
सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पड़ा भारी, कइयों की जिंदगी में छाया अंधेरा
देवेंद्र शर्मा ‘शास्त्री’, सीकर.
सूर्य ग्रहण ( Solar eclipse ) का राशियों ( Zodiac Signs ) पर असर समय के अनुसार आएगा, लेकिन ग्रहण को नंगी आंख ( Solar Eclipse Seen Bye nakedEye ) से देखने वालों की आंखों पर सूर्य की किरणों की तीव्रता और तरंगों ने तत्काल असर दिखा दिया है। सूर्यग्रहण को सीधे देखने वालों को बीच में काला धब्बा दिखाई देने लगा तो किसी को किताब की लाइनें आड़ी-तिरछी दिखाई दे रही हैं। स्थिति यह है कि शहर के आंखों के एक अस्पताल में सोमवार को महज एक घंटे में सात विद्यार्थी ऐसी समस्या लेकर पहुंचे। बिना सुरक्षा उपाय के सूर्यग्रहण देखने पर इनकी आंखों के रेटिना पर दुष्प्रभाव पड़ा है। शहर के कई नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास इस तरह के मामले सामने आए हैं।
हरलाल, सपना और श्रीराम तो महज उदाहरण है। सीकर का आदित्य, सिंगरावट का कृष्ण कुमार आदि बच्चे और विद्यार्थियों की आंखें सूर्यग्रहण की किरणों की चपेट में आ चुकी हैं। बच्चों ने पहले तो परिजनों को इसकी जानकारी ही नहीं दी, समस्या बढऩे पर जब उन्हें अस्पताल लाया गया तो स्थिति का खुलासा हुआ। पत्रिका ने शहर के अन्य नेत्र विशेषज्ञों से बात की तो उनके पास भी इस तरह के मरीज पहुंचे हैं।
अब सिर्फ काले धब्बे
मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रही सपना कुमावत ने पढ़ाई के बीच कई बार ग्रहण को देखा। अब उसे बीच में काला धब्बा दिखाई दे रहा है। पिछले चार दिन से इस समस्या से जूझ रही सपना को परिजन सोमवार को अस्पताल लेकर पहुंचे तो पता चला कि सूर्य की तेज किरणों के कारण उसका रेटिना प्रभावित हो गया है।
ग्रहण देखते ही अंधेरा
शहर की एक डिफेंस एकेडमी में सेना में जाने की तैयारी कर रहे 20 वर्षीय हरलाल को सूर्यग्रहण की जानकारी नहीं थी। वह छात्रावास में पढ़ाई कर रहा था। इसी बीच अंधेरा सा होने पर उसने सूर्य की तरफ देखा। इसके कुछ समय बाद ही उसकी आंखों में दर्द होने लगा और अंधेरा सा छा गया। बकौल हरलाल अब उसे दीवार पर लिखे बड़े अक्षर भी कई बार दिखाई नहीं देते। बार-बार यही पूछ रहा था कि सेना भर्ती होने में उसे परेशानी तो नहीं आएगी।
दूसरी आंख पर भी लगा ग्रहण
खंडेला क्षेत्र के श्रीराम की एक आंख की रोशनी बचपन में मोतियाबिंद होने से चली गई। अब दूसरी आंख पर ग्रहण ने गहरा प्रभाव डाला है। चिकित्सक संजीव राहड़ ने बताया कि श्रीराम ने नंगी आंख के सूर्य ग्रहण देखा था। इसका उसकी आंख पर गहरा प्रभाव पड़ा है। रेटिना बीच से जलने के कारण उसे अब बेहद कम दिखाई देने लगा है।
बच्चों की आंखें ज्यादा नाजुक होती हैं। ग्रहण आदि से होने वाली तकलीफ में तत्काल उपचार होने पर समस्या से बचा जा सकता है। गंभीर मामलों में एक वर्ष तक दवा लेनी पड़ सकती है। ग्रहण से प्रभावित मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। -संजीव राहड़, नेत्र चिकित्सक
सूर्यगहण के समय खतरनाक सोलर रेडिएशन निकलती हैं, जो रेडिश आंखों के नाजुक टिशु को नुकसान पहुंचाती हैं। इसकी वजह से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसे ‘ग्रहण-अंधापन’ भी कहा जाता है। ग्रहण के बाद इससे पीडि़त मरीज भी सामने आ रहे हैं। -डॉ. अनुपमा सैनी, रेटिना विशेषज्ञ
Published on:
31 Dec 2019 11:07 am
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