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इस संकट में छोटे दुकानदार बने आम अवाम के साथी

छोटी दुकान, दिल बड़ा: लॉकडाउन में बड़ी कम्पनियों ने बनाई ग्राहकों से दूरी, छोटे दुकानदार आगे बढकऱ कर रहे हैं मदद

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सीकर

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Gaurav Saxena

Apr 12, 2020

इस संकट में छोटे दुकानदार बने आम अवाम के साथी

इस संकट में छोटे दुकानदार बने आम अवाम के साथी

जरा सोचें, संकट की इस घड़ी में कौन हमारा साथ निभा रहा है? गली के बाहर नुक्कड़ पर पंसारी की दुकान वाला, वो सब्जी के ठेले वाला या वह किराना स्टोर वाला तो अब वाट्स अप पर लिस्ट भेजते ही घर के दरवाजे तक पूरा राशन भी पहुंचा रहा है। दरअसल, यही लोग इस संकट में हमारे साथी की भूमिका निभा रहे हैं। कहते भी हैं, मित्र की पहचान संकट की घड़ी में ही होती है। विपदा के इस दौर में कहां हैं वे बड़ी ऑनलाइन मल्टीनेशनल और ई-कॉमर्स कंपनियां...? अच्छे समय में बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुनाफा कमाती हैं और संकट में गायब हो जाती हैं। जैसे ही लॉकडाउन खत्म होगा यह कंपनियां फिर सक्रिय हो जाएंगी और छोटे दुकानदार और असंगठित कामगार फिर से भुला दिए जाएंगे। लेकिन प्रतिकूल हालातों में साथ देने वाला ही है हमारा रियल इंडिया...। इसी रियल इंडिया को समर्पित है हमारी यह सीरीज-संकट के साथी...। जिसमें पत्रिका आपको रूबरू करवाएगा ऐसे ही रियल हीरोज से जो संकट में हमारे साथी बने हुए हैं। साथ ही, इनकी आवाज भी बनेगा यह मंच।

सीकर. वाकई इन छोटे दुकानदारों का दिल बड़ा है। जरूरत का सारा सामान न केवल यह उपलब्ध करवा रहे हैं बल्कि पैसे कम है या नहीं है तो उधार में भी राशन दे रहे हैं। इस समय आम मध्यम वर्गीय परिवारों में मासिक वेतन इस माह या तो मिला नहीं या फिर कहीं 30 प्रतिशत तो कहीं 50 प्रतिशत सैलेरी मिली है। यह छोटी सी नकद राशि दवा, दूध इत्यादि के लिए ही पूरी नहीं पड़ रही। ऐसे में गली-मौहल्लों के छोटे दुकानदार इस संकट की घड़ी में लोगों के साथी बने हैं। दधीची नगर में ऐसे ही एक दुकानदार है उमेश सैनी। यह अपनी दुकान से मौहल्ले के लोगों को जरूरत का सारा सामान उपलब्ध करवा रहे हैं। साथ ही आवश्यकता पडऩे पर उधार भी रख रहे हैं। ताकि लोगों के घरों में चूल्हे जल सके। मौहल्ले में अमूमन सभी घरों के नजदीक ही इनकी दुकान पड़ती है, लेकिन कोई दुकान पर न आ सके, तो फोन पर आर्डर लेकर सामान उसके घर तक भी पहुंचाने का काम करते हैं। बकौल उमेश, इस समय मुनाफा कुछ कम है। मुझे खुद को ज्यादा भाव देकर बड़ी दुकानों से सामान लाना पड़ता है, लेकिन यहां मौहल्ले में बरसों की साख है। सभी जान-पहचान के हैं। संकट के समय यदि उनकी मदद नहीं की, तो फिर क्या इंसानियत रही। मुनाफा इस संकट के टलने के बाद कमा लेंगे।

वाट्सऐप पर लिस्ट लेकर घर-घर राशन पहुंचा रहा है दुकानदार
खाटूश्यामजी. पहले जहां इलाके के लोग छोटी से लेकर बड़ी खरीदारी के लिए शहरों की तरफ जाते थे, लॉकडाउन ने उनकी राहें छोटी दुकानों की तरफ मोड़ दी। मदनी गांव में एक किराणा स्टोर संचालक आशीष कुमावत प्रशासनिक गाइडलाइन का पूरा पालन करते हुए आमजन की मदद में जुटे हैं। आशीष ने बताया कि लॉकडाउन को देखते हुए अब वाट्सएप के जरिए ग्रामीणों के घरों पर सामान पहुंचाने की पहल शुरू की है। दुकानदार ने अपनी दुकान के बाहर सामान की रेट लिस्ट और घर पर सामान पहुंचाने के लिए वाट्सएप नंबर भी लिख दिए हैं।

लोगों को जरूरत का सामान करवा रहे है मुहैया
नीमकाथाना. गली-मौहल्लों में स्थित छोटी-छोटी दुकानों पर जरुरत का सामान खरीदने के लिए जहां आमजन का ध्यान नहीं जाता था, अब लॉकडाउन की इस संकट की घड़ी में छोटे दुकानदार ही आमजन के साथी बने हुए हंै। खेतड़ी मोड़ स्थित प्रभात स्टोर के संचालक बंशी गुप्ता ने बताया कि लोगों को राशन का सामान उपलब्ध कराना पहला फर्ज है। दुकानदार अनिल कुमार ने बताया कि इस संकट के दौर में लोगों का साथ नहीं छोड़ सकते है।

आज इनकी मदद बेमिसाल
खंडेला. कस्बे के अधिकांश लोग पहले राशन सामग्री लाने के लिए सीकर या जयपुर की दौड़ लगाते थे पर लॉकडाउन में कस्बे के छोटे किराणा व्यापारी ही अब लोगों को राहत दे रहे हैं। जहां कभी छोटी दुकानों की गांव के लोग अनदेखी किया करते थे आज उन्हीं दुकानों के भरोसे उनके घर चल रहे हैं।लॉक डाउन में लोगों का शहरों में जाना बंद हो गया। अब ये छोटी दुकानों वाले ही उन्हें खाद्य सामग्री उपलब्ध करवा रहे है। आज वो छोटी दुकान वाले ही उनके मसीहा बने हुए है।