
इसलिए बेरोजगार हुए हजारों लोग
फ्लेक्स प्रिंटिंग और वाल पेटिंग को बिसराया, पहले नहीं मिलता था खाने को समय, अब बैठे ठाले
जिले में फ्लेक्स प्रिटिंग की २० मशीन बनी शोपीस
सीकर. विधानसभा चुनाव में अब प्रचार की कमान सोशल मीडिया ने थाम ली है। चुनाव हाइटेक हुआ तो प्रचार के तौर- तरीके भी बदल गए। पार्टियों ने सोशल मीडिया के जरिए ही अपने कार्यक्रमों की सूचना देनी शुरू कर दी है। आधुनिक दौर और संचार क्रान्ति के चलते फ्लेक्स प्रिंटिंग और वॉल पेंटिंग को बिसरा दिया है। इसका नतीजा है कि कारोबारी या कारीगर इस बार पिछले एक माह से निठल्ले बैठे हैं। कई ने तो पेंटिंग का धंधा बंद करके दूसरे काम शुरू कर दिए। पहले जहां चुनाव की घोषणा होते ही फ्लेक्स प्रिंटिंग और वॉल पेंटिंग से जुड़े लोगों को एक माह पहले ही अग्रिम राशि देकर बुक कर लिया जाता था इससे जुडे लोगों को एक माह तक देर रात तक काम करना पड़ता था।
पार्टियों ने बनाए प्रकोष्ठ
चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों ने संचार क्रांति के जरिए चुनाव प्रचार को तवज्जो दे रहे हैं। बडे राजनीतिक दलों ने तो नए तौर-तरीके से प्रचार के लिए अलग से प्रकोष्ठ तक बनाए हैं। फ्लेक्स कारोबारियों ने बताया कि चुनाव आयोग ने प्रचार के दौरान बैनर, होर्डिंग्स आदि पर रोक लगाई तो राजनीतिक दलों का रुझान प्रचार के दूसरे तरीकों की ओर गया। इसमें उनको कम समय में ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इंटरनेट, मोबाइल एसएमएस, टीवी आदि ज्यादा सटीक लगे।
तररीका बदल गया
दो दशक पहले चुनाव में झंडा, बैनर और वॉल पेंटिंग आदि का बोलबाला रहता था। इस बार आचार संहिता के नाम पर पार्टियों ने प्रचार का तरीका ही बदल दिया है। अब पार्टियों के प्रत्याशी की बजाए निवेदक के रूप में केवल व्यक्तिगत प्रिटिंग करवाई जा रही है। इससे २० से ज्यादा प्रिटिंग प्रेस वाले कारोबारी निठल्ले बैठे हैं।
रमजान पेंटर, सीकर
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Published on:
30 Nov 2018 06:59 pm
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