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बचपन में काटना पड़ा हाथ और अब ये शख्स बन गया राजस्थान का सबसे काबिल खिलाड़ी

दिव्यांग खिलाड़ी और शारीरिक शिक्षक महेश नेहरा सीकर जिले के गांव मौल्यासी के रहने वाले हैं। जानिए इनका संघर्ष।

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mahesh nehra sikar

जोगेन्द्र सिंह गौड
सीकर. कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बाधाएं बौनी साबित हो जाती हैं। मन में यदि विश्वास और हौसलों की उड़ान दम भरती हो तो शारीरिक दुर्बलताएं भी सफलता में बदल जाया करती हैं। जी हां, कुछ इसी तरह का एक कारनामा दिखाते नजर आएंगे सीकर जिले के मौल्यासी गांव निवासी महेश नेहरा।

जो कि, शरीर से भले ही दिव्यांग हैं। लेकिन, दौड़ में सामान्य खिलाडिय़ों को भी पीछे छोड़ते हुए मैदान पर उन्हें बराबर की टक्कर देंगे। दावा है कि महेश प्रदेश के ऐसे पहले खिलाड़ी होंगे जो शारीरिक शिक्षकों की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगे।


जानकारी के अनुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बावड़ी के शारीरिक शिक्षक महेश नेहरा का चयन 29 व 30 दिसंबर को बांसवाड़ा में होने वाली राज्य स्तरीय एथेलेटिक्स टूर्नामेंट में हुआ है। जबकि इस टूर्नामेंट में नेहरा को छोडकऱ कोई दूसरा ऐसा खिलाड़ी नहीं दौडेग़ा जो कि, दिव्यांग होने के बावजूद सामान्य खिलाडिय़ों की श्रेणी में शामिल है।

बतौर नेहरा का कहना है कि मेर भले ही एक हाथ नहीं है और मुझे कमजोर समझा जाता है। लेकिन, मन का विश्वास कहता है कि नियमित अभ्यास और कड़ी मेहनत से मंजिल हासिल करूंगा। हालांकि सामान्य खिलाडिय़ों को चार सौ मीटर दौड़ में हराना मेरे लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। लेकिन, इंसान यदि ठान ले तो लक्ष्य पाना असंभव भी नहीं है। मैदान में उतरने से पहले 26, 27 व 28 को नेहरा पहले विशेष प्रशिक्षण हासिल करेंगे। जिसके लिए उनके बराबर के साथी भी दम आजमा रहे हैं।

सौ के करीब हैं मेडल
दिव्यांग खिलाड़ी व शिक्षक महेश अब-तक जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर 96 मेडल अपनी झौली में डाल चुके हैं। इनमें कई गोल्ड व सिल्वर मेडल शामिल हैं। नेहरा की एक उपलब्धि और है कि वे 2010 में चीन में एशियन गेम में भी हिस्सा लेकर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं।

चौंक गए सब
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चयन के दौरान भी नेहरा को सामान्य खिलाडिय़ों के साथ दौड़ाया गया। लेकिन, रफ्तार के साथ दौड़ में जब सबको पीछे छोड़ दिया तो चयनकर्ता भी चौंक गए। बाद में स्कूल के प्रिंसीपल द्वारा नेहरा का नाम आगे भिजवाया गया तो वहां से सामान्य शिक्षकों की दौड़ में शामिल होने की स्वीकृति जारी कर दी गई। नेहरा ने बताया कि वो किशोरावस्था में एक मील में मजदूरी करते थे। इस दौरान मशीन में हाथ आ गया, जिसे बाद में इलाज के दौरान काटना पड़ा।