस्तों की गपशप, मेल जोल भरी हंसी- ठिठोली व सडक़ों की चहलकदमी मेरी अनादि आदत रही। पर इतिहास में पहली बार मुझे शहर का ऐसा सन्नाटा अच्छा लग रहा है। क्योंकि इस खामोशी के पीछे लोगों में मेरी खुशी की चिंता छिपी है। वह मुझे आबाद व खुशहाल देखना चाहते हैं। उन्हें पता है कि संवत 1972 की महामारी में हजारों बिलखते-तड़पते-मरते अपनों का वो खौफनाक मंजर मेरी आंखों से अब तक ओझल नहीं हुआ है। मुझे छलनी कर दफनाए गए मेरे अपनों के ही शवों के घाव मेरे सीने में अब भी हरे हैं। मुझे गर्व है कि मेरे अपने घर में रहकर सभ्य व समझदार नागरिक होने का कर्तव्य और जरूरतमंदों की मदद कर मानव धर्म को भी दिखा-निभा रहे हैं। मुझे नाज कोरोना मरीजों के उपचार में जुटे मेरे चिकित्सक, सडक़ों पर सेवा दे रहे पुलिस जवान, स्वच्छता में जुटे सफाईकर्मी सपूतों पर भी हैं, जो संकट की इस घड़ी में भी अपनी सेवा के संकल्प से नहीं डिगे हैं। मुझे यकीन है कि प्रकोप के पीछे प्रकृति की छिपी मानवता की पुकार सुनते हुए आप आगे भी अपने संवैधानिक कर्म के साथ मानव धर्म निभाते रहेंगे। ताकि मेरे अगले जन्म दिवस को हम उल्लास व उमंग से मना सके। यही मेरे इस जन्म दिवस का उपहार भी होगा।


इतिहास के पन्नों से...
विक्रम संवत 1744 ईस्वीं सन 1687 में हुई थी सीकर की स्थापना।
मुगल बादशाह औरंगजेब के शासन में दूजोद के राव दौलत सिंह ने रामनवमी पर वीर भान का बास के रूप में रखी थी नींव।
राव दौलत सिंह के बाद दस राजतंत्रीय शासकों ने 267 साल किया राज।
अंतिम रावराजा कल्याण सिंह ने 15 जून 1954 को लोकतंत्र के सुपूर्द किया राजमुकुट।
सन 1938 में जयपुर रियासत से विवाद में तीन महीने से ज्यादा समय बंद रहा था सीकर।