
सूर्यदेव का धनु राशि में प्रवेश आज, चार महीने अस्त रहेंगे शुभ काम
सीकर .मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा मंगलवार को रात 9.32 बजे आकाशीय मंत्रिमंडल के मेघेश, फलेश, दुर्गेश सूर्यदेव वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही धनु संक्रांति की शुरुआत होने के साथ मलमास लगने से मांगलिक कार्य, मुंडन संस्कार, गृहप्रवेश सहित अन्य शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे। सूर्यदेव बाघ पर सवार होकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। उपवाहन घोड़ा रहेगा। संक्रांति का नक्षत्र नाम घोरा रहेगा, जिससे आगामी दिनों में सरकार द्वारा अल्पसंख्यक तबके के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा। नई योजनाओं की सौगात, बाजार में तेजी का दौर भी देखने को मिलेगा। साथ ही तेज सर्दी का प्रकोप बढ़ेगा। मलमास और गुरु-शक्र का तारा अस्त होने से मांगलिक कार्यों के लिए अप्रैल तक का इंतजार करना होगा। 19 जनवरी से 16 फरवरी तक गुरु और 14 फरवरी से 20 अप्रैल तक शुक्र का तारा अस्त रहेगा। अब चार महीने बाद फिर से शादी समारोह होंगे। हालांकि इससे पूर्व तीन अबूझ मुहूर्त बसंत पंचमी, फुलेरा दोज और रामनवमी पर तारे अस्त रहेंगे। इस कारण से अगले मुहूर्त 25 अप्रैल से शुरू होंगे।28 दिन देवगुरु बृहस्पति, 66 दिन शुक्र अस्त रहेंगे।सूर्य उत्तरायण के साथ समापन धनु राशि में सूर्य के आने पर तेल, कपास की कीमतें बढऩे के आसार रहेंगे। मलमास/ खरमास का समापन 14 जनवरी 2021 को मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण के साथ होगा। मलमास का महीना दान पुण्य और ईश्वर भक्ति के लिए विशेष माना गया है, लेकिन मलमास के दिनों में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है।
क्या है धनु मल मास
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता तो उस मास को धनु मल मास कहते हैं। मलमास में अनाज (कनक व चावल) से भरे हुए ताम्रपत्र (कलश), लाल गर्म वस्त्र, गुड़, तिल के बने पदार्थ, मौसमी फल, मिष्ठान, ईंधन आदि का दक्षिणा सहित दान का विशेष महात्म्य है।
सूर्य साल में 2 बार जाता है बृहस्पति में
एक वर्ष में सूर्य 2 बार अपने गुरु बृहस्पति की राशि में जाता है। जिसे 15 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच धनु मल मास कहते हैं और 14 मार्च से 13 अप्रैल तक के समय को मीन मल मास कहते हैं। इन दोनों ही समय की अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं हो सकता।
Published on:
15 Dec 2020 01:15 pm
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