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खास खबर: पट्टे बांटे 10 लाख, महज 38 गांवों में मिला ‘स्वामित्व’

-केंद्र की स्वामित्व योजना की राजस्थान में मंथर चाल: जैसलमेर के अलावा कहीं भी वितरित नहीं हुए सम्पत्ति कार्ड-जयपुर, दौसा और जैसलमेर के गांवों में ही डिजिटल मैपिंग के लिए पूरी हुई ड्रोन उड़ान

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सीकर

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Ashish Joshi

Jan 19, 2022

खास खबर: पट्टे बांटे 10 लाख, महज 38 गांवों में मिला ‘स्वामित्व’

खास खबर: पट्टे बांटे 10 लाख, महज 38 गांवों में मिला ‘स्वामित्व’

आशीष जोशी

सीकर. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उनकी सम्पत्ति का मालिकाना हक (Property Ownership) दिलाने के उद्देश्य से केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ( Central Panchayati Raj Ministry ) की ओर से शुरू की गई स्वामित्व योजना ( Ownership Plan) के प्रति राजस्थान की बेरूखी नजर आ रही है। प्रशासन गांवों के संग अभियान (Campaign With The Administration Village) के तहत भले ही राज्य सरकार (State Government ) ने लोगों को करीब दस लाख पट्टे बांट दिए हों, लेकिन केंद्र की महत्वकांक्षी स्वामित्व योजना यहां दम तोड़ रही है। हालात यह है कि प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में 13 हजार गांवों को कवर करने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 1127 गांवों में ड्रोन उड़ान का कार्य पूरा हो सका है। गांवों में मकानों की डिजिटल मैपिंग के लिए जयपुर, जैसलमेर और दौसा के अलावा कहीं भी ड्रोन उड़ान नहीं हुई है। प्रदेश में इस योजना की मंथर चाल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल जैसलमेर (Jaisalmer) जिले के 38 गांवों में 582 सम्पत्ति कार्ड वितरित किए गए हैं।

क्या है स्वामित्व योजना
गांवों के गृहमालिकों को अधिकार का रिकॉर्ड प्रदान करने के उद्देश्य से 24 अप्रेल 2020 को स्वामित्व योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत उन लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक (Ownership Rights) मिलना है, जिनकी जमीन का सरकारी आंकड़ों में कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। ड्रोन कैमरे का उपयोग करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में आवासीय भूमि के स्वामित्व की मैपिंग कर कानूनी स्वामित्व अधिकार (सम्पत्ति कार्ड/पट्टा) ( Property Card Lease) जारी किए जाते हैं। इसे केंद्रीय पंचायत राज मंत्रालय ने राज्य के राजस्व व पंचायती राज और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से लागू किया है। राजस्थान सहित 29 राज्यों ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग के साथ एमओयू किया। वर्ष 2025 तक देश के सभी गांवों को कवर करने का लक्ष्य है।

जैसलमेर के अलावा कहीं नहीं बने सम्पत्ति कार्ड
योजना के तहत प्रदेश में केवल जैसलमेर जिले में ही सम्पत्ति कार्ड वितरित किए जा सके हैं। यहां दिसम्बर 2021 तक 183 गांवों में ड्रोन उड़ान का काम पूरा कर 38 गांवों में सम्पत्ति कार्ड (पट्टा) वितरित किए जा चुके हैं। अब तक तीन जिलों में ही ड्रोन उड़ान का काम हो पूरा हो सका है। जैसलमेर के अलावा दौसा में 850 व जयपुर के 94 गांवों में ड्रोन उड़ान पूरी हो पाई है।


प्रदेश की स्थिति इस तरह समझें
- 13000 गांवों को योजना में कवर करने का लक्ष्य है 31 मार्च 2022 तक
- 1127 गांव ही कवर हो पाए हैं दिसम्बर 2021 तक
- 33543 गांव करने हैं 31 मार्च 2023 तक

ग्रामीणों को मिलेगा लाभ
- ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
- ग्रामीणों को बैंक ऋण लेने में आसानी होगी।
- गांवों में ढांचागत कार्यक्रमों के लिए प्रभावी रूप से योजना बनाने में सरकार को सक्षम करेगा।

कोरोना के कारण शुरू नहीं हुआ काम
सीकर जिले में केंद्र सरकार की यह योजना लागू हो चुकी है, लेकिन कोरोना की वजह से यहां प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं आ सका है। इससे ग्रामीणों को प्रोत्साहन मिलने के साथ गांवों में सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत को बढ़ावा मिलेगा।
सुरेश कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद सीकर

राजस्व विभाग के सहयोग से किया काम
केंद्र सरकार की पंचायती राज से जुड़ी स्वामित्व योजना में जैसलमेर की फतेहगढ़ तहसील में राजस्व विभाग के सहयोग से लोगों के सम्पत्ति कार्ड बना कर उन्हें लाभान्वित किया गया है। सरकार के निर्देशानुसार काम किया जा रहा है।
प्रदीप कुमार धनदे, विकास अधिकारी, फतेहगढ़, जैसलमेर