
सीकर. शहर में युवाओं की सकारात्मक सोच, सेवा भाव और संजीदगी की नायाब बानगी सामने आई है। शहर में स्टूडेंट्स का एक ऐसा गु्रप सामने आया है, जो पढऩे की उम्र में ही जरुरतमंद लोगों की जिंदगी को आसान बनाने में जुटा है। अंधेरे में जिंदगी जीने वाले लोगों को उजालों की राह दिखाना छोटी सी उम्र में ही उनका मकसद बन गया है। 16 से 22 वर्ष तक की उम्र के सदस्यों वाले इस गु्रप में इंजीनियरिंग से लेकर सीए और लॉ से लेकर बीए तक के स्टूडेंट है। जिनके लिए सेवा का काम कॅरियर जितना ही अहम और जीवन का हिस्सा बन गया है। सौगात नाम का यह गु्रप कच्ची बस्ती के गौणधारा के बच्चों को शिक्षा के जरिए ं मुख्यधारा में लाने की कोशिशों के साथ अपने सेवा भाव को गति दे रहा है। इनके काम की सबसे खास बात भी उनकी आत्मीयता, सेवा की लगन और पीडि़त- प्रताडि़तों के लिए कुछ कर गुजरने की ललक है। जिसे हाउसिंग बोर्ड स्थित कच्ची बस्ती की करणी स्कूल में आजकल हर दिन देखा जा सकता है। सेवाभाव उनकी जुबान से ज्यादा उनकी आंखों और दिल की गहराईयों तक में समाया दिखता है।
16 से 22 वर्ष की उम्र, कोई बीए,एमबी तो कोई कर रहा सीए
गु्रप में सारे सदस्य 16 से 22 वर्ष तक के युवा और स्टूडेंट ही है। मसलन तन्वी पारीक एलएलबी स्टूडेंट है। निखिल बियानी इंजनियरिंग कर रहा है। राघ्वी मिश्रा बीकॉम, सौरभ बियानी, शिवम गोयनका, गर्वित, कार्तिक, हर्षवर्धन , निकुंज, आशीष जैन और अनिरुद्ध सीए, प्रनित एमबीए, मेघा बीजेएमसी और इशा बीकॉम के साथ एसएससी की तैयारी कर रही है। जानवी ने सीनियर सैकंडरी परीक्षा पास की है और इना इंग्लिश और आशु भूगोल से बीए कर रही है।
जरुरतमंदों के साथ बांटते हैं खुशी
सौगात गु्रप का लक्ष्य हर जरुरतमंद के लिए काम करना है। गु्रप सदस्य सौरभ ने बताया कि उनका ग्र्रुप गरीब बच्चों की शिक्षा के साथ असहाय और निराश्रित लोगों की सेवा और उनकी खुशी के कार्यों से भी जुड़ा है। गु्रप के सदस्य त्यौहार के मौकों पर जरुरतमंद लोगों को मिठाई व इक_ा करके कपड़े बांटते हैं। भविष्य में गु्रप को रजिस्टर्ड करवाकर वे अपने काम का विस्तार करना चाहते हैं।
सौगात देने के लिए बना ‘सौगात’
गु्रप की शुरुआत दो साल पहले हुई थी। बकौल तन्वी जब भी दोस्त साथ होते थे, तो पढऩे के साथ कुछ अलग करने पर उनकी चर्चाएं चलती थी। उन्हें लगता था कि उनके पास तो सबकुछ है लेकिन बहुत से कमजोर वर्ग है जो मोहताज है और उन्हें खुशियों की सौगात दी जानी चाहिए। इसी सौगात शब्द के साथ उन्होंने अपना गु्रप बनाया और 2016 की दिवाली जरुरतमंद लोगों के साथ मनाकर काम शुरू कर दिया। तभी से यह गु्रप कमजोर वर्ग को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने से लेकर हर संभव मदद करने में जुटा रहता है।
ज्ञान सबसे जरूरी, इसलिए शिक्षा को ज्यादा अहमियत
गु्रप सदस्य कच्ची बस्ती के बच्चों को सुबह दो से तीन घंटे तक पढ़ाते है। जिसमें वे उन्हें नए तरीकों से अलग अलग विषय की तैयारी कराते हैं। कच्ची बस्ती के बच्चों को पढ़ाने को लेकर उनका कहना है कि दुनिया में ज्ञान ही ऐसी चीज है, जिसे छीना नहीं जा सकता और जिसका उपयोग कहीं भी किया जा सकता है। यही वजह है कि वे गरीब बच्चों के लिए शिक्षा को सबसे जरूरी को मानते हुए इस काम को सबसे ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
पढ़ाते- खिलाते हैं, साथ में खाना भी खाते हैं
करणी स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पहले से भी चल रही थी। लेकिन, इन स्टूडेंट्स के आने के बाद पढ़ाई का माहौल पहले से भी बेहतर और मनोरंजक हो गया है। दरअसल यह स्टूडेंट्स कच्ची बस्ती के बच्चों के बीच बैठकर हर एक की पढ़ाई पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई के स्तर में काफी सुधार आ रहा है। उस पर यह तरह तरह के खेल खिलाकर बच्चों का मनोरंजन करते हैं। खाने-पीने की चीजें वहीं बनाकर उनके साथ खाकर मौज- मस्ती भी करते हैं। जिन सबके चलते बस्ती के बच्चों में पढ़ाई को लेकर अलग तरह की दिलचस्पी भी देखने को मिल रही है।
Published on:
23 Apr 2018 04:37 pm
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