21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Sting Operation : वीडियो में रिकॉर्ड हुई जनाना अस्पताल की बेहद कड़वी हकीकत

पत्रिका टीम ने लगातार दो दिन तक जब जनाना अस्पताल सीकर का जायजा लिया तो यह चौंकाने वाली हकीकत देखने को मिली।

2 min read
Google source verification
sikar janana hospital

रविन्द्र सिंह राठौड़/सीकर.

सरकारी जनाना अस्पताल में इन दिनों मनमर्जी का खेल चरम पर हैं। जहां किसी गरीब को एक खुशी का चिराग मिलता, वहां भी कुछ सरकारी कर्मचारियों ने लूट खसौट मचा रखी है। सरकार से वेतन के रूप में बड़ी राशि लेने वाले नर्सिंग स्टॉफ ने इस लूट खसौट की रेट लिस्ट भी बना रखी है।

यहां जन्म लेने वाले बेटे व बेटी के नाम पर प्रसूता व उसके परिजनों से पांच सौ से 11 सौ रुपए तक की बख्शीस ली जा रही हैं। पत्रिका टीम ने लगातार दो दिन तक जब सरकारी जनाना अस्पताल का जायजा लिया तो यह चौंकाने वाली हकीकत देखने को मिली। जिसकी पत्रिका के पास वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।

प्रसुताओं की देखभाल पर नहीं बख्शीश पर कर्मचारियों की नजर

अस्पताल में खुले आम लोगों के साथ बख्शीश के नाम पर परिजनों से जबरदस्ती की जाती है। बच्चें के जन्म से लेकर प्रसुता के गाड़ी में बैठकर अस्पताल से रवाना होने तक यह सिलसिला चलता रहता है। कुछ कर्मचारियों का साफ तौर पर यह भी कहना है कि यह तो हम सब से लेते हैं। हर प्रसूता पर देखभाल के नहीं, बख्शीस के लिए बच्चे के जन्म के बाद कुछ कर्मचारियों की विशेष नजर रहती हैं।


प्रसूता के परिजनों से बख्शीस का खेल

कंवरपुरा निवासी सुरेश कुमार बिजारणिया ने बताया कि वे अपनी पत्नी सारदा की डिलीवरी के लिए जनाना अस्पताल पहुंचे। डिलीवरी के समय पांच सौ रुपए हमसे लिए गए। पूछने पर उन्होंने कहां यह हम सब से लेते है। उसके बाद सफाई कर्मचारियों ने दो सौ रुपए हमसे लिए हैं। मैने अपनी पत्नी से कहा इन्हें सरकार से वेतन मिलती है। तो प्रसूता ने कहा उन्होंने बोला है कि वे सब से लेती हैं। वार्ड से गाड़ी तक छोडऩे के भी 50 रुपए हमने अभी दिए है।


परिजनों से चाय नाश्ते की मांग

दीनवा लाडखानी धर्मवीर सिंह शेखावत अपनी भाभी के डिलिवरी के लिए अस्पताल में चक्कर लगा रहे थे। रात को जब वे 12 बजे के करीब घर के लिए निकल रहे थे। तो कुछ नर्सों ने उनसे से कहा हम रात की ड्यूटी करेंगे। हमारे लिए चाय नाश्ता कुछ लाकर दो। उसके लिए उन्होंने कोई पैसे मुझे नहीं दिए।


सफाई व्यवस्था भी चौपट

बख्शीस में सफाई कर्मचारी भी बख्शीस में लगे होने के कारण अब सफाई पर किसी का ध्यान रहा। रविवार को जिन सीढिय़ों और लिफ्ट के पास से प्रसुताओं को एक से दूसरे वार्डों में लेकर जा रहे थे। उन्ही सीढिय़ों के नीचे कूड़े का एक ढ़ेर नजर आया। इधर सीढिय़ो और कोने में लोगों ने पीकदान बना दिया।